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खुलासा: पंजाबी पॉप गीतों पर हुई रिसर्च में उभरा निराशाजनक सच
सीमा सिंदवानी आनंद/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 08 Jun 2016 11:42 AM IST
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विदेशों के अलावा बॉलीवुड-पॉलीवुड में चर्चित पंजाबी पॉप गीतों पर हुई रिसर्च में निराशाजनक सच उभरकर सामने आया है।रिसर्च बताती है कि ज्यादातर पंजाबी पॉप गानों में नशा और हिंसा को परोसा जा रहा है। ये रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद के प्रोफेसर धीरज शर्मा की टीम ने की है।
गौरतलब है कि सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टिफिकेशन(सेंसर बोर्ड) शाहिद-करीना की अपकमिंग फिल्म 'उड़ता पंजाब' के प्रोडयूसर से फिल्म के नाम से पंजाब को हटाने पर जोर दे रहा है लेकिन जब हर पंजाबी पॉप गाने में नशे और हिंसा को परोसा जा रहा है, तो इसे हटाना कैसे संभव है।
'चार बोतल वोदका, काम मेरा रोज का', 'मित्तरां नूं शौक हथियारां दा' जैसे पंजाबी गीत लोगों की जुबां पर छाए हैं। पंजाबी पॉप में हिंसा, ड्रग्स और शराब के साथ जुनून पराया नहीं है और बिरादरी में सालों से चला आ रहा है। यह इतना ज्यादा है कि क्रिकेटर हरभजन सिंह का हाल ही का ऐसे गानों से दूर रहने का ट्वीट भी वायरल हुआ है। शादी में चली गोली जब युवक को लगी थी तो हरभजन सिंह ने टवीट किया था कि ये पंजाबी गीतों में बढ़ती हिंसा का परिणाम है।
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कैसे हुई स्टडी?
प्रोफेसर धीरज शर्मा की टीम ने 18 से 25 साल की उम्र के बीच के 200 छात्रों को 50 पंजाबी गाने सुनवाकर स्टडी की है और इसमें सामने आया है कि पंजाब के युवाओं में हिंसा और ड्रग्स के प्रति ज्यादा झुकाव है। ये गाने 5 साल से ज्यादा पुराने नहीं हैं।
शोधकर्ताओं की टीम को इन गानों के माध्यम से यह पता चला कि पांच में से एक में हिंसा और ड्रग्स की बात सामने नहीं आई जबकि बाकी में हिंसा और ड्रग्स के होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। प्रत्येक छात्र से यूएसबी पर रेगुलर सुने जाने वाले 50 पसंदीदा गाने प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।
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गौरतलब है कि सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टिफिकेशन(सेंसर बोर्ड) शाहिद-करीना की अपकमिंग फिल्म 'उड़ता पंजाब' के प्रोडयूसर से फिल्म के नाम से पंजाब को हटाने पर जोर दे रहा है लेकिन जब हर पंजाबी पॉप गाने में नशे और हिंसा को परोसा जा रहा है, तो इसे हटाना कैसे संभव है।
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'चार बोतल वोदका, काम मेरा रोज का', 'मित्तरां नूं शौक हथियारां दा' जैसे पंजाबी गीत लोगों की जुबां पर छाए हैं। पंजाबी पॉप में हिंसा, ड्रग्स और शराब के साथ जुनून पराया नहीं है और बिरादरी में सालों से चला आ रहा है। यह इतना ज्यादा है कि क्रिकेटर हरभजन सिंह का हाल ही का ऐसे गानों से दूर रहने का ट्वीट भी वायरल हुआ है। शादी में चली गोली जब युवक को लगी थी तो हरभजन सिंह ने टवीट किया था कि ये पंजाबी गीतों में बढ़ती हिंसा का परिणाम है।
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कैसे हुई स्टडी?
प्रोफेसर धीरज शर्मा की टीम ने 18 से 25 साल की उम्र के बीच के 200 छात्रों को 50 पंजाबी गाने सुनवाकर स्टडी की है और इसमें सामने आया है कि पंजाब के युवाओं में हिंसा और ड्रग्स के प्रति ज्यादा झुकाव है। ये गाने 5 साल से ज्यादा पुराने नहीं हैं।
शोधकर्ताओं की टीम को इन गानों के माध्यम से यह पता चला कि पांच में से एक में हिंसा और ड्रग्स की बात सामने नहीं आई जबकि बाकी में हिंसा और ड्रग्स के होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। प्रत्येक छात्र से यूएसबी पर रेगुलर सुने जाने वाले 50 पसंदीदा गाने प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।