मातृ दिवस: फर्ज और ममता की मिसाल हैं ये माताएं...बोलीं- सुपर मॉम बनना अभी बाकी है
ड्यूटी के दौरान मां का फर्ज निभाना नहीं भूलतीं। अपनी बेटी से कई बार मोबाइल पर बात करती हैं, ताकि बेटी को एहसास न हो कि मां उससे दूर है। घर लौटने के बाद जैसे ही अपनी बेटी को देखती हैं तो सारी थकान दूर हो जाती है।
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खाकी में जिम्मेदारी निभा रही हूं लेकिन अभी सुपर मॉम बनना बाकी है। यह कहना है चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस में तैनात हरजीत कौर का। वह अपनी दो साल की नन्ही परी गुरसिमरत कौर के साथ कुराली में रहती हैं। उनके पति सेना में तैनात हैं। बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी उनके ऊपर ही है। ड्यूटी पर जाने से पहले वे बेटी की सारी जिम्मेदारी निभाती है। उसका सारा कामकाज, दिन का खाना तैयार कर वह ड्यूटी पर निकल जाती हैं।
ड्यूटी के दौरान मां का फर्ज निभाना नहीं भूलतीं। अपनी बेटी से कई बार मोबाइल पर बात करती हैं, ताकि बेटी को एहसास न हो कि मां उससे दूर है। घर लौटने के बाद जैसे ही अपनी बेटी को देखती हैं तो सारी थकान दूर हो जाती है। गुरसिमरत कौर ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते बेटी के साथ रहने पर काफी डर लगा रहता है लेकिन एहतियात बरतती हैं।
मम्मा आप बाहर रहते हो, अपना ख्याल रखा करो.. बेटी की इन बातों से मिलता है सुकून
ड्यटी पर जाते वक्त जब मेरी सात वर्षीय बेटी आलिया कहती है कि मां आप बाहर जा रही हो.. अपना ख्याल रखना तो मेरे दिल को जो सुकून महसूस होता है उसे बयां नहीं कर सकती। यह कहना है कि चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस में तैनात जीरकपुर की रहने वाली कांस्टेबल सोनिया का। उन्होंने बताया कि उनकी लाडली अभी दूसरी कक्षा में पढ़ती लेकिन बातें इतनी अच्छी करती है कि सारी थकान पलभर में छूमंतर हो जाती है। उनके पति प्रॉपर्टी का काम करते हैं।
सोनिया सुबह आठ बजे ड्यूटी पर जाती हैं। इस दौरान उनकी बेटी की देखभाल कभी सास- ससुर तो कभी पति करते हैं। उन्होंने कहा कि करीब 12 घंटे के ड्यूटी के बाद जब घर लौटती हैं तो कोरोना के प्रकोप के चलते बेटी के पास जाने में भी हिचकिचाहट होती है। कई बार बेटी कहती है कि मम्मा आप हरदम ड्यूटी पर रहती हो। पुलिस की नौकरी में सबसे बड़ा चैलेंज अपने बच्चों की परवरिश ही है।
दूसरी तरफ पुलिस की ड्यूटी भी जरूरी है, बेटी को समय देने में परेशानी होती है लेकिन यह मां के ऊपर होता है, कि वे कम समय में भी छोटी-छोटी खुशियों को कैसे समेटे। कई बार ऐसा होता है कि बेटी बीमार होती है और वह अपनी डयूटी पर फर्ज निभा रही होती हैं।
फर्ज और ममता की मिसाल हैं कांस्टेबल ऋतु खरब
यूटी पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात ऋतु खरब फर्ज और ममता की मिसाल हैं। एक तरफ कोरोना काल में करीब 12 घंटे ड्यूटी कर रही हैं, वही अपने बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए गांव भेज दिया है। वह वीडियो कॉल पर बात कर अपने बच्चों का हालचाल लेती हैं।
उन्होंने बताया कि उनका छह साल का बेटा मिलन पंघाल और तीन साल की बेटी शानवी है। बेटा केजी और बेटी तीसरी कक्षा में पढ़ती है। कोरोना के बढ़ते केस की वजह से लॉकडाउन में सुबह 8 से रात 8 बजे तक ड्यूटी कर रही हैं। इस दौरान कई बार दोनों बच्चों को उनके पति देखभाल करते हैं लेकिन वह भी अक्सर ड्यूटी पर चले जाते हैं। ऐसे में बच्चों को घर में अकेला रहना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी फर्ज को मां की ममता के आड़े आने नहीं दिया।
उनका कहना कि इस संकट की घड़ी में ड्यूटी करना पहली प्राथमिकता है। पुलिस की वर्दी इसलिए पहनी है, क्योंकि हमें जनता की सुरक्षा करनी है और कोरोना आपदा में इस वक्त जनता को सबसे ज्यादा जरूरत पुलिस की है। कोरोना के बढ़ते केस की वजह से खुद को बच्चों से दूर कर उन्हें गांव भेज दिया है।