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पंजाब: मनप्रीत अयाली शिअद विधायक दल के नेता बने, जिलाध्यक्षों ने सुखबीर बादल का इस्तीफा नामंजूर किया
Thu, 17 Mar 2022 09:50 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 17 Mar 2022 09:50 PM IST
सार
सुखबीर सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष बने रहेंगे। विधानसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि सभी जिलाध्यक्षों ने उनके इस्तीफे को खारिज कर दिया है।
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सुखबीर सिंह बादल
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब विधानसभा में मनप्रीत सिंह अयाली शिरोमणि अकाली दल के (शिअद) विधायक दल के नेता होंगे। गुरुवार को शिअद विधायक दल की ओर से दिए अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए शिअद के प्रधान सुखबीर बादल ने मनप्रीत अयाली को विधायक दल का नेता घोषित किया। इसके साथ ही उन्होंने डॉ. सुखविंदर कुमार को चीफ व्हिप बनाया है।
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अयाली दाखा हलके से शिअद विधायक हैं और तीसरी बार विधायक बने हैं। वहीं, डॉ. सुखविंदर दूसरी बार बंगा हलके से विधायक चुने गए हैं। गुरुवार को विधानसभा परिसर में बातचीत के दौरान अयाली ने कहा कि चुनाव में हुई हार से हमारे हौसले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि शिअद पंजाब की प्रतिनिधि पार्टी है और उसका मकसद लोगों की सेवा है। शिअद लोगों की सेवा जारी रखेगा। इस चुनाव के नतीजे आश्चर्यजनक हैं क्योंकि लोगों ने एक बदलाव को मुख्य रखते हुए आम आदमी पार्टी को वोट दिया है लेकिन वह दिन दूर नहीं जब शिअद दोबारा उभरकर आगे आएगा।
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जिलाध्यक्षों ने सुखबीर बादल का इस्तीफा नामंजूर किया
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर बादल की ओर से विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की गई, जिसे पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों ने खारिज कर दिया। शिअद अध्यक्ष ने बुधवार और गुरुवार को पार्टी की सीनियर लीडरशिप के अलावा जिला अध्यक्षों से बातचीत करते हुए कहा था, ‘मेरे लिए पार्टी और उसकी भलाई सर्वोपरि है। मैंने हमेशा पार्टी के हित में काम किया है। मैं पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने को तैयार हूं।’
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गुरुवार को सभी जिलाध्यक्षों ने पार्टी अध्यक्ष की चुनाव अभियान में की गई मेहनत में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए सर्वसम्मति से एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल ने न केवल आगे बढ़कर अगुवाई की ,बल्कि पार्टी लीडरशिप के साथ पार्टी काडर को भी अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित किया। नेताओं ने कहा कि हालांकि नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, बल्कि पार्टी अध्यक्ष को किसी भी तरह से दोष नहीं दिया जा सकता। लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया और परिणामस्वरूप विपक्ष को हार का सामना करना पड़ा।