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नगर निगमः पहले मेयर पद की जंग पहुंची हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Sun, 08 Mar 2015 02:15 PM IST
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शहर में नगर निगम के पहले मेयर की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसको लेकर सभी दल अपना जोर लग रहा है। वहीं, सरकार द्वारा मेयर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का मामला अब कोर्ट पहुंच गया है। इसको लेकर दो आजाद पार्षदों ने याचिकाएं दायर की हैं। इस पर अदालत द्वारा आगे की कार्रवाई सोमवार को की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक यह याचिकाएं वार्ड नंबर चौदह के पार्षद मनजीत सिंह सेठी और वार्ड नंबर 50 से आजाद ग्रुप के पार्षद हरपाल सिंह चन्ना की तरफ से अलग-अलग डाली गई। याचिकाओं पर फैसला सोमवार को होने की उम्मीद है।
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याचिका में उन्होंने दलील दी है कि मेयर पद महिला के लिए रिजर्व कर सरकार ने नियमों की अनदेखी की है। इसके अलावा चुनाव लड़कर पार्षद चुने गए लोगों के मेयर बनने के अधिकार पर हमला किया गया है। क्योंकि सरकार द्वारा यह कार्रवाई नगर निगम के चुनाव संपन्न होने के बाद की गई है।
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उन्होंने याचिका में कहा कि इसमें सरकार ने अपने ही 2012 के रोस्टर के नियमों की उल्लंघना की है। इसके तहत 1 से नौ तक की नगर निगमों को जनरल व 10वीं नगर निगम में मेयर की कुर्सी एससी के लिए रिजर्व रखने का प्रावधान है।
इसी तरह 11 से 17 तक जनरल रखने का प्रावधान है, लेकिन अभी तक 17 नगर निगम ही नहीं है। वहीं, पहली बार चुनाव करके नगर निगम को रिजर्व नहीं किया जा सकता है। मोहाली में पहली बार चुनाव हुआ है।
सभी दल मेयर बनाने का कर रहे है दावा
एक तरफ जहां अकाली दल मेयर बनाने का दावा कर रहा है। वहीं, आजाद ग्रुप और कांग्रेस भी मेयर बनाने की बात कर रहे है। हालांकि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन के पास 23 सीटें हैं। जबकि आजाद ग्रुप के पास 11 सीटें हैं।
वहीं, कांग्रेस के खाते में 14 सीटें हैं। जबकि मेयर बनाने के लिए किसी भी दल को 26 सीटों की जरूरत है। ऐसे में आजाद ग्रुप और आजाद पार्षदों को रोल अहम हैं। वे जिस दल के साथ जाएंगे वह आसानी से मेयर बना लेगा।
नगर काउंसिलों और पंचायतों को गठन 17 तक
जिले में स्थित नगर काउंसिलों और नगर पंचायतों को गठन 17 मार्च तक हो जाएगा। इस संबंधी सरकार गजट प्रकाशित हो चुका है। सरकार की तरफ से डीसी को आदेश जारी किए जा चुके हैं। नगर काउंसिल चुनाव में हलका विधायक भी अपने मत का प्रयोग करेंगे।