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चंडीगढ़ में मेट्रोः लोगों का सपना, पर बड़े रोड़े हैं इस राह में

Tue, 27 Sep 2016 10:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 27 Sep 2016 10:09 PM IST
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metro project chandigarh
दिल्ली मेट्रो - फोटो : प्िपि्
चंडीगढ़ में मेट्रो का सपना हर कोई देख रहा है, लेकिन ये हकीकत में पूर होता नहीं दिख रहा है। इस राह में कई सारे रोड़े हैं। प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान की शर्तें प्रोजेक्ट के आड़े आ रहीं हैं। शहर की सांसद किरण खेर तो मेट्रो के पक्ष में कभी थी ही नहीं, वहीं अब प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने भी छोटा शहर बताकर मेट्रो की जगह रैपिड बस सिस्टम पर फोकस की जरूरत पर जोर दिया।
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सांसद किरण खेर का कहना है कि महंगा प्रोजेक्ट है। इसका खर्च ही पूरा नहीं होगा। सवाल तो यह है कि नौ साल में इस प्रोजेक्ट के लिए हुई माथापच्ची और खर्च के बाद ऐसा क्यों? जबकि लोग चाहते हैं कि मेट्रो चले और शहर के ट्रैफिक के हालात सुधरें। क्या प्रशासन भी दिल्ली जैसे लंबे जाम और ट्रैफिक व्यवस्था के बिगड़ने का इंतजार कर रहा है।
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दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) ने मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट (एमओयूडी) की आब्जर्वेशन रिपोर्ट के आधार पर प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए 200 एकड़ जमीन मुहैया कराने की शर्त रखी है। ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में प्रति वर्ष 1025 करोड़ रुपये देने होंगे। पंजाब और हरियाणा भी इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार हैं इसलिए उन्हें भी इसकी जानकारी दी जा चुकी है। लेकिन ये दोनों ही शर्तें पूरी कर पाना असंभव लग रहा है।
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चंडीगढ़ प्रशासन के पास लगभग 600 एकड़ जमीन ही बची हैं। वह भी विभिन्न प्रोजेक्ट्स और संस्थानों को आवंटित है। रही बात बजट की तो चंडीगढ़ को प्रति वर्ष प्लान हेड के तहत ही 700 करोड़ मिलते हैं।

9 साल, 109 मीटिंग और 10 करोड़ का खर्च

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दिल्ली मेट्रो - फोटो : रपििप
नौ साल में 109 मीटिंग के बाद मेट्रो की डीपीआर तैयार करने और अन्य कामों में 10 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है। अब हालत यह है कि मेट्रो प्रोजेक्ट शर्तें पूरी नहीं होने के कारण डंप होने की कगार पर है।

पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल का कहना है कि मेट्रो प्रोजेक्ट से पीछे हटने का फैसला सही नहीं है। काफी प्रयास और समय लगने के बाद यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। ऐसा करके ट्राइसिटी के विकास को 10 से 15 साल पीछे किया जा रहा है।

पता नहीं क्यों सांसद और उसके बाद प्रशासन इस प्रोजेक्ट को लागू करने में पलट रहा है। इससे जीरकपुर, खरड़, मुल्लांपुर की तरफ न्यू चंडीगढ़ के अलावा बद्दी तक के एरिया को मेट्रो प्रोजेक्ट का फायदा मिलेगा। अभी शहर में जाम का यह हाल है तो आने वाले वर्षों में हालात काफी बिगड़ जाएंगे।

सांसद किरण खेर का कहना है कि दिल्ली की तरह जगह-जगह से शहर को खोद दिया जाए और फिर सालों तक ऐसे ही पड़ा रहे, इससे शहर की खूबसूरती, बदसूरती में बदल जाएगी। आज भी दिल्ली के कई एरिया में मेट्रो वर्क इन प्रोग्रेस के बोर्ड लगे हैं।

मेट्रो पर करोड़ों रुपये खर्च करने की बजाए कम पैसे खर्च कर बसें और खरीद ली जाएं तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत होगा और पैसे भी बचेंगे। अधिकतर जो भीड़ होती है वह मोहाली-पंचकूला की होती है। चंडीगढ़ वासियों को उनसे कोई मतलब नहीं है।

2016 में शुरू करके 2021 तक खत्म करना है काम

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लखनऊ मेट्रो - फोटो : amar ujala
संशोधित डीपीआर के अनुसार मेट्रो पर 2016 से काम शुरू होना है, जिसे 2021 तक खत्म करना होगा। मेट्रो के चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में कुल 30 स्टेशन होंगे। इनमें 19 स्टेशन एलिवेटेड होंगे और 11 अंडरग्राउंड।

मेट्रो की गति 80 से 85 किमी प्रति घंटे होगी। तीनों शहरों में मेट्रो रूट को दो गलियारों में बांटा गया है। एक गलियारा 25.07 किलोमीटर और दूसरा 12.49 किलोमीटर का होगा। मेट्रो ट्राइसिटी में 37 किलोमीटर के रूट पर दौड़ेगी।

पहले ही यह प्रोजेक्ट चार साल की देरी के कारण 3 हजार करोड़ महंगा हो गया है। सबसे पहले प्रशासन ने 2012 में मेट्रो के लिए
डीपीआर तैयार की थी जो 10,900 करोड़ की थी। अब प्रोजेक्ट 13,909 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जितनी देरी होगी बजट उतना ही बढ़ता जाएगा।

प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान का मसला हल होने के बाद ही मंत्रालय मेट्रो की अधिसूचना जारी करेगा। मेट्रो का पूरा काम ग्रेटर चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (जीसीटीसी) देखेगी। अधिसूचना के बाद जीसीटीसी कंपनी के एमडी से लेकर पूरा स्टाफ नियुक्त होगा। कंपनी का अलग से खाता होगा। जिसमें बजट आएगा।
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