आखिर खत्म हुआ विवाद: पंजाब के मुख्य सचिव ने मांगी माफी, कैबिनेट ने सर्वसम्मति से स्वीकार की
आबकारी नीति को लेकर पंजाब के मुख्य सचिव और कुछ कैबिनेट मंत्रियों के बीच हुई बहस का मामला आखिरकार बुधवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में समाप्त हो गया। बुधवार दोपहर कैबिनेट की बैठक में मुख्य सचिव करण अवतार सिंह भी पहुंचे तो उनकी मौजूदगी को लेकर कई तरह के कयास शुरु हो गए। आखिरकार वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने मीटिंग के बाद पत्रकारों से बताया कि बैठक शुरू होने के साथ ही मुख्य सचिव हाजिर हो गए थे और उन्होंने पूरी कैबिनेट से माफी मांगी।
मुख्य सचिव ने दोबारा किसी को शिकायत का मौका नहीं देने का भरोसा दिलाया। कैबिनेट ने उनकी माफी स्वीकार कर ली। विवाद के बाद मनप्रीत बादल ने पिछली बैठक में यह एलान कर दिया था कि अगर मुख्य सचिव बैठक में आए तो वे उसमें हिस्सा नहीं लेंगे। पूरे विवाद ने इतना अधिक तूल पकड़ा कि कई मंत्री और विधायकों ने मुख्य सचिव को हटाने की मांग शुरू कर दी थी।
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पिछली बैठक में सभी मंत्रियों ने सर्वसम्मति से यह विवाद सुलझाने का जिम्मा मुख्यमंत्री के सुपुर्द कर दिया था। मुख्यमंत्री ने इसके बाद दो बार अपने आवास पर लंच का आयोजन कर नाराज मंत्रियों को बुलाकर उनकी बात सुनी। इसके अलावा मनप्रीत बादल व मुख्य सचिव को आमने-सामने बैठाकर भी दोनों पक्षों को सुना। माना जा रहा था कि बुधवार की कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री इस मसले को हल कर देंगे। हुआ भी यहीं।
तीन बार मांगी माफी, इसलिए माफ किया: मनप्रीत
मनप्रीत बादल ने कहा कि मुख्य सचिव इससे पहले भी उनसे दो बार माफी मांग चुके हैं। बुधवार को उन्होंने पूरी कैबिनेट के सामने तीसरी बार माफी मांगी। अगर कोई तीन बार माफी मांगने के बाद भी माफ न करें तो यह सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज पूरी कैबिनेट ने सर्वसम्मति से मुख्य सचिव को माफ कर दिया है।
नहीं चली मंत्रियों की, कैप्टन अफसरशाही के साथ
इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि मंत्री या सूबे के कांग्रेस विधायक कितना ही जोर लगा लें, सरकार में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का फैसला ही अंतिम होगा। अपने मंत्रियों की मुख्य सचिव को हटाने की मांग को दरकिनार करके कैप्टन ने यह भी जता दिया कि वे अपने पसंदीदा अफसरों का साथ नहीं छोड़ने वाले। जाहिर है, जब अफसरों को मुख्यमंत्री का वरदहस्त प्राप्त होगा तो वे किसी मंत्री या विधायक की क्यों सुनेंगे?
दरअसल, एक्साइज पॉलिसी को लेकर हुए कैबिनेट सबकमेटी की बैठक में मुख्य सचिव करण अवतार सिंह और कैबिनेट मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और चरनजीत सिंह चन्नी में हुए विवाद को सुलझाने का जिम्मा पिछली कैबिनेट बैठक के दौरान सभी मंत्रियों ने सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री को सौंप दिया था। इस दौरान मनप्रीत बादल अपने पिता के निधन के कारण दुखद पारिवारिक परिस्थितियों में उलझ गए, लेकिन चंडीगढ़ में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और मुख्यमंत्री के सलाहकार विधायक राजा वड़िंग ने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के जरिए मुख्य सचिव के खिलाफ अभियान जारी रखा।
मुख्यमंत्री ने आमने-सामने बिठाकर दोनों पक्षों को सुना
इस लंच कार्यक्रम के दो दिन बाद ही मुख्यमंत्री ने मनप्रीत बादल, चरणजीत चन्नी और मुख्य सचिव को अपने आवास पर लंच पर बुलाया और आमने-सामने बिठाकर दोनों पक्षों को सुना। संभवत: मुख्यमंत्री ने दोनों पक्षों में उसी समय सुलह करा दी गई लेकिन इस संबंध में पूरा फैसला मुख्य सचिव को माफी को रूप में सामने आया। यह भी उल्लेखनीय है कि कैप्टन ने सत्ता संभालने के बाद से अपने सभी पंसदीदा अफसरों को उनकी रिटायरमेंट के बाद भी सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां देते हुए खुद के जोड़े रखा है।
इस मामले में भी अपने मंत्रियों की मांग के विपरीत मुख्य सचिव को न हटाकर उन्होंने यह भी संकेत दे दिए कि सरकार और पार्टी में वही एकमात्र नेता हैं, जिन्हें फिलहाल चुनौती देने वाला कोई अन्य नेता मौजूद नहीं है।