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RTI में खुलासाः कार्यकाल खत्म होने से पहले ही रिकार्ड खत्म कर देता आयोग
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sat, 20 Aug 2016 10:49 AM IST
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नगर निगम चंडीगढ़
- फोटो : Amar ujala
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साल 2011 में हुए निगम चुनाव से संबंधित रिकार्ड राज्य चुनाव आयोग (यूटी) ने नष्ट कर दिया है। यह खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है। साल 2011 में हुए निगम चुनाव के बारे में कुछ सवाल सेक्टर-44 बी निवासी अजीत सिंह ने 9 अगस्त को सूचना के अधिकार के तहत राज्य चुनाव आयोग से पूछे थे।
इसके जबाव में बताया गया कि सारा रिकार्ड नष्ट कर दिया गया है। ऐसे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं अजीत सिंह का कहना है कि पिछले निगम चुनाव का कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद अभी रिकार्ड नष्ट करना लोकतंत्र के खिलाफ है।
साल 2011 में 17 दिसंबर को निगम चुनाव हुए थे इस साल भी दिसंबर में ही निगम चुनाव होने हैं, जिसके लिए चुनाव आयोग तैयारी कर रहा है। अगले माह आरक्षित और महिला वार्ड रिजर्व करने के लिए ड्रा निकाले जाएंगे, जिसके बाद कांग्रेस, भाजपा और बसपा अपना चुनाव प्रचार तेज कर देंगे।
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ये जानकारियां मांगी थीं
-साल 2011 में जो उम्मीदवार चुनाव जीत गए थे, उनके नामांकन की प्रति उपलब्ध करवाई जाए।
-नामांकन के समय जिन-जिन उम्मीदवारों ने नामाकंन के समय जो शपथ पत्र दाखिल किए थे, उन सभी की प्रतियां उपलब्ध करवाई जाए।
-सभी उम्मीदवारों ने जो जो अपनी संपति की घोषणा की थी उनकी जानकारी दी जाए।
चुनाव के बाद नहीं पड़ती दस्तोवेजों की जरूरत
राज्य चुनाव आयुक्त राकेश मेहता का कहना है कि चुनाव के बाद उम्मीदवारों के नामांकन, बैलेट पेपर और उनकी ओर से दिए गए दस्तावेज की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिए उन्हें रखने का कोई फायदा नहीं होता, लेकिन चुनाव से संबंधित सारी डिटेल आयोग के रिपोर्ट में जरूर होती है।
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इसके जबाव में बताया गया कि सारा रिकार्ड नष्ट कर दिया गया है। ऐसे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं अजीत सिंह का कहना है कि पिछले निगम चुनाव का कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद अभी रिकार्ड नष्ट करना लोकतंत्र के खिलाफ है।
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साल 2011 में 17 दिसंबर को निगम चुनाव हुए थे इस साल भी दिसंबर में ही निगम चुनाव होने हैं, जिसके लिए चुनाव आयोग तैयारी कर रहा है। अगले माह आरक्षित और महिला वार्ड रिजर्व करने के लिए ड्रा निकाले जाएंगे, जिसके बाद कांग्रेस, भाजपा और बसपा अपना चुनाव प्रचार तेज कर देंगे।
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ये जानकारियां मांगी थीं
-साल 2011 में जो उम्मीदवार चुनाव जीत गए थे, उनके नामांकन की प्रति उपलब्ध करवाई जाए।
-नामांकन के समय जिन-जिन उम्मीदवारों ने नामाकंन के समय जो शपथ पत्र दाखिल किए थे, उन सभी की प्रतियां उपलब्ध करवाई जाए।
-सभी उम्मीदवारों ने जो जो अपनी संपति की घोषणा की थी उनकी जानकारी दी जाए।
चुनाव के बाद नहीं पड़ती दस्तोवेजों की जरूरत
राज्य चुनाव आयुक्त राकेश मेहता का कहना है कि चुनाव के बाद उम्मीदवारों के नामांकन, बैलेट पेपर और उनकी ओर से दिए गए दस्तावेज की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिए उन्हें रखने का कोई फायदा नहीं होता, लेकिन चुनाव से संबंधित सारी डिटेल आयोग के रिपोर्ट में जरूर होती है।