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Chandigarh News: मेयर-सभी पार्षदों ने मांगे 170 करोड़, प्रशासक बोले- लोन दिया तो लौटाओगे कैसे

Sat, 22 Feb 2025 02:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2025 02:07 AM IST
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Mayor and all councillors demanded 170 crores, Administrator said- If you give loan then how will you return it
चंडीगढ़। मेयर हरप्रीत कौर बबला और सभी पार्षदों ने शुक्रवार को पंजाब राजभवन में प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर नगर निगम की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए 170 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मांगी। इस पर प्रशासक ने सवाल उठाया कि यदि वह लोन दिलाते हैं तो निगम लौटाएगा कैसे। इसका एक विस्तृत प्लान बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने संपत्ति कर बढ़ाने, जमीन बेचकर एफडी कराने का भी सुझाव दिया।
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बैठक शाम 6 बजे शुरू होनी थी, लेकिन 6.35 बजे शुरू हुई और 7.05 बजे समाप्त हो गई। सबसे पहले मेयर हरप्रीत कौर बबला ने निगम की स्थिति और हाल में उठाए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राउंड अबाउट पर विज्ञापन अधिकार, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की दरों में संशोधन, वेरका-वीटा बूथों के किराए की नई दरें लागू करना, विज्ञापन अधिकारों की ई-नीलामी, मनीमाजरा की पॉकेट-6 की नीलामी आदि से 250-300 करोड़ के राजस्व की उम्मीद है। निगम ने अपने संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करने और खर्चों में कटौती के लिए भी कई कदम उठाए हैं। इसमें 200 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करना, अधिकारियों के लिए किराए पर ली गई गाड़ियों की संख्या कम करना, मनोरंजन और जनरल हाउस बैठकों के खर्चों में कटौती की है। निगम की गंभीर वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने स्थानांतरित कर्मचारियों की पेंशन पर खर्च किए गए 160 करोड़ की प्रतिपूर्ति और भविष्य की पेंशन देनदारियों के लिए 40 करोड़ प्रति वर्ष की राशि, 4वें दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू और वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अतिरिक्त 170 करोड़ की मांग रखी।
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प्रशासक ने अधिकारियों से पूछा-500 करोड़ की एफडी कहां गई
सभी पार्षदों की बात सुनने के बाद प्रशासक ने कहा कि 10 मार्च के आसपास प्रशासन की वित्तीय स्थिति को लेकर एक बैठक करेंगे। जो भी पैसा बचेगा, कोशिश करेंगे कि उसमें से मदद कर सकें। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि नगर निगम के पास 2016 तक जो 500 करोड़ रुपये की एफडी थी, वह कहां गई। पैसा कहां खर्च कर दिया गया। कहा कि अगर वह लोन दिलाते हैं तो नगर निगम कैसे पैसा वापस करेगा, इसके लिए भी एक विस्तृत प्लान तैयार किया जाना चाहिए। कहा कि नगर निगम को आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। उन्होंने संपत्ति कर बढ़ाने को कहा। बताया कि मोहाली में चंडीगढ़ से चार गुना ज्यादा संपत्ति कर है। जमीनों को बेचकर एफडी कराने और स्टाफ कम करने का भी सुझाव दिया।
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डीफसी लागू करें, सारी समस्या हो जाएगी दूर : ढींगरा
आम आदमी पार्टी की तरफ से योगेश ढींगरा ने सभी पार्षदों की बात रखी। उन्होंने कहा कि दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया जाए तो समस्या दूर हो जाएगी। निगम को सारे खर्च वाले विभाग दिए हुए हैं। उस अनुसार ग्रांट मिलनी चाहिए। उन्होंने कई इलाकों में कम्युनिटी सेंटर बनाने, सेक्टर-56 और मनीमाजरा में गंदा पानी, खेल के मैदान, पुलिस की मिलीभगत से नशे की बढ़ती समस्या, हाथ खड़े करके मेयर के चुनाव कराने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने मेट्रो का भी विरोध किया। कहा कि अभी मेट्रो की लागत 24 हजार करोड़ है। यह चंडीगढ़ जैसे छोटे शहर के लिए ठीक नहीं है। शहर की खूबसूरती खराब हो जाएगी। उन्होंने गांवों के लिए अलग से फंड की मांग की, जिससे विकास हो सके।


संपत्तियों को फ्री होल्ड करें, ताकि अच्छी कीमत मिलेः गाबी
कांग्रेस की तरफ से गुरप्रीत सिंह गाबी ने सभी पार्षदों की बात रखी। उन्होंने कहा कि निगम की लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड किया जाना चाहिए ताकि नीलामी में निगम को अच्छा पैसा मिल सके। सड़कों को प्रशासन को देने की बजाय, उनके लिए प्रशासन द्वारा फंड दिया जाना चाहिए। स्ट्रीट लाइट के लिए निगम ने 100 करोड़ का भुगतान किया है लेकिन सारा टैक्स प्रशासन को मिलता है। डंपिंग ग्राउंड के प्रबंधन के लिए समर्पित निधि मिले। तीसरे दिल्ली वित्त आयोग का हिस्सा भी निगम को मिलना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे ठेकेदारों का मुद्दा भी उठाया। कहा कि ठेकेदार पर भी कर्ज है, वो बेहद परेशान है। उनके तत्काल बिल क्लियर करना चाहिए क्योंकि उनकी वजह से कई घर चल रहे हैं। गाबी ने आरएलए के राजस्व को निगम को देने की भी मांग रखी।
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