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चंडीगढ़ में बजा सियासी बिगुल, 18 जनवरी को मेयर चुनाव, कांग्रेस बोली- भाजपा कर रही मनमर्जी
Sat, 22 Dec 2018 09:34 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 22 Dec 2018 09:34 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
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चंडीगढ़ नगर निगम मेयर के लिए 18 जनवरी को चुनाव होगा। नामांकन भरने की अंतिम तारीख 14 जनवरी होगी। इस संबंध में चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर मनदीप सिंह बराड़ ने आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही वर्तमान मेयर देवेश मोदगिल का कार्यकाल भी चुनाव होने तक बढ़ गया है। इस संबंध में कांग्रेस ने विरोध जताया है।
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पिछले साल मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 9 जनवरी को हुआ था। आमतौर पर मेयर चुनाव 8 से 12 जनवरी के आसपास होते हैं। डिप्टी कमिश्नर के आदेश नगर निगम कमिश्नर और स्पेशल कमिश्नर को भेजे गए हैं। मनोनीत पार्षद अजय दत्ता को मेयर चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस बार मेयर चुनाव आरक्षित वर्ग से है। मेयर चुनाव की दौड़ में भाजपा के चार उम्मीदवार पार्षद राजेश कालिया, सतीश कुमार कैंथ, भरत कुमार और फार्मिला शामिल हैं। वहीं कांग्रेस से एक मात्र उम्मीदवार पार्षद शीला फूल सिंह हैं।
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चुनाव आगे बढ़ने के साथ ही उम्मीदवारों में बेचैनी भी बढ़नी शुरू हो गई है। कुछ पार्षदों का कहना है कि मेयर के दावेदारों को अब लॉबिंग के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। प्रशासन के आदेशों में चुनाव देरी से किए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया है।
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भाजपा के हैं 20 पार्षद
वर्तमान नगर निगम में कुल 26 पार्षद के अलावा नौ मनोनीत हैं। 26 पार्षद जो निर्वाचित किए गए हैं मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान करेंगे। मनोनीत पार्षद इस चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। एक मत स्थानीय सांसद का भी होता है। अभी भाजपा के 20 पार्षद हैं। कांग्रेस के चार के अलावा एक निर्दलीय और एक पार्षद शिरोमणि अकाली दल के हैं।
कांग्रेस ने जताया विरोध
मेयर चुनाव देरी से कराए जाने पर कांग्रेस ने विरोध जताया है। नगर निगम में विपक्ष के नेता और कांग्रेसी पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि कांग्रेस जब नगर निगम की सत्ता में थी तो मेयर चुनाव हर वर्ष 1 जनवरी को होता था। बबला ने कहा कि जब से भाजपा सत्ता में आई है तभी से वह मनमर्जी से मेयर का चुनाव करवा रही है। यह अलोकतांत्रिक कदम है। नगर निगम को मजाक बनाकर छोड़ दिया है।
मेयर का चुनाव चंडीगढ़ नगर निगम एक्ट के अनुसार हो रहा है। नियमों का उल्लंघन नहीं है। एक्ट में यह है कि मेयर का कार्यकाल एक वर्ष तक का है। एक्ट में यह भी है कि नए मेयर के चुनाव होने तक वह अपने पद पर बना रहेगा इसलिए नियमों का उल्लंघन नहीं है। - सत्यपाल जैन, पूर्व सांसद और एडिशनल सॉलिसिटर।
18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में मनोनीत पार्षदों की सुनवाई
मेयर चुनाव की तिथि बढ़ने के साथ ही मनोनीत पार्षदों की आस भी बंध गई है। 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। कोर्ट की सुनवाई के बाद तस्वीर साफ हो सकती है। हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट में अपील विचाराधीन होने के कारण पिछले मेयर के चुनाव में मनोनीत पार्षद वोट नहीं डाल सके थे। इस बार भी यही स्थिति बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन ने इसी को सोचकर तिथि बढ़ाई है। क्योंकि यदि सुप्रीम कोर्ट मनोनीत पार्षदों को मेयर चुनाव में मत देने का अधिकार दे देता है तो मनोनीत पार्षद भी मतदान में भाग ले सकते हैं।
मेयर का चुनाव चंडीगढ़ नगर निगम एक्ट के अनुसार हो रहा है। नियमों का उल्लंघन नहीं है। एक्ट में यह है कि मेयर का कार्यकाल एक वर्ष तक का है। एक्ट में यह भी है कि नए मेयर के चुनाव होने तक वह अपने पद पर बना रहेगा इसलिए नियमों का उल्लंघन नहीं है। - सत्यपाल जैन, पूर्व सांसद और एडिशनल सॉलिसिटर।
18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में मनोनीत पार्षदों की सुनवाई
मेयर चुनाव की तिथि बढ़ने के साथ ही मनोनीत पार्षदों की आस भी बंध गई है। 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। कोर्ट की सुनवाई के बाद तस्वीर साफ हो सकती है। हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट में अपील विचाराधीन होने के कारण पिछले मेयर के चुनाव में मनोनीत पार्षद वोट नहीं डाल सके थे। इस बार भी यही स्थिति बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन ने इसी को सोचकर तिथि बढ़ाई है। क्योंकि यदि सुप्रीम कोर्ट मनोनीत पार्षदों को मेयर चुनाव में मत देने का अधिकार दे देता है तो मनोनीत पार्षद भी मतदान में भाग ले सकते हैं।