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बच्ची सौंपने की पिता की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने की टिप्पणी-किशोर लड़की के लिए मां का साथ बेहद अहम

Tue, 02 Mar 2021 11:09 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 02 Mar 2021 11:09 AM IST
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Mother support is important for a girl child, says Punjab and Haryana Highcourt
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

13 साल की बच्ची की कस्टडी पाने के लिए दाखिल पिता की याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि किशोर हो रही लड़की के लिए मां का साथ बेहद अहम होता है। जब तक उचित कारण न हो तब तक बच्ची को उसकी मां से अलग नहीं होने देना चाहिए।

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गुरुग्राम निवासी याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी शादी 2006 में हुई थी और दो वर्ष बाद उन्हें बेटी हुई। इसके बाद पति पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा और वे अलग हो गए। इस बीच विवाद
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बच्ची की कस्टडी को लेकर हुआ जिसके बाद मां ने फैमिली कोर्ट की शरण ली। 

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फैमिली कोर्ट ने 2017 में मां के हक में फैसला सुनाया जिसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची ने कहा कि उसकी पत्नी बेटी का सही तरीके से ध्यान नहीं रख सकती। बच्ची को मां को सौंपने से उसका सही विकास नहीं हो पाएगा। मां ने दलील दी कि वह पढ़ी लिखी है और बच्ची की सही परवरिश करने के साथ ही उसे अच्छा भविष्य देने में भी सक्षम है। इस दौरान बच्ची से कोर्ट ने जानना चाहा कि वह किसके साथ रहना चाहती है तो बच्ची ने कहा कि उसे मां के साथ रहना है।


मां सही परवरिश देने में सक्षम
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची की पत्नी पढ़ी लिखी और सामाजिक है, जबकि याची एकांतप्रिय है। कोर्ट ने माना कि बच्ची की मां उसे सही परवरिश देने में सक्षम है। हाईकोर्ट ने पिता की याचिका को खारिज करते हुए कस्टडी मां को देने के फैमिली कोर्ट के फैसले पर मोहर लगा दी।

हाईकोर्ट ने कहा कि माता- पिता के बीच के विवाद से परिवार तो बिखरता ही है साथ ही बच्चे पर मानसिक और शारीरिक तौर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। खासकर जब बच्चा एक लड़की हो। हाईकोर्ट ने कहा कि 13 साल की बढ़ती उम्र की लड़की के लिए मां की भूमिका और अहम हो जाती है क्योंकि मां बच्ची की मन की भावना बगैर कहे महसूस कर सकती है। 

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