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देखिए एक मां, जो दुनिया से जाते जाते एक दिल को धड़कनें दे गई

Mon, 15 May 2017 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 15 May 2017 09:20 AM IST
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mother's day, unbelievable story of jaswinder kaur who donated organs to a boy
एक युवक को अपने अंग दान कर गई ये मां
मदर्स डे के मौके पर हम आपको एक ऐसी मां की कहानी सुनाने जा रहे हैं जो मर कर भी अमर हो गई। अब वह एक दिल की धड़कनें बनकर जिंदा रहेगी। मदर्स डे की पूर्व संध्या पर एक मां ने दुनिया से जाते-जाते दूसरी मां को अनमोल तोहफा दे दिया।
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चंडीगढ़ सेक्टर- 25 निवासी जसविंदर कौर को एक्सीडेंट के बाद पीजीआई में दाखिल कराया गया था। ब्रेन डेड होने के बाद उनके अंगों को डोनेट किया गया। जसविंदर का हार्ट लुधियाना के जगरांव के रहने वाले 23 वर्षीय युवक के काम आ गया। युवक का हार्ट सिर्फ 20 प्रतिशत काम कर रहा था।
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डाक्टरों ने कह दिया था कि युवक ज्यादा दिन तक नहीं जी सकता। युवक की मां प्रकाश कौर ने बताया कि मुझे परमात्मा पर पूरा विश्वास था। डोनर जसविंदर मेरे लिए परमात्मा का स्वरूप बनकर आई। मेरे लिए यह किसी अनमोल तोहफे से भी बढ़कर है।
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पिछले साल से बिगड़ने लगी थी तबीयत

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पीजीआई - फोटो : अमर उजाला
युवक के पिता कुलदीप ने बताया कि नवंबर में उनके बेटे को खांसी आनी शुरू हो गई थी। लुधियाना के डीएमसी में चेस्ट स्पेशलिस्ट ने जांच की। लेकिन हार्ट का चेकअप नहीं किया। उल्टा एलर्जी की दवा दे दी। इसके बाद वे वापस गांव चले गए। वहां दोबारा से तबीयत खराब हो गई। फिर से स्थानीय डाक्टर को दिखाया। डाक्टर ने इको चेक किया तो पता चला कि हार्ट काम नहीं कर रहा। वहां से पीजीआई ले आए।

पीजीआई का चौथा ट्रांसप्लांट
पीजीआई का यह चौथा ट्रांसप्लांट है। इससे पहले पीजीआई तीन ट्रांसप्लांट कर चुका है। दुर्भाग्य से दो मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि एक पेशेंट ठीक है। जसविंदर कौर के परिजनों ने जैसे ही आर्गन डोनेशन की अनुमति दी, उसके बाद पीजीआई की टीम ट्रांसप्लांट में जुट गई। कई टीमों ने इस काम को अंजाम दिया है। इसमें ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी और कार्डियोलाजी की टीम व अन्य स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई।

दूसरों का दुख देख नहीं पाती थीं मेरी मां

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एक युवक को अपने अंग दान कर गई ये मां
डोनर जसविंदर कौर के बेटे गगनदीप ने बताया कि उनकी मां हमेशा दूसरों की मदद करने में आगे रहती थीं। खाना, कपड़े और गरीब लड़कियों की शादी में आर्थिक मदद करती थीं। किसी का भी दुख देखकर वह रोने लगती थीं। हादसे के बाद जब उनके बचने की कोई आस नहीं रही तो हमने उन्हें हमेशा देखने के लिए उनके अंगों को डोनेट करने का फैसला लिया।

इससे उनकी पीड़ितों की मदद करने की ख्वाहिश भी पूरी हो गई। जसविंदर सेक्टर 25 में रहती थीं। दस मई को एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी थी। इससे वे गंभीर घायल हो गई थीं। जसविंदर की दोनों किडनी, एक पेनक्रियाज, दोनों कोर्निया और हार्ट जरूरतमंद मरीजों के काम आ गए और उन्हें नई जिंदगी मिल गई।

जसविंदर कौर के परिजनों की हिम्मत को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उनके इस कदम से समाज में आर्गन डोनेशन के लिए और जागरूकता बढ़ेगी। परिजनों की ख्वाहिश को पूरी करने के लिए पीजीआई की टीम ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
- डा. विपिन कौशल नोडल आफिसर रोटो पीजीआई
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