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Chandigarh News: मेडिकल शिक्षा समाज का ऋण, सेवा भाव से लौटाएं- जेपी नड्डा

Fri, 01 May 2026 02:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 02:33 AM IST
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Medical education is a debt to society, repay it with a spirit of service - JP Nadda
चंडीगढ़। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक इलाज को बेहतर बना सकती हैं, लेकिन मरीज के प्रति सहानुभूति और इंसानी स्पर्श की जगह कोई नहीं ले सकता। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने वीरवार को पीजीआई के 39वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि यह संदेश दिया।
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समारोह में 682 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं जबकि 95 मेधावी छात्रों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक देकर सम्मानित किया गया। इनमें 18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य पदक शामिल हैं। दीक्षांत समारोह में प्रशासक गुलाब चंद कटारिया विशिष्ट अतिथि और नीति आयोग के सदस्य विनोद के. पॉल उपस्थित रहे। समारोह के दौरान 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस डिग्रियां प्रदान की गईं। पारंपरिक परिधान में सजे विद्यार्थियों ने इस गौरवपूर्ण क्षण को यादगार बना दिया।
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तकनीकी प्रगति के बावजूद मानवीय जुड़ाव महत्वपूर्ण

स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीमेडिसिन इलाज को अधिक सुलभ और प्रभावी बना रहे हैं। इसके बावजूद डॉक्टर और मरीज के बीच मानवीय जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा डॉक्टरों को संदेश दिया कि मेडिकल शिक्षा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और देश द्वारा दिया गया अवसर है, जिसे विनम्रता, संवेदनशीलता और सेवा भावना के साथ लौटाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सफल डॉक्टर के पीछे माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का बड़ा योगदान होता है, इसलिए हमेशा जमीन से जुड़े रहना और आभार व्यक्त करना जरूरी है।
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उन्होंने देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 हो गई है। एमबीबीएस सीटें 51 हजार से बढ़कर 1.26 लाख और पीजी सीटें 31 हजार से बढ़कर 85 हजार तक पहुंच गई हैं।

इस मौके पर पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि संस्थान किडनी ट्रांसप्लांट में देश में अग्रणी है और पैंक्रियास-किडनी संयुक्त प्रत्यारोपण में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि पेशेंट फर्स्ट, पेशेंट लास्ट केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत होना चाहिए।
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