मिर्चपुर कांडः पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट देखेगी पुर्नवास मामला
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हरियाणा के मिर्चपुर कांड के पीड़ितों के पुनर्वास संबंधी मसले को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पास भेज दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट के समक्ष अपनी बात रखने को कहा है। कोर्ट का मानना है कि हाईकोर्ट इस मसले को बेहतर तरीके से देखने की स्थिति में है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने पाया कि हरियाणा सरकार पीड़ितों के पुनर्वास मामले पर गौर कर रही है। लिहाजा पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील को राज्य सरकार के पास जाने को कहा। इस पर वकील ने कहा कि सरकार पुनर्वास के मसले पर गौर नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को पांच साल हो गए हैं और पीड़ित दलित परिवार अपने घरों से दूर टेंट में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके सामने न केवल रोजी-रोटी की समस्या है बल्कि उनके बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई है। उन्होंने इस मामले को हाईकोर्ट में भेजने की गुजारिश की। हालांकि पीठ ने पाया कि जस्टिस इकबाल मिर्चपुर से संबंधित अधिकतर मसलों का निपटारा कर चुके हैं।
पीठ ने कहा कि जहां तक पुनर्वास का मसला है, उस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट गौर करेगा। इससे पहले हरियाणा सरकार की ओर पेश वकील ने पीठ को बताया कि मुआवजा सहित कई मसले का निपटारा सरकार द्वारा कर दिया गया है। सरकार ने जस्टिस इकबाल कमेटी द्वारा दिए सुझावों को मान लिया है। सुप्रीम कोर्ट मिर्चपुर हिंसा में पीड़ित दलित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा आदि मसलों से संबंधित दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
यह था मिर्चपर कांड
मालूम हो कि वर्ष 2010 में रोहतक जिले के मिर्चपुर गांव में जाट समुदाय के लोगों ने दलित परिवार के 70 वर्षीय बुजुर्ग और उसकी विकलांग बेटी की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से गांव के तमाम दलित परिवार घर छोड़ने को मजबूर हो गए थे।
दलित परिवार फिलहाल इतना डरे हुए हैं कि वे अपने गांव मिर्चपुर वापस नहीं जाना चाहते। हालांकि पिछली सुनवाई को हरियाणा सरकार ने बताया था कि करीब 130 पीड़ित परिवार वापस गांव चले गए है और करीब 60 परिवार तंवर फार्म हाउस में ही रह रहे हैं।