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पढ़ें- क्या है महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन, जिस वजह से आते हैं भूकंप, आगे भी रहें तैयार

Sun, 31 May 2020 05:12 PM IST
ajay kumar रामभज दलाल, अमर उजाला, सांपला (रोहतक)
रामभज दलाल, अमर उजाला, सांपला (रोहतक) Published by: ajay kumar Updated Sun, 31 May 2020 05:12 PM IST
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Mohindergarh-Dehradun fault line passes through five districts of Haryana
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली एनसीआर सहित आधा रोहतक जिला खतरनाक जोन-4 में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में भूकंप आते रहते हैं। इसलिए रोहतक जिलावासियों को भी भविष्य में भूकंप के झटके सहने को तैयार रहना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार गांव चुलियाणा में भूकंप जिस केंद्र पर आया उस फॉल्ट लाइन को महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट कहा जाता है।

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भूवैज्ञानिकों के मुताबिक महेंद्रगढ़-दूहरादून फॉल्ट जमीन के अंदर है। इसकी सतह से गहराई करीब एक किलोमीटर है। राष्ट्रीय भूकंप केंद्र के मुताबिक शुक्रवार को आए भूकंप का केंद्र रोहतक शहर से 15 किलोमीटर दूर चुलियाणा एरिया रहा। ये एरिया उसी फॉल्ट एरिया में आता है।
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गौरतलब है कि शुक्रवार की रात 9:08 बजे 4.5 की तीव्रता का भूकंप आया था। इसके 58 मिनट बाद ही 2.9 की तीव्रता से दूसरी पर भूकंप के झटके महसूस किया गया। शनिवार को जिला प्रशासन व आपदा विभाग की टीम जांच में जुटी रही। लेकिन कहीं कोई जान माल का नुकसान नहीं पाया गया। 

इन जिलों से गुजरती है फॉल्ट लाइन 
महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन हरियाणा के महेंद्रगढ़ से शुरू होकर झज्जर, रोहतक, सोनीपत, पानीपत होती हुई देहरादून में हिमालय के नीचे चली जाती है। हिमालय से जुड़े होने की वजह से फॉल्ट में हलचल बनी रहती है। इस फॉल्ट लाइन पर छोटे-छोटे भूकंप आते रहते हैं। 

जोन-4 में शामिल

आपदा प्रबंधन अधिकारी सौरभ का कहना है कि आधा रोहतक जिला जोन-4 में आता है। जबकि कुछ जोन तीन में तो महम जोन दो में है। जोन-4 में भूकंप से नुकसान की अधिक संभावना होती है। आपदा से अधिक नुकसान गलत निर्माण कार्यों से होता है। हमें बड़े भूकंपों से बचने के लिए खुद को तैयार रखना होगा। भवन निर्माण में भूकंप रोधी तकनीक का उपयोग होना चाहिए। अधिक नुकसान की संभावना ऊंची इमारतों में होता है। 

भूकंप का केंद्र पाए जाने से डरे ग्रामीण
शुक्रवार को आए भूकंप ने चुलियाणा के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। राजबीर सिंह व नवीन कुमार, संजय कुमार, सुनील का कहना है कि इससे पहले 2017 में भी ऐसा ही भूकंप का झटका महसूस किया गया था। ये दूसरा झटका है। इलाके में गिझी गांव में सूरजभान व भैसरू कलां में नीरज कौशिक के मकान की दीवार में दरार आने की खबर आई है। कस्बे में एक मकान की खिड़की का शीश चटक गया। आपदा विभाग अधिकारी सौरभ का कहना है कि चुलियाणा व आसपास के ग्रामीणों को घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि गांव में दो या तीन मंजिला मकान है। गुरूग्राम जैसे शहरों में बनी ऊंची बिल्डिंगों को खतरा होता है। 

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