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मार्केट कमेटियों को निशुल्क चलानी होंगी पार्किंग, शर्त न मानने पर निगम करेगी संचालन
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चंडीगढ़। शहर की वी4 सड़कों पर बनीं 60 मार्केटों की पार्किंग को कमेटियों को निशुल्क ही चलाना होगा। शर्त न मानने वाली कमेटियों से निगम समझौता नहीं करेगा और खुद ही पार्किंग को संचालित करेगा। नगर निगम ने मार्केट कमेटियों से समझौता करने के लिए पत्र तैयार कर लिया है। समझौता पत्र नवंबर माह की सदन की बैठक में लाया जा रहा है। वहां से सहमति मिलते ही यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
नगर निगम के पार्किंग प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त एसके जैन ने कुछ दिन पहले मार्केट कमेटी के अध्यक्षों और प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक में निशुल्क और नो प्रोफिट एंड नो लॉस शर्त पर दो तरह के समझौता करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर व्यापारियों की सहमति भी हो गई। वहीं, निगम ने प्रस्ताव बनाकर सदन की बैठक में लाने का मन भी बना लिया, लेकिन बाद में चर्चा हुई कि अलग-अलग मार्केट में निशुल्क और शुल्क को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनेगी। इससे विवाद की भी स्थिति बनेगी। इसलिए निगम ने केवल निशुल्क पार्किंग का प्रस्ताव ही सदन में लाने का प्रस्ताव रखा है। चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरनजीव सिंह ने बताया कि मंडल से 80 मार्केट जुड़ी हैं। इनमें से 20 मार्केट की पहले से ही पार्किंग पेड हो गईं हैं। 60 मार्केट के लिए सदन की बैठक में प्रस्ताव लाने की सहमति हमारी ओर से दी गई है। महासचिव संजीव चड्ढा ने कहा कि अब अनुबंध करने का फैसला कमेटी के ऊपर निर्भर होगा।
मार्केट प्रधानों ने कहा- सहमति नहीं बनी तो लेंगे शुल्क
बैठक में चर्चा हुई थी कि कुछ मार्केट में तो दुकानदार रुपये इकट्ठा करके निशुल्क चला लेंगे, लेकिन कुछ मार्केट में यह संभव नहीं है। ऐसे में लोगों को सुविधा देने के लिए शुल्क लेना जरूरी होगा। इस पर सहमति जताते हुए अतिरिक्त आयुक्त ने दो तरह के अनुबंध करने की बात कही थी। लेकिन शर्त रखी थी कि वाहन चोरी या खो जाने पर नगर निगम जिम्मेदार नहीं होगा। इसकी जिम्मेदारी कमेटी की होगी। प्रतिनिधियों ने समझौते का विरोध करते हुए कहा कि ग्राहकों को सुविधा देना हमारा उद्देश्य है, न कि मुनाफा कमाना। दूसरी बैठक में तय हुआ कि वाहन के चोरी होने पर निगम व कमेटी दोनों ही जिम्मेदार नहीं होगीं, लेकिन व्यक्ति अदालत जाएगा जो पार्टी कमेटी बनेगी। इस पर व्यापारियों ने सहमति जता दी।
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अब यह हैं निगम की शर्तें
- दो साल के लिए मार्केट कमेटी निगम से करेगी समझौता, तीन साल का बढ़ाया जा सकता है
- पार्किंग का अनुबंध कमेटी के प्रधान से होगा
- पार्किंग पूरी तरह से निशुल्क होगी
- किसी भी शिकायत पर निगम कार्रवाई के लिए स्वतंत्र अधिकार रखेगी
- अव्यवहार की घटना या अव्यवस्था के लिए किसी जिम्मेदार को नियुक्त करना होगा
- पार्किंग निगम की संपत्ति है। इस पर किसी प्रकार से कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा
- लोगों का शोषण नहीं होना चाहिए। वाहन प्रवेश और निकासी की व्यवस्था हो।
- सुबह 8 से रात 9 बजे तक पार्किंग का संचालन होगा
- निगम के अधिकारी कभी भी पार्किंग का निरीक्षण कर सकते हैं
- शिकायत मिलने पर निगम कभी भी कमेटी से समझौता खत्म कर सकता है
- पार्किंग में कोई विज्ञापन नहीं लगाया जा सकता है
- पार्किंग में पानी या बिजली कनेक्शन का अलग शुल्क देना होगा
- किसी विवाद की स्थिति में चंडीगढ़ अदालत में निपटारा होगा
इन मार्केट प्रधानों ने निशुल्क की जताई थी इच्छा
