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Chandigarh: निगम को 15 लाख देने के बाद भी सेक्टर-26 मंडी में सफाई नहीं, अब मंडी कमेटी संभालेगी व्यवस्था
Wed, 04 Oct 2023 03:44 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 04 Oct 2023 03:44 PM IST
सार
ग्रेन मार्केट के सचिव मोहित सूद का कहना है कि दुकान सजने के बाद सफाई करने वाले पहुंचते हैं। सफाई कर्मी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि दुकानवालों को हटाना उनका काम नहीं है। ऐसे में वे बस कुछ जगह की सफाई करते हैं जबकि नगर निगम को इस समस्या के समाधान पर काम करना चाहिए।
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चंडीगढ़ सेक्टर 26 सब्जी मंडी
- फोटो : फाइल
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विस्तार
चंडीगढ़ में 23 एकड़ में बसी सेक्टर-26 मंडी में अब नगर निगम के बजाय मंडी कमेटी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराएगी। इसके लिए टेंडर कॉल किया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने पर मंडी कमेटी की निगरानी में नई कंपनी सफाई व्यवस्था देखेगी। इतना ही नहीं, जिस सफाई के लिए मंडी कमेटी नगर निगम को 15 लाख रुपये मासिक देता थी, वही काम अब 12 लाख रुपये में करवाया जाएगा। इस तरह कम खर्च में उम्दा सफाई का खाका तैयार कर किया गया है।
यह भी पढ़ें: Chandigarh: जज की हत्यारी महिला डॉक्टर को हाईकोर्ट ने दी अंतरिम जमानत, समय पूर्व रिहाई की मांग पर होगा विचार
बता दें कि मंडी के आढ़तियों की मांग पर 2019 में कमेटी से सफाई की जिम्मेदारी लेकर नगर निगम के साथ समझौता किया गया था। इसके लिए मंडी कमेटी प्रतिमाह नगर निगम को 15 लाख रुपये दे रही है, लेकिन सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। निगम मंडी की सफाई करवाने में असफल साबित हो रहा है। इसे देखते हुए मंडी कमेटी ने फिर जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम की सफाई में गड़बड़ी होने पर भी आपत्ति नहीं की जा रही थी। अब कमेटी के अंतर्गत व्यवस्था आने पर किसी भी प्रकार की कमी पर कंपनी की जबावदेही तय की जाएगी।
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बता दें कि मंडी के आढ़तियों की मांग पर 2019 में कमेटी से सफाई की जिम्मेदारी लेकर नगर निगम के साथ समझौता किया गया था। इसके लिए मंडी कमेटी प्रतिमाह नगर निगम को 15 लाख रुपये दे रही है, लेकिन सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। निगम मंडी की सफाई करवाने में असफल साबित हो रहा है। इसे देखते हुए मंडी कमेटी ने फिर जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम की सफाई में गड़बड़ी होने पर भी आपत्ति नहीं की जा रही थी। अब कमेटी के अंतर्गत व्यवस्था आने पर किसी भी प्रकार की कमी पर कंपनी की जबावदेही तय की जाएगी।
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सीवर और सड़क बनाए मंडी, टैक्स ले रहा निगम
मंडी कमेटी के अधिकारियों का कहना है कि सड़क और सीवर बनाने पर कमेटी करोड़ों रुपये खर्च कर रही है जबकि टैक्स नगर निगम के खाते में जा रहा है। इस प्रक्रिया पर आला अधिकारी भी आपत्ति नहीं जताते। अगर निगम को टैक्स देने के बजाय उस पैसे को मंडी के विकास पर खर्च किया जाए तो इसकी सूरत बदल जाएगी। सब्जी मंडी के चेयरमैन बलबीर सिंह का कहना है कि मंडी की सफाई से वे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि लाखों रुपये लेकर भी सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
40 के बजाय 20 कर्मचारी ही मौके पर
सब्जी, फल और ग्रेन मार्केट के आढ़तियों का कहना है कि नगर निगम सफाई के नाम पर मंडी में सिर्फ दिखावा कर रहा था। कागजों पर 40 सफाई कर्मी तैनात किए थे, लेकिन मौके पर एक भी दिन 20 कर्मचारियों से ज्यादा नहीं मिले। इस संबंध में नगर निगम में मंडी कमेटी ने शिकायत भी की, लेकिन कभी भी गंभीरता से नहीं लिया गया।
मंडी कमेटी के अधिकारियों का कहना है कि सड़क और सीवर बनाने पर कमेटी करोड़ों रुपये खर्च कर रही है जबकि टैक्स नगर निगम के खाते में जा रहा है। इस प्रक्रिया पर आला अधिकारी भी आपत्ति नहीं जताते। अगर निगम को टैक्स देने के बजाय उस पैसे को मंडी के विकास पर खर्च किया जाए तो इसकी सूरत बदल जाएगी। सब्जी मंडी के चेयरमैन बलबीर सिंह का कहना है कि मंडी की सफाई से वे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि लाखों रुपये लेकर भी सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
40 के बजाय 20 कर्मचारी ही मौके पर
सब्जी, फल और ग्रेन मार्केट के आढ़तियों का कहना है कि नगर निगम सफाई के नाम पर मंडी में सिर्फ दिखावा कर रहा था। कागजों पर 40 सफाई कर्मी तैनात किए थे, लेकिन मौके पर एक भी दिन 20 कर्मचारियों से ज्यादा नहीं मिले। इस संबंध में नगर निगम में मंडी कमेटी ने शिकायत भी की, लेकिन कभी भी गंभीरता से नहीं लिया गया।
मंडी खाली न होने का देते थे कारण
ग्रेन मार्केट के सचिव मोहित सूद का कहना है कि दुकान सजने के बाद सफाई करने वाले पहुंचते हैं। सफाई कर