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लुधियाना पहुंचीं मेधा पाटकर: बुड्ढा दरिया का हाल देख बोलीं- गुजरात के साबरमती जैसे हैं हालात
Sun, 21 Nov 2021 08:26 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 21 Nov 2021 08:26 PM IST
सार
मेधा पाटकर रविवार को पंजाब के लुधियाना पहुंचीं। यहां उन्होंने कहा कि सतलुज नदी को दूषित कर पंजाब सरकार एक करोड़ लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि बुड्ढा दरिया और मत्तेवाड़ा जंगल का मामला संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में उठाएंगी।
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बुड्ढा दरिया का जायजा लेतीं नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर रविवार को लुधियाना के बुड्ढा दरिया में बहते काले रंग के पानी को देख दंग रह गईं और उन्होंने इसकी तुलना गुजरात के साबरमती से कर डाली। नगर निगम के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से बहते काले पानी को देख उन्होंने साफ कहा कि जिस तरह का प्रदूषण बुड्डा दरिया के माध्यम से सतलुज में फेंका जा रहा है, उससे पंजाब सरकार लगभग एक करोड़ लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।
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सतलुज बचाओ पंजाब बचाओ के मंच पर एकत्र हो चुकी समाजसेवी संस्थाओं के प्रयास की सराहना कर उन्होंने कहा कि वह उन्हें हर संभव सहायता देने को तैयार हैं। इस मुद्दे को आने वाले दिनों में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में भी रखेंगी, क्योंकि वह मोर्चा की सदस्य हैं। इस मुद्दे पर किसान नेताओं को आगे बढ़कर सहयोग करने के लिए कहेंगी।
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सतलुज नदी को दूषित करने के खिलाफ मालवा की 32 समाजसेवी संस्थाओं ने एकजुट होकर 'सतलुज बचाओ पंजाब बचाओ' मंच का गठन किया है। इसका मकसद सतलुज नदी में फैल रहे प्रदूषण और मत्तेवाड़ा जंगलों को बचाना है। इसी मकसद से रविवार को नर्मदा बचाओ की नेता मेधा पाटकर को बुलाया गया था ताकि इस मुद्दे को पूरे गंभीरता से उठाया जाए।
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सबसे पहले उन्हें मत्तेवाड़ा जंगल ले जाया गया। वहां उन्होंने मत्तेवाड़ा जंगल के पास सरकार की तरफ से बनाए जाने वाले एक हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल पार्क का जायजा लिया। समाजसेवी संस्थाओं ने प्रतिनिधियों ने बताया कि इस समय पंजाब में महज 3.50 फीसदी जंगल बचे हैं लेकिन सरकार यहां इंडस्ट्रियल पार्क को लगाकर जंगल को खत्म करने जा रही है। सतलुज नदी भी पास में हैं, औद्योगिक कचरा भी नदी में बहेगा। इसके बाद उन्हें लुधियाना की ताजपुर जेल के सामने बुड्ढा दरिया का असली चेहरा दिखाया गया।
मेधा पाटकर ने कहा कि वह सभी एनजीओ की तरफ से चलाए जा रहे अभियान का समर्थन करती हैं। नर्मदा नदी को बचाने के लिए तीन प्रदेशों की एनजीओ एकजुट होकर काम कर रही हैं। इसके लिए उनके पास कानूनी राय के लिए कई माहिर वकील हैं। वह उन्हें सतलुज नदी को बचाने के लिए सभी पहलू साझा करने के लिए कहेंगी।