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जानिए, पंजाब की राजनीति में सिद्धू दंपति के इस्तीफे के क्या हैं मायने?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 20 Jul 2016 09:22 AM IST
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नवजोत सिद्धू पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के साथ
- फोटो : फाइल फोटो
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नवजोत सिद्धू दंपति ने अपने पदों से इस्तीफा दिया, ये बहुत चौंकाने वाली बात नहीं है। ये तो होना ही था, 2 साल पहले से इसकी नींव पड़ चुकी थी। लोकसभा चुनाव में सिद्धू की बजाय अरुण जेटली को टिकट देने का खामियाजा भाजपा को आज भुगतना पड़ा है। पंजाब की राजनीति में नवजोत सिद्धू दंपति के इस्तीफे के बहुत मायने लगाए जा सकते हैं।
खासकर, पंजाब भाजपा को तगड़ा झटका लगा हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नवजोत सिंह सिद्धू अपनी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना सकती है।
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खासकर, पंजाब भाजपा को तगड़ा झटका लगा हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नवजोत सिंह सिद्धू अपनी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना सकती है।
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लंबे समय से भाजपा से नाराज थे सिद्धू दंपति
नवजोत सिद्धू पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के साथ
- फोटो : फाइल फोटो
सिद्धू दम्पति लंबे समय से भाजपा आलाकमान से नाराज थे। इसी वजह से पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने यह कदम उठाया। हाल ही में भाजपा ने नवजोत सिंह सिद्धू को राज्यसभा में भेजा था। सिद्धू की अकाली दल की कमान संभालने वाले बादल परिवार से बिलकुल नहीं पटती।
उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ कई बार आवाज उठाई। अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने की गरज से पंजाब भाजपा के नेताओं ने सिद्धू को किनारे लगा दिया। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर नवजोत सिंह सिद्धू आम आदमी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, तो वह उनका स्वागत करेंगे।
उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ कई बार आवाज उठाई। अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने की गरज से पंजाब भाजपा के नेताओं ने सिद्धू को किनारे लगा दिया। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर नवजोत सिंह सिद्धू आम आदमी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, तो वह उनका स्वागत करेंगे।
पंजाब में मजबूत ताकत बनकर उभरी है 'आप'
अरविंद केजरीवाल
पंजाब में 'आप' एक मजबूत ताकत बनकर उभरी है। पार्टी के चार सांसद हैं और सभी पंजाब से हैं। पार्टी को तलाश है एक ऐसे बड़े नाम की जो चुनाव में उसकी नैया का खेवनहार बन सके। 'आप' के लिए सिद्धू फिट बैठते हैं। उन्हें ईमानदार और साफ बोलने वाला माना जाता है।
दरअसल, पंजाब में भाजपा हमेशा से अकाली दल के जूनियर पार्टनर की भूमिका में रही है। साल 2014 के आम चुनाव में पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद पार्टी ने ऐसे संकेत दिए थे कि वह अब अकाली दल का दामन छोड़कर अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतर सकती है।
हालांकि, आज हालात यह है कि पंजाब में अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच त्रिकोणीय संघर्ष की चर्चा हो रही है। भाजपा का जिक्र तक नहीं हो रहा है।
दरअसल, पंजाब में भाजपा हमेशा से अकाली दल के जूनियर पार्टनर की भूमिका में रही है। साल 2014 के आम चुनाव में पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद पार्टी ने ऐसे संकेत दिए थे कि वह अब अकाली दल का दामन छोड़कर अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतर सकती है।
हालांकि, आज हालात यह है कि पंजाब में अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच त्रिकोणीय संघर्ष की चर्चा हो रही है। भाजपा का जिक्र तक नहीं हो रहा है।
बेबाक बोल से चर्चित हैं सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर
नवजोत कौर सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
नवजोत कौर सिद्धू अपने बेबाक बोलों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहती है। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अकाली-भाजपा गठबंधन के साथ नहीं है अगर वे दोनों मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो सिद्धू दम्पति प्रचार नहीं करेगा।
अकाली-भाजपा गंठबंधन पर नवजोत ने कहा कि मैंने हमेशा कोशिश की कि गठबंधन हमेशा सत्कार वाला चाहिए, परन्तु अफसोस कि अकाली दल में भाजपा को इज्जत नहीं मिली। उलटा भाजपा वर्करों पर पर्चे किए गए और उनको दबाया गया।
मेरी सोच है कि अगर मेरे मुताबिक भाजपा अलग हो जाती तो शायद यह गठबंधन और भी मजबूत हो जाना था, क्योंकि सरकार में रहकर तो हमारी सुनी ही नहीं गई। खैर वह मुद्दा तो अब खत्म हो गया क्योंकि सीनियर लीडरशिप ने तय कर लिया है कि 2017 में अकाली-भाजपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे, ऐसे में अकेली नवजोत कौर की सलाह कोई मायने नहीं रखती। परन्तु मैं फिर साफ करती हूं कि मैं अकाली दल का हिस्सा नहीं बनूंगी।
अकाली-भाजपा गंठबंधन पर नवजोत ने कहा कि मैंने हमेशा कोशिश की कि गठबंधन हमेशा सत्कार वाला चाहिए, परन्तु अफसोस कि अकाली दल में भाजपा को इज्जत नहीं मिली। उलटा भाजपा वर्करों पर पर्चे किए गए और उनको दबाया गया।
मेरी सोच है कि अगर मेरे मुताबिक भाजपा अलग हो जाती तो शायद यह गठबंधन और भी मजबूत हो जाना था, क्योंकि सरकार में रहकर तो हमारी सुनी ही नहीं गई। खैर वह मुद्दा तो अब खत्म हो गया क्योंकि सीनियर लीडरशिप ने तय कर लिया है कि 2017 में अकाली-भाजपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे, ऐसे में अकेली नवजोत कौर की सलाह कोई मायने नहीं रखती। परन्तु मैं फिर साफ करती हूं कि मैं अकाली दल का हिस्सा नहीं बनूंगी।