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Chandigarh News: पुलिसकर्मियों की हत्या की नाबालिग आरोपी को हाईकोर्ट से राहत, जमानत का आदेश
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-पेट्रोलिंग ड्यूटी पर मौजूद दो पुलिसकर्मियों की चाकू मार कर हत्या करने का मामला
-ट्रायल कोर्ट ने की थी जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने फैसले को किया रद्द
-देर रात तक बाहर घूमती थी इसलिए जमानत से नैतिक या शारीरिक खतरे की दलील खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पेट्रोलिंग ड्यूटी पर मौजूद दो पुलिसकर्मियों की चाकू मारकर हत्या के मामले में नाबालिग आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राहत देते हुए जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला जघन्य अपराध का है लेकिन व्यस्क के तौर पर ट्रायल झेलने पर भी याची जेजे एक्ट के तहत जमानत की हकदार है। दरअसल, सोनीपत में 2020 में दो पुलिसकर्मियों की हत्या का मामला सामने आया था। आरोप के अनुसार पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को याचिकाकर्ता और उसके दोस्त सड़क के किनारे मिले थे। पुलिसकर्मी याचिकाकर्ता को जानते थे ऐसे में याची व उसके साथियों ने मिलकर उन पर हमला कर दिया। इस दौरान अमित ने दोनों को चाकू मार दिया। याची ने बताया कि इस मामले में उसने जमानत के लिए निचली अदालत में याचिका दाखिल की थी लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। अपराध के समय याची की आयु 16 वर्ष थी और अब वह बालिग हो चुकी है। निचली अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि याची देर रात तक घर से बाहर थी और उस पर परिजनों का नियंत्रण नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि याची पर व्यस्क के तौर पर ट्रायल चल रहा है लेकिन वह अपराध के समय नाबालिग थी। उसकी जमानत पर जेजे एक्ट के तहत ही विचार होना चाहिए। याची के देर रात बाहर होने व अभिभावकों का नियंत्रण न होने से उसे नैतिक या शारीरिक खतरे की बात साबित नहीं होती। याचिकाकर्ता के चरित्र या आपराधिक पृष्ठभूमि के संबंध में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं की गई थी और ऐसे में सोनीपत कोर्ट की टिप्पणी अनुमानों पर आधारित थी। ऐसे में इस आधार पर उसे जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने याची को जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया है।
बॉक्स
याची ने दी थी यह दलील
याची ने कहा कि पुलिसकर्मी नशे में थे और याची व उसकी साथी से छेड़छाड़ कर रहे थे। उन्हें बचाने के लिए अमित ने पुलिसकर्मियों पर हमला करते हुए घायल किया था। अगले ही दिन अमित की फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी। दलीलों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि हत्या का अपराध एक जघन्य अपराध है। कोर्ट ने कहा कि भले ही किसी किशोर पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाया जाए, फिर भी उसकी जमानत पर अधिनियम की धारा 12 के तहत दिए गए मापदंडों के तहत विचार किया जाना चाहिए।
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-ट्रायल कोर्ट ने की थी जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने फैसले को किया रद्द
-देर रात तक बाहर घूमती थी इसलिए जमानत से नैतिक या शारीरिक खतरे की दलील खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पेट्रोलिंग ड्यूटी पर मौजूद दो पुलिसकर्मियों की चाकू मारकर हत्या के मामले में नाबालिग आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राहत देते हुए जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला जघन्य अपराध का है लेकिन व्यस्क के तौर पर ट्रायल झेलने पर भी याची जेजे एक्ट के तहत जमानत की हकदार है। दरअसल, सोनीपत में 2020 में दो पुलिसकर्मियों की हत्या का मामला सामने आया था। आरोप के अनुसार पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को याचिकाकर्ता और उसके दोस्त सड़क के किनारे मिले थे। पुलिसकर्मी याचिकाकर्ता को जानते थे ऐसे में याची व उसके साथियों ने मिलकर उन पर हमला कर दिया। इस दौरान अमित ने दोनों को चाकू मार दिया। याची ने बताया कि इस मामले में उसने जमानत के लिए निचली अदालत में याचिका दाखिल की थी लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। अपराध के समय याची की आयु 16 वर्ष थी और अब वह बालिग हो चुकी है। निचली अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि याची देर रात तक घर से बाहर थी और उस पर परिजनों का नियंत्रण नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि याची पर व्यस्क के तौर पर ट्रायल चल रहा है लेकिन वह अपराध के समय नाबालिग थी। उसकी जमानत पर जेजे एक्ट के तहत ही विचार होना चाहिए। याची के देर रात बाहर होने व अभिभावकों का नियंत्रण न होने से उसे नैतिक या शारीरिक खतरे की बात साबित नहीं होती। याचिकाकर्ता के चरित्र या आपराधिक पृष्ठभूमि के संबंध में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं की गई थी और ऐसे में सोनीपत कोर्ट की टिप्पणी अनुमानों पर आधारित थी। ऐसे में इस आधार पर उसे जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने याची को जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया है।
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याची ने दी थी यह दलील
याची ने कहा कि पुलिसकर्मी नशे में थे और याची व उसकी साथी से छेड़छाड़ कर रहे थे। उन्हें बचाने के लिए अमित ने पुलिसकर्मियों पर हमला करते हुए घायल किया था। अगले ही दिन अमित की फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी। दलीलों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि हत्या का अपराध एक जघन्य अपराध है। कोर्ट ने कहा कि भले ही किसी किशोर पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाया जाए, फिर भी उसकी जमानत पर अधिनियम की धारा 12 के तहत दिए गए मापदंडों के तहत विचार किया जाना चाहिए।
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