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Chandigarh News: मोदी के पंजाब दौरे से भाजपा में बढ़ा उत्साह, गुटबाजी से जूझती पार्टी निर्णायक मोड़ पर

Mon, 02 Feb 2026 06:23 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 06:23 PM IST
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Modi's visit to Punjab has boosted morale in the BJP, as the party, grappling with infighting, reaches a crucial juncture.
-डेरा सचखंड बल्लां दौरे से दलित समाज को संदेश-तमाम गुट एक मंच पर, 2027 की तैयारी का संकेत
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सुरिंदर पाल
जालंधर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया पंजाब दौरे में जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां में मत्था टेकना राज्य की राजनीति में महज एक प्रतीकात्मक घटना नहीं रही। इस दौरे ने गुटबाज़ी से जूझ रही पंजाब भाजपा को नया राजनीतिक संबल दिया है। लंबे समय से अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व संकट से जूझ रही पार्टी में इस दौरे के बाद उत्साह और सक्रियता साफ नजर आई है। 2024 लोकसभा चुनाव में 18–19 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने के बाद भाजपा अब इसे और बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
मोदी की पंजाब यात्रा को दलित और रविदासिया समाज तक सीधे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। डेरा सचखंड बल्लां का दौरा, एयरपोर्ट का नामकरण और सम्मान के प्रतीकात्मक कदमों ने भाजपा को शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक बढ़त दिलाने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर जहां 9–10 प्रतिशत था वहीं 2022 विधानसभा चुनाव में यह घटकर 6–7 प्रतिशत रह गया। इसके विपरीत 2024 में पार्टी का वोट प्रतिशत लगभग दोगुना होकर 18–19 प्रतिशत तक पहुंच गया। हालांकि एक भी लोकसभा सीट न जीत पाना यह साफ करता है कि वोट ट्रांसफर और सांगठनिक एकजुटता अब भी बड़ी चुनौती है।
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पंजाब भाजपा के भीतर फिलहाल तीन प्रमुख गुट सक्रिय माने जाते हैं। पहला, प्रदेश अध्यक्ष रहे सुनील जाखड़ का गुट है जो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से निराश मतदाताओं को भाजपा की ओर लाने और शिरोमणि अकाली दल से समझौते की वकालत करता है। दूसरा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का गुट है जो आक्रामक राजनीति और बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़ने की पैरवी करता है। बिट्टू की मौजूदगी से लुधियाना और आसपास के शहरी इलाकों में भाजपा को मजबूती मिली लेकिन इससे संगठन के पुराने नेताओं में असंतोष भी बढ़ा। तीसरा गुट पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा के इर्द-गिर्द माना जाता है जिसकी पकड़ संगठन, टिकट वितरण और केंद्रीय नेतृत्व से सीधे तालमेल के कारण मजबूत है। हालांकि जमीनी स्तर पर इसे लेकर भी असंतोष की आवाजें समय-समय पर उठती रही हैं। खास बात यह है कि बिट्टू गुट अकाली दल से किसी भी तरह के समझौते का खुलकर विरोध कर रहा है।
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2027 के चुनाव पर नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी की यह फेरी भाजपा के लिए अवसरों का नया द्वार खोलती है। वोट प्रतिशत बढ़ रहा है और माहौल भी बन रहा है लेकिन यदि गुटबाज़ी पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो यह बढ़त सीटों में तब्दील नहीं हो पाएगी। 2027 का विधानसभा चुनाव तय करेगा कि भाजपा मोदी फैक्टर के सहारे पंजाब में नया इतिहास रचती है या फिर यह अवसर भी हाथ से निकल जाता है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती है।
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