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हार्ट प्रॉब्लम, गुर्दे फेल थे, उम्मीद खो चुके थे मां-बाप...पर हुआ ऐसा चमत्कार, बची नवजात की जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Thu, 18 Oct 2018 04:34 PM IST
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हार्ट प्रॉब्लम, किडनी फेल और सिर्फ 1.6 किलो वजन था नवजात का। मां-बाप उसके बचने की उम्मीद खो चुके थे, लेकिन एक चमत्कार हुआ और उसकी जान बच गई। मामला पंजाब के लुधियाना में सामने आया। 32 हफ्तों के प्री-मेच्योर बेबी को एसपीएस अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने कड़ी मेहनत करके बचा लिया।
32 हफ्ते 5 दिन के इस बच्चे को बचा पाने में विफल रहे अमृतसर के अस्पताल ने गंभीर हालत में उसे लुधियाना रेफर कर दिया था। बच्चे के यहां पहुंचते ही नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. तानिया महल व डॉ. प्रदीप शर्मा, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नवदीप सिंह व पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अंकित मंगला की टीम ने उसे तुरंत दाखिल किया और फिर इलाज की प्रक्रिया शुरू की।
बड़े साइज में 2डी इकोकार्डियोग्राफी करने पर उसकी हार्ट प्रॉब्लम की सही कंडीशन पता चली। इसके साथ ही उसे हेमोडायनामिक समस्या होने के कारण सर्जरी करने की जरूरत पड़ी, तो परजिनों से इसकी परमिशन ली गई।
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32 हफ्ते 5 दिन के इस बच्चे को बचा पाने में विफल रहे अमृतसर के अस्पताल ने गंभीर हालत में उसे लुधियाना रेफर कर दिया था। बच्चे के यहां पहुंचते ही नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. तानिया महल व डॉ. प्रदीप शर्मा, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नवदीप सिंह व पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अंकित मंगला की टीम ने उसे तुरंत दाखिल किया और फिर इलाज की प्रक्रिया शुरू की।
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बड़े साइज में 2डी इकोकार्डियोग्राफी करने पर उसकी हार्ट प्रॉब्लम की सही कंडीशन पता चली। इसके साथ ही उसे हेमोडायनामिक समस्या होने के कारण सर्जरी करने की जरूरत पड़ी, तो परजिनों से इसकी परमिशन ली गई।
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घर भेज दिया गया है बच्चे को
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डॉक्टरों ने बताया कि इंजरी के कारण उसकी किडनियों ने भी काम करना बंद कर दिया था। उसकी टीएलसी 800 सीएमएम होने के साथ-साथ सेप्टिसीमिया व थ्रोम्बोसाइटोपेनिया भी था। लेकिन डॉक्टरों द्वारा सूझबूझ से दी गई एंटीबायोटिक्स और मेडिकल मैनेजमेंट, सपोर्टिव केयर और नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन ने बच्चे के लिए चमत्कार का काम किया।
दाखिल होने के चार दिन के अंदर बच्चे के डक्ट बंद हो गए और सांस लेने के लिए लगाया गया सर्पोटिव सिस्टम भी बंद कर दिया गया। इलाज के तुरंत बाद उसका वजन बढ़ना शुरू हो गया और चम्मच से फीड शुरू करके बच्चे को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। इस चमत्कारी तरीके से इलाज करके बच्चे की जान बचाने पर अस्पताल के सीओओ डॉ. अजय अंगरीश ने पूरी टीम को बधाई दी।
दाखिल होने के चार दिन के अंदर बच्चे के डक्ट बंद हो गए और सांस लेने के लिए लगाया गया सर्पोटिव सिस्टम भी बंद कर दिया गया। इलाज के तुरंत बाद उसका वजन बढ़ना शुरू हो गया और चम्मच से फीड शुरू करके बच्चे को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। इस चमत्कारी तरीके से इलाज करके बच्चे की जान बचाने पर अस्पताल के सीओओ डॉ. अजय अंगरीश ने पूरी टीम को बधाई दी।