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बस नाम का है मनीमाजरा का सिविल अस्पताल
ब्यूरो/अमर उजाला, मनीमाजरा
Updated Sun, 02 Mar 2014 02:38 PM IST
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हाल ही में 50 से 100 बेड का बड़ा अस्पताल बनने के बावजूद मनीमाजरा का सिविल अस्पताल बदहाली से गुजर रहा है। इसके उद्घाटन के समय नगर सांसद पवन बंसल, प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के निदेशक और डाक्टरों तक ने बड़े-बड़े दावे किए थे।
उस वक्त 24 घंटे की इमरजेंसी और हर प्रकार की सुविधा इस अस्पताल में मिलने की बात कही गई थी। वहीं आज हकीकत यह है कि इस अस्पताल में सर्दी में होने वाले बुखार और जुकाम तक की दवा नहीं मिलती है।
24 घंटे की इमरजेंसी की तो बात की गई थी, लेकिन हालात यह हैं कि देर शाम या फिर रात में इमरजेंसी में आने वाले मरीज को तत्काल ही सेक्टर-16 के अस्पताल भेज दिया जाता है।
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इस बात के आंकड़े पीसीआर पुलिस से भी मिल सकते हैं। जो कि कालका, चंडीगढ़ हाईवे पर होने वाले एक्सीडेंट के बाद जब अस्पताल पहुंचते हैं तो उनको भी सेक्टर-16 और 32 का रास्ता दिखा दिया जाता है।
अल्ट्रासाउंड मशीन भी खराब
अस्पताल में लगे उपकरण अब काम नहीं कर रहे हैं। अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले चार महीने से खराब पड़ी है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए अब निजी लैब जाना पड़ता है।
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अल्ट्रासाउंड मशीन की मरम्मत करवाने की जरूरत नहीं समझी। मरीज रमनदीप कौर का कहना है कि वह मां का उपचार करवाने के लिए अस्पताल में आए थे।
डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। पहले तो डॉक्टर आज कल का बहाना बनाते रहे और अब पता चला कि यहां अल्ट्रासाउंड मशीन ही खराब पड़ी है। इसके बाद निजी लैब से ज्यादा पैसे देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा।
वहीं आकाश ने बताया कि दो महीने तो अस्पताल वालों ने यह कह कर ही निकाल दिए कि अल्ट्रासाउंड आज होगा, कल होगा।
बाद में जब पता किया तो सामने आया कि अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन कई दिनों से खराब पड़ी है। वहीं स्वास्थ्य निदेशक निरलेप कौर का कहना कि ऐसा होने नहीं चाहिए। वह खुद जाकर जांच करेंगी।
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उस वक्त 24 घंटे की इमरजेंसी और हर प्रकार की सुविधा इस अस्पताल में मिलने की बात कही गई थी। वहीं आज हकीकत यह है कि इस अस्पताल में सर्दी में होने वाले बुखार और जुकाम तक की दवा नहीं मिलती है।
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24 घंटे की इमरजेंसी की तो बात की गई थी, लेकिन हालात यह हैं कि देर शाम या फिर रात में इमरजेंसी में आने वाले मरीज को तत्काल ही सेक्टर-16 के अस्पताल भेज दिया जाता है।
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इस बात के आंकड़े पीसीआर पुलिस से भी मिल सकते हैं। जो कि कालका, चंडीगढ़ हाईवे पर होने वाले एक्सीडेंट के बाद जब अस्पताल पहुंचते हैं तो उनको भी सेक्टर-16 और 32 का रास्ता दिखा दिया जाता है।
अल्ट्रासाउंड मशीन भी खराब
अस्पताल में लगे उपकरण अब काम नहीं कर रहे हैं। अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले चार महीने से खराब पड़ी है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए अब निजी लैब जाना पड़ता है।
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अल्ट्रासाउंड मशीन की मरम्मत करवाने की जरूरत नहीं समझी। मरीज रमनदीप कौर का कहना है कि वह मां का उपचार करवाने के लिए अस्पताल में आए थे।
डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। पहले तो डॉक्टर आज कल का बहाना बनाते रहे और अब पता चला कि यहां अल्ट्रासाउंड मशीन ही खराब पड़ी है। इसके बाद निजी लैब से ज्यादा पैसे देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा।
वहीं आकाश ने बताया कि दो महीने तो अस्पताल वालों ने यह कह कर ही निकाल दिए कि अल्ट्रासाउंड आज होगा, कल होगा।
बाद में जब पता किया तो सामने आया कि अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन कई दिनों से खराब पड़ी है। वहीं स्वास्थ्य निदेशक निरलेप कौर का कहना कि ऐसा होने नहीं चाहिए। वह खुद जाकर जांच करेंगी।