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तीन तलाक को लेकर देखिए ये क्या बोल गए मौलाना, बड़ा ही विवादित बयान है
बाबैन/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Updated Mon, 06 Mar 2017 09:14 AM IST
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तील तलाक
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तीन तलाक को लेकर एक मौलाना ने बड़ा ही विवादित बयान दिया है। उन्होंने ऐसी बात कह दी है, जो किसी को भी पसंद नहीं आएगी। यह बयान हरियाणा के सोनीपत में दिया गया।
नदवा कॉलेज लखनऊ के प्रो. मौलाना खालिद गाजीपुर नदवी ने कहा है कि तीन तलाक इस्लाम के अंदर रहमत है। एक महिला जो अपने निकाह से खुश नहीं है उनके आपसी संबंध बेहतर नहीं है तो वह अपने पति से तलाक लेकर अलग जीवन बसर कर सकती है।
उसे अपने पति के हाथों जलील नहीं होना पड़ता। ऐसे में मजहब कहता है कि दोनों पति-पत्नी तलाक लेकर एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। वह शनिवार को ईदगाह कॉलोनी के सामने एक निजी गार्डन में प्यामे इंसानियत कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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नदवा कॉलेज लखनऊ के प्रो. मौलाना खालिद गाजीपुर नदवी ने कहा है कि तीन तलाक इस्लाम के अंदर रहमत है। एक महिला जो अपने निकाह से खुश नहीं है उनके आपसी संबंध बेहतर नहीं है तो वह अपने पति से तलाक लेकर अलग जीवन बसर कर सकती है।
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उसे अपने पति के हाथों जलील नहीं होना पड़ता। ऐसे में मजहब कहता है कि दोनों पति-पत्नी तलाक लेकर एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। वह शनिवार को ईदगाह कॉलोनी के सामने एक निजी गार्डन में प्यामे इंसानियत कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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कोर्ट को दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए
मौलाना खलिद गाजीपुर नदवी
मौलाना ने कहा कि आजादी सभी के लिए अजीज है, आजादी सभी को प्यारी है। इस्लाम ने कहा है कि तीन तलाक जबर, जुर्म, ज्यादती नहीं, बल्कि इज्जत व मुकाम का मामला है। इस मामले में कोर्ट को दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए। यह कोर्ट से नहीं मजहब, हकीदे और कुरान-ए-पाक से जुड़ा है। कुरान-ए-पाक में भी यह तबदील नहीं हो सकता। इसे किसी इंसान ने नहीं बनाया है। इस मामले में मुस्लिम प्रसर्नल लॉ बोर्ड कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जब हिंदू धर्म में तलाक का कोई मसला नहीं था तो उस समय विधवा महिला को सती कर दिया जाता था। सती नहीं होने पर विधवा को ऐसी जिंदगी गुजारनी पड़ती थी, जिससे उसका जीवन दुश्वार हो जाता था। इसे देखते हुए तो तलाक को मुस्लिम समुदाय ने अपना लिया। उन्होंने कहा कि हम किसी से मोहब्बत करते है तो नफरत का मौका भी आता है और किसी के नजदीक होते है तो उससे दूर होने का मौका आता है।
उन्होंने कहा कि जब हिंदू धर्म में तलाक का कोई मसला नहीं था तो उस समय विधवा महिला को सती कर दिया जाता था। सती नहीं होने पर विधवा को ऐसी जिंदगी गुजारनी पड़ती थी, जिससे उसका जीवन दुश्वार हो जाता था। इसे देखते हुए तो तलाक को मुस्लिम समुदाय ने अपना लिया। उन्होंने कहा कि हम किसी से मोहब्बत करते है तो नफरत का मौका भी आता है और किसी के नजदीक होते है तो उससे दूर होने का मौका आता है।