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SYL Dispute: केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक बेनतीजा, मान बोले- SYL नहीं YSL की जरूरत, मनोहर ने कहा- बहुत हो चुका

Wed, 04 Jan 2023 09:38 AM IST
भूपेंद्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 04 Jan 2023 09:38 AM IST
सार

भगवंत मान ने कहा कि राज्य का नहरी ढांचा सदियों पुराना है। केंद्र सरकार ने नहरी ढांचे का कायाकल्प करने के लिए आज तक एक पैसा राज्य को नहीं दिया। पंजाब में 14 लाख ट्यूबवेल हैं, जो राज्य की सिंचाई जरूरतों की पूर्ति के लिए निरंतर पानी निकाल रहे हैं और राज्य ने देश को अनाज से आत्मनिर्भर बनाया है।

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Meeting of Haryana CM Manohar Lal and Punjab CM Bhagwant Mann on the issue of SYL
भगवंत मान और मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच चल रही लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा को पानी देने से इन्कार करते हुए केंद्र से गंगा और यमुना का पानी मांग लिया है। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि इस परियोजना का नाम एसवाईएल की जगह वाईएसएल कर देना चाहिए। 

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यमुना-सतलुज लिंक का सुझाव देते हुए मान ने कहा कि वाईएसएल के निर्माण से सतलुज में भी पानी आ जाएगा और हरियाणा को भी पानी मिल जाएगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक बेनतीजा रही। इससे पहले बीते नवंबर महीने में चंडीगढ़ में हुई बैठक में भी कोई हल नहीं निकला था।
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मान की बात पर मुखर होते हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि अब बहुत हो चुका। पंजाब सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने के लिए तैयार नहीं है। लिहाजा, इस मामले में समय सीमा तय होनी जरूरी हो गई है। बैठक से बाहर निकलकर मनोहर लाल ने कहा कि पंजाब अपना अड़ियल रुख खत्म नहीं कर रहा है। पानी न होने और पानी की मांग की जा रही है जबकि पानी बंटवारे के लिए अलग से ट्रिब्यूनल बनाया गया है। साल 2004 में पंजाब सरकार की ओर से लाए गए एक्ट को निरस्त कर दिया गया है। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री का कहना है कि साल 2004 का एक्ट अभी भी मौजूद है, जो पूरी तरह असांविधानिक है।

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उधर, भगवंत मान का कहना है कि पंजाब के पास हरियाणा को देने के लिए एक बूंद पानी नहीं है। परियोजना का नाम और प्रस्ताव बदलने की वकालत करते मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि पंजाब के पास पानी नहीं है, इसे देखते हुए पंजाब को सतलुज नदी के जरिए गंगा और यमुना का पानी मुहैया कराया जाना चाहिए। वाईएसएल एक ठोस विकल्प है, जिस पर पंजाब में पानी की कमी की विकट स्थिति को ध्यान में रखकर विचार किया जाना चाहिए। छोटा राज्य होने के बावजूद हरियाणा को पंजाब से ज्यादा पानी मिल रहा है। भगवंत मान ने कहा कि जब हमारे प्रदेश के खेत सूख रहे हैं तो हरियाणा को पानी कैसे दिया जा सकता है।

केंद्र ने नहरी ढांचे के लिए एक पैसा नहीं दिया
भगवंत मान ने कहा कि राज्य का नहरी ढांचा सदियों पुराना है। केंद्र सरकार ने नहरी ढांचे का कायाकल्प करने के लिए आज तक एक पैसा राज्य को नहीं दिया। पंजाब में 14 लाख ट्यूबवेल हैं, जो राज्य की सिंचाई जरूरतों की पूर्ति के लिए निरंतर पानी निकाल रहे हैं और राज्य ने देश को अनाज से आत्मनिर्भर बनाया है।

टाइमलाइन तय हो: मनोहर लाल
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने साफ किया कि हरियाणा के लिए एसवाईएल का पानी बहुत आवश्यक है। अब इस मामले में एक टाइम लाइन तय होना जरूरी है ताकि प्रदेश के किसानों को पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

...अब क्या भगवान को आना पड़ेगा: जयहिंद
एसवाईएल के मुद्दे पर नवीन जयहिंद ने ट्वीट कर भाजपा की केंद्र और हरियाणा सरकार पर कटाक्ष किया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि कौन देगा हक सीएम साहब। सुप्रीम कोर्ट तो हरियाणा के पक्ष में फैसला दे चुका है। केंद्र में सरकार भाजपा की है। पीएम मोदी है तो बताओ अब भगवान को आना पड़ेगा क्या हक दिलाने के लिए? उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री से यह जवाब तलब करते हुए कहा कि एसवाईएल पर राजनीति बंद करो। एसवाईएल बनाओ, पानी लाओ।  

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