सेक्टर- 46, 27, 11, 44, 19 डी और 35 की कमेटी ने कहा कि दुकानदार रुपया इकट्ठा कर पार्किंग चलाएंगे। लोगों से रुपया नहीं लेंगे, लेकिन इसके लिए अनुबंध कम से कम दो साल करने को कहा था। निगम ने इस शर्त को मानते हुए तीन साल का समझौता एक्सटेंड करने का प्रस्ताव दिया है।
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नगर निगम के पार्किंग प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त एसके जैन ने कुछ दिन पहले मार्केट कमेटी के अध्यक्षों और प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक में निशुल्क और नो प्रोफिट एंड नो लॉस शर्त पर दो तरह के समझौता करने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर व्यापारियों की सहमति भी हो गई। वहीं, निगम ने प्रस्ताव बनाकर सदन की बैठक में लाने का मन भी बना लिया, लेकिन बाद में चर्चा हुई कि अलग-अलग मार्केट में निशुल्क और शुल्क को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनेगी। इससे विवाद की भी स्थिति बनेगी। इसलिए निगम ने केवल निशुल्क पार्किंग का प्रस्ताव ही सदन में लाने का प्रस्ताव रखा है। चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरनजीव सिंह ने बताया कि मंडल से 80 मार्केट जुड़ी हैं। इनमें से 20 मार्केट की पहले से ही पार्किंग पेड हो गईं हैं। 60 मार्केट के लिए सदन की बैठक में प्रस्ताव लाने की सहमति हमारी ओर से दी गई है। महासचिव संजीव चड्ढा ने कहा कि अब अनुबंध करने का फैसला कमेटी के ऊपर निर्भर होगा।
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मार्केट प्रधानों ने कहा- सहमति नहीं बनी तो लेंगे शुल्क
बैठक में चर्चा हुई थी कि कुछ मार्केट में तो दुकानदार रुपये इकट्ठा करके निशुल्क चला लेंगे, लेकिन कुछ मार्केट में यह संभव नहीं है। ऐसे में लोगों को सुविधा देने के लिए शुल्क लेना जरूरी होगा। इस पर सहमति जताते हुए अतिरिक्त आयुक्त ने दो तरह के अनुबंध करने की बात कही थी। लेकिन शर्त रखी थी कि वाहन चोरी या खो जाने पर नगर निगम जिम्मेदार नहीं होगा। इसकी जिम्मेदारी कमेटी की होगी। प्रतिनिधियों ने समझौते का विरोध करते हुए कहा कि ग्राहकों को सुविधा देना हमारा उद्देश्य है, न कि मुनाफा कमाना। दूसरी बैठक में तय हुआ कि वाहन के चोरी होने पर निगम व कमेटी दोनों ही जिम्मेदार नहीं होगीं, लेकिन व्यक्ति अदालत जाएगा जो पार्टी कमेटी बनेगी। इस पर व्यापारियों ने सहमति जता दी।
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अब यह हैं निगम की शर्तें
- दो साल के लिए मार्केट कमेटी निगम से करेगी समझौता, तीन साल का बढ़ाया जा सकता है
- पार्किंग का अनुबंध कमेटी के प्रधान से होगा
- पार्किंग पूरी तरह से निशुल्क होगी
- किसी भी शिकायत पर निगम कार्रवाई के लिए स्वतंत्र अधिकार रखेगी
- अव्यवहार की घटना या अव्यवस्था के लिए किसी जिम्मेदार को नियुक्त करना होगा
- पार्किंग निगम की संपत्ति है। इस पर किसी प्रकार से कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा
- लोगों का शोषण नहीं होना चाहिए। वाहन प्रवेश और निकासी की व्यवस्था हो।
- सुबह 8 से रात 9 बजे तक पार्किंग का संचालन होगा
- निगम के अधिकारी कभी भी पार्किंग का निरीक्षण कर सकते हैं
- शिकायत मिलने पर निगम कभी भी कमेटी से समझौता खत्म कर सकता है
- पार्किंग में कोई विज्ञापन नहीं लगाया जा सकता है
- पार्किंग में पानी या बिजली कनेक्शन का अलग शुल्क देना होगा
- किसी विवाद की स्थिति में चंडीगढ़ अदालत में निपटारा होगा
इन मार्केट प्रधानों ने निशुल्क की जताई थी इच्छा
सेक्टर- 46, 27, 11, 44, 19 डी और 35 की कमेटी ने कहा कि दुकानदार रुपया इकट्ठा कर पार्किंग चलाएंगे। लोगों से रुपया नहीं लेंगे, लेकिन इसके लिए अनुबंध कम से कम दो साल करने को कहा था। निगम ने इस शर्त को मानते हुए तीन साल का समझौता एक्सटेंड करने का प्रस्ताव दिया है।