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मां गंगा भक्तों की मनोकामना करती है पूर्ण : आचार्य चंद्रभूषण
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चंडीगढ़। वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि को श्री गंगा जयंती का महापर्व मनाया जाता है। गंगा सप्तमी शनिवार को मनाई गई। शास्त्र पुराणों के अनुसार भगवान शिव जी ने मां गंगा को जटाओं में धारण किया। मां गंगा गोमुख से गंगासागर तक निरंतर अपने प्रभाव में चलती रहती है। पतित पावनी मां गंगा भक्तों की मनोकामनापूर्ण करती है। यह कहना है प्राचीन शिव मंदिर सेक्टर-24 के पुजारी आचार्य चंद्र भूषण का।
उन्होंने कहा कि गंगा सप्तमी पर मां गंगा की विशेष पूजन की जाती है। मां गंगा प्रत्यक्ष देवी हैं। भगवान राम, श्रीकृष्ण भू लोक पर अवतार लिया और अपना कार्य पूर्ण कर स्वधाम को चले गए, परंतु मां गंगा आज भी प्रत्यक्ष रूप में भू लोक में निरंतर बहती चली जा रही है। सारे भक्तों का उद्धार कर रही है मां गंगा अपने भक्तों के पापों को नष्ट करने वाली पुण्य देने वाली मनोकामना पूर्ण करने वाली मां साक्षात गंगा है। गंगाजल पानी में डाल कर स्नान करना चाहिए। इस दिन मां गंगा का पूजन पूजा पाठ हवन जप तप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कपिल मुनि के क्रोध अग्नि से राजा सगर के 60 हजार पुत्र क्रोध अग्नि भस्म हो गए थे। सगर राजा के पुत्रों के उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने तपस्या करके मां गंगा को भूलोक में लाए। गोमुख से गंगासागर तक मां गंगा निरंतर प्रत्यक्ष रूप में सभी भक्तों को दर्शन देती है।
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उन्होंने कहा कि गंगा सप्तमी पर मां गंगा की विशेष पूजन की जाती है। मां गंगा प्रत्यक्ष देवी हैं। भगवान राम, श्रीकृष्ण भू लोक पर अवतार लिया और अपना कार्य पूर्ण कर स्वधाम को चले गए, परंतु मां गंगा आज भी प्रत्यक्ष रूप में भू लोक में निरंतर बहती चली जा रही है। सारे भक्तों का उद्धार कर रही है मां गंगा अपने भक्तों के पापों को नष्ट करने वाली पुण्य देने वाली मनोकामना पूर्ण करने वाली मां साक्षात गंगा है। गंगाजल पानी में डाल कर स्नान करना चाहिए। इस दिन मां गंगा का पूजन पूजा पाठ हवन जप तप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कपिल मुनि के क्रोध अग्नि से राजा सगर के 60 हजार पुत्र क्रोध अग्नि भस्म हो गए थे। सगर राजा के पुत्रों के उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने तपस्या करके मां गंगा को भूलोक में लाए। गोमुख से गंगासागर तक मां गंगा निरंतर प्रत्यक्ष रूप में सभी भक्तों को दर्शन देती है।
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