{"_id":"68e6c59fdab98c1e8403220e","slug":"more-lives-are-being-lost-in-road-accidents-than-due-to-illness-administrator-chandigarh-news-c-16-pkl1079-840288-2025-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"इतने बीमारी से नहीं, जितने सड़क हादसों में गवां रहे ज्यादा जान : प्रशासक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इतने बीमारी से नहीं, जितने सड़क हादसों में गवां रहे ज्यादा जान : प्रशासक
विज्ञापन
चंडीगढ़। होंडा इंडिया फाउंडेशन ने बुधवार को पुलिस को 50 क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) मोटरसाइकिलें सौंपीं। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने मोटरसाइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रशासक ने कहा कि शहर में पुलिस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 5.6 मिनट है जिसे अगले वर्ष तक घटाकर 4 मिनट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। देशभर में यह औसत 18.6 मिनट है।
उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क हादसे सबसे दर्दनाक घटनाएं हैं। लोग बीमारियों से कम और हादसों में अधिक जान गंवा रहे हैं। दो मिनट में सड़क हादसा पूरे परिवार को तबाह कर सकता है। पुलिस को चाहिए कि वह पीड़ितों को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराए ताकि अनमोल जीवन बचाया जा सके। ये क्विक रिस्पॉन्स वाहन किसी भी गली-मोहल्ले में सबसे पहले पहुंचेंगे। यह पहल ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
होंडा इंडिया फाउंडेशन के अधिकारी राजीव तनेजा और करण गिल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन का जिम्मा नहीं है बल्कि समाज के हर नागरिक का सामूहिक दायित्व है। प्रत्येक बाइक की कीमत लगभग 2 लाख 70 हजार रुपये बताई गई। इस दौरान मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद, गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, आईजीपी पुष्पेन्द्र कुमार, एसएसपी कंवरदीप कौर और एसएसपी (सिक्योरिटी एवं ट्रैफिक) सुमेर प्रताप सिंह सहित पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने बताया कि ये मोटरसाइकिलें सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में पुलिस को तत्काल मौके पर पहुंचकर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाएंगी। हर बाइक में सायरन, फ्लैशर, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, टॉर्च, स्टोरेज बॉक्स और हेलमेट जैसे उपकरण लगे हैं। एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि इन 50 बाइक में से 25 बाइक ट्रैफिक शाखा को और 25 बाइक पीसीआर टीम को प्रदान की जाएंगी। इससे सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों में मजबूती आएगी।
विज्ञापन
पॉक्सो मामलों में चंडीगढ़ नंबर वन
यूटी प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ नए कानूनों के क्रियान्वयन में देश में नंबर वन है। पॉक्सो मामलों में पुलिस ने बेहतरीन काम किया है। जांच पूरी करने और चालान पेश करने में औसतन 60 दिन का समय लिया गया और अब तक 181 मामलों में से 165 आरोपियों को सजा दिलाई जा चुकी है।
विज्ञापन
उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क हादसे सबसे दर्दनाक घटनाएं हैं। लोग बीमारियों से कम और हादसों में अधिक जान गंवा रहे हैं। दो मिनट में सड़क हादसा पूरे परिवार को तबाह कर सकता है। पुलिस को चाहिए कि वह पीड़ितों को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराए ताकि अनमोल जीवन बचाया जा सके। ये क्विक रिस्पॉन्स वाहन किसी भी गली-मोहल्ले में सबसे पहले पहुंचेंगे। यह पहल ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
होंडा इंडिया फाउंडेशन के अधिकारी राजीव तनेजा और करण गिल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन का जिम्मा नहीं है बल्कि समाज के हर नागरिक का सामूहिक दायित्व है। प्रत्येक बाइक की कीमत लगभग 2 लाख 70 हजार रुपये बताई गई। इस दौरान मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद, गृह सचिव मंदीप सिंह बराड़, डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, आईजीपी पुष्पेन्द्र कुमार, एसएसपी कंवरदीप कौर और एसएसपी (सिक्योरिटी एवं ट्रैफिक) सुमेर प्रताप सिंह सहित पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने बताया कि ये मोटरसाइकिलें सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में पुलिस को तत्काल मौके पर पहुंचकर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाएंगी। हर बाइक में सायरन, फ्लैशर, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, टॉर्च, स्टोरेज बॉक्स और हेलमेट जैसे उपकरण लगे हैं। एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि इन 50 बाइक में से 25 बाइक ट्रैफिक शाखा को और 25 बाइक पीसीआर टीम को प्रदान की जाएंगी। इससे सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों में मजबूती आएगी।
विज्ञापन
पॉक्सो मामलों में चंडीगढ़ नंबर वन
यूटी प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ नए कानूनों के क्रियान्वयन में देश में नंबर वन है। पॉक्सो मामलों में पुलिस ने बेहतरीन काम किया है। जांच पूरी करने और चालान पेश करने में औसतन 60 दिन का समय लिया गया और अब तक 181 मामलों में से 165 आरोपियों को सजा दिलाई जा चुकी है।