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Mech Tech 2025: खड़े पहाड़ों पर भी चढ़ सकेगा सेना का एंबुलेंस ट्रक... जानें इसकी खासियतों के बारे में

Tue, 04 Mar 2025 12:53 PM IST
निवेदिता वर्मा हरीश कोचर, संवाद, चंडीगढ़
हरीश कोचर, संवाद, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 04 Mar 2025 12:53 PM IST
सार

पश्चिमी कमान में आयोजित की गई मैक टैक सेमीनार में सेना से जुड़े उपकरण व हथियार तैयार करने वाले 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने नई तकनीक वाले हथियारों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

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Mech Tech 2025 Army ambulance truck to climb steep mountains
मैक टेक 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऊंचे खड़े पहाड़ों पर दुश्मनों की गोलीबारी से घायल जवानों को नीचे कैंप अस्पताल तक लेकर आने के लिए आठ-आठ जवानों को नीचे नहीं आना पड़ेगा। इसके लिए सेना में नई तकनीक वाले एसएमवी-1200 एंबुलेंस व अन्य मददगार ट्रक शामिल होने वाले है। इन ट्रकों पर 30 डिग्री से अधिक गर्मी या फिर माइनस 15 डिग्री में भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह चालक सहित आठ जवानों और घायलों को लेकर आने-जाने में कारगर है। 

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इसके अलावा भी सेना की ताकत को बढ़ाने और जवानों की रक्षा करने के लिए नई गैजेट्स, हेल्मेट, ट्रांसमीटर, थर्मल स्कैनिंग साइट गन के अलावा मल्टी सेंसर, मीडियम रेंज सर्विलांस सिस्टम और क्रयू सर्वड एरिया वैपन भी शामिल किए जा रहे हैं कि नई तकनीक के हथियार है।

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नया राइफल हेल्मेट एके-47 की गोली से करेगा बचाव

बॉर्डर पर सेना जवानों के सिर पर सामान्य हेल्मेट रखे होते है जिसमें कोई भी गोली निकलकर सीधे उनके सिर में लगती है और जवानों की जान चली जाती है। लेकिन जवानों के सिर पर गोली लगने से रक्षा करने के लिए एसीएच-1038टी और एचसीएच-1038टी बोल्ट फ्री राइफल हेल्मेट लेवल-3 तैयार किए गए है जो कि सेना जवानों के सिर की सुरक्षा तकनीक में एक बड़ी छलांग है। इसे नई पीढ़ी की तकनीक का उपयोग करके तैयार किया गया है, जो कि राइफल, गोला बारूद जैसे एके-47 की गोलियों से भी पूरे सिर को सुरक्षा प्रदान करता है। 

इसके अलावा थर्मल मोस्किटो कैमरा भी तैयार किया गया है जो कि सेना के लिए काफी जरूरी है। यह टारगेट लोकेटर कैमरा है जिसमें दिन की साइट में थर्मल इमेज को सर्च किया जा सकता है। जबकि
लांग रेंज मल्टीफंक्शनल इंफ्रारेड कैमरा 20 किलोमीटर दूर तक बॉर्डर पर छोटी से छोटी गतिविधि को बहुत नजदीक से दिखा सकता है। क्योंकि बॉर्डर पर अकसर पहाड़ी क्षेत्रों में सेना जवान ऊंचाई तक देखने में पहले दूरबीन का प्रयोग करते थे लेकिन इस नए कैमरे से 20 किलोमीटर तक बिलकुल साफ दिखाई देता है। दुश्मन की छोटी से छोटी हरकत को भी इससे आसानी से देखा जा सकता है। इसके
अलावा मल्टी सेंसर, मीडियम रेंज एवं सर्विलांस सिस्टम और एमडब्ल्यू-5000 साइटिंग सिस्टम भी दूर तक देखने में क्षमता रखता है।

वाई-फाई से चलेगी सेना की नई थर्मल गन

इसके साथ ही कानपुर की एमकेयू द्वारा सेना के लिए थर्मल गन भी तैयार की गई है जो कि जल्द सेना का हिस्सा होगा। यह थर्मल गन करीब दो किलोमीटर दूर तक मारक क्षमता रखती है। इस गन की खासियत यह है कि इसमें एक स्कैनिंग कैमरा लगा है जो कि 2 किलोमीटर दूरी के अंदर किसी भी जगह छिपे हुए दुश्मन को स्कैन करके उसे मार सकती है। इस गन को बिना किसी जवान को हाथ में दिए महज स्टैंड पर लगाकर वाई-फाई से प्रयोग कर सकते है। इसके अलावा एके-47 को भी अपग्रेड कर दिया गया है जिसमें अब चार घंटे की बैटरी लाइफ दी गई है और यह नेट्रो वीजन पर आधारित होगी।

दुश्मनों के ड्रोन को दो किलोमीटर की रेंज में जाम करेगी एंट्री ड्रोन गन

चेन्नई की एरो स्पेस में तैयार की गई चैलेंजर एंटी ड्रोन गन भी भारतीय सेना सहित नौसेना और एयरफोर्स में भी शामिल हाे गई है। इस गन के जरिए सेना दुश्मन देश के किसी भी बड़े से बड़े व छोटे से छोटे ड्रोन को आसमान में ही ढूंढगर उसे दो से तीन किलोमीटर के एरिया में जाम किया जा सकता है। सेना द्वारा बाॅर्डर एरिया में इस चैलेंजर गन का प्रयोग शुरू भी कर दिया गया है। क्योंकि लड़ाई वाले बॉर्डर एरिया में अकसर दुश्मन देशों द्वारा ड्रोन का प्रयोग किया जाता है ताकि वह दूसरे देश की लोकेशन इत्यादि पता कर सकें।

वायुसेना जवानों के लिए तैयार हुआ एविऐशन नाइट विजन गॉगल्स हेल्मेट

इसके साथ ही इंडियन एयरफोर्स जवानों के लिए भी आसमान में हेलीकॉप्टर में से जमीन पर देखने के लिए नाइट विज़न गॉगल्स तैयार की गई है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना में भी नाइट विजन गॉगल्स (एनवीजी) को जोड़ा गया है जिसका प्रयोग भी शुरू हाे गया है। वायुसेना नेट्रो एनबी-3101 एनवीजी का उपयोग कम रोशनी की स्थिति में भी विस्तृत छवि बनाने के लिए प्रयोग करती है। इससे आसमान से नीचे जमीन पर गहराई का भी पता चलता है क्योंकि कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और लैंडिंग के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। यह पूरी तरह वाटरप्रूफ हैं और एमआईएल-एसटीडी-810जी मानकों को पूरा करता है। एमकेयू ने लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) के लिए नाइट विजन गॉगल्स तैयार किए हैं।

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