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Chandigarh News: मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल का समापन, शहरवासियों ने देखे सेना में उपयोग होने वाले हथियार

Mon, 02 Dec 2024 02:19 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2024 02:19 AM IST
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Military Literature Festival concludes, city residents see weapons used in army
चंडीगढ़। सुखना लेक क्लब में आयोजित दो दिवसीय मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को समापन हो गया। फेस्ट के दौरान पैनल चर्चा की गई, जिसमें एडमिरल सुनील लाम्बा, मेजर जनरल नीरज बाली और मेजर जनरल हरविजय सिंह ने वेस्ट एशियन संघर्ष पर चर्चा की। इस दौरान विशेष रूप से ग्रे जोन वॉरफेयर, हानिकारक टेक्नोलॉजी और नॉन स्टेट एक्टर्स के प्रभाव पर विमर्श किया।
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विशेषज्ञों ने इन मुद्दों के वैश्विक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को गंभीरता से उठाया। इस क्षेत्र में आगामी चुनौतियों पर चर्चा की। साथ ही फेस्ट में लगाई गई प्रदर्शनी में वहां आए लोगों ने खूब रोचक जानकारी जुटाई। यही प्रदर्शनी लोगों के ध्यान का केंद्र बनी, क्योंकि यहां युद्ध में काम आने वाले भारतीय सेना के हथियार जैसे बंदूक से लेकर तोप और टैंक सब मौजूद थे, जो वहां आए बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए भी काफी रोचक था।
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प्रदर्शनी में कई तरह बंदूक, जिनमें कुछ भारत में बनाई गई थीं और अधिकतम इस्राइल और यूएसए के हथियार, जो भारतीय सेना के लिए हाल में मंगाए गए हैं। इसमें कई भारत में बनी बंदूकों को रिप्लेस करने के लिए मंगाई गई हैं। इनमें से भारत में बनी 5.56 एमएम की इनसास लाइट मशीन गन के बदल में 7.62 एमएम एनईजीईवी लाइट मशीन गन लाई गई है, जो इस्राइल में बनी है। वहीं, 40 एमएम इनसास यूबीजीएल, जो भारत में बनी बंदूक है, उसे 7.62 एमएम एसआईजी सॉएर 716 असॉल्ट आरआईएफ जो यूएसए में बनी है उसके साथ बदल दिया है। वहीं, बातचीत में जवान से पता चला कि भारतीय बंदूकों की देखरेख करना बहुत मुश्किल है। भारत में बनी बंदूकों का भार भी ज्यादा होता है। इसके बदले यूएसए और इस्राइल की बनी बंदूकें वजन में हल्की और मैनुअल और ऑटोमैटिक हैं।
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ट्रेक पर काम आने वाले उपकरणों की दी जानकारी :
आज के समय में ट्रेकिंग करना आम बात और जो काफी प्रचलित भी है। लोग ट्रेक से जुड़ी कुछ बारीक बातें नजरअंदाज कर देते हैं। उसी के लिए प्रदर्शनी में एक स्टॉल पर भारतीय सेना का जवान लोगों को ट्रेक पर काम आने वाले सभी उपकरणों की जानकारी और उनको इस्तेमाल करने की जानकारी दे रहे थे। साथ ही प्रदर्शनी में बच्चों का ध्यान केंद्रित करने के लिए कई तरह की खेल मौजूद थे।


16 किमी दूर देखने और 40 किमी दूर सुनने वाले उपकरण

प्रदर्शनी में भारतीय सेना के पास मौजूद कई तरह के एडवांस टेक्नोलॉजी के उपकरण भी प्रदर्शित किए गए। इनमें मुख्य केंद्र दो उपकरण बने, जिनमें पहला उपकरण जिसका नाम लोरस था, जोकि एक तरह से दूरबीन का काम करता है। इससे दिन में 13 और रात को 16 किमी दूर तक देखा जा सकता है। इससे सेना के जवान दूर बैठे दुश्मन पर नजर रख सकते हैं। दूसरा उपकरण, जिसका नाम ईएल एम 2140 एमआर बीएफएसआर था। यह उपकरण 40 किमी दूर से भी किसी भी तरह की हलचल को सुन सकता है। यह उपकरण दूर बैठे दुश्मन के कदमों या हथियारों की आवाज सुन सकता है और भारतीय जवानों को चौकन्ना करने के काम आता है।
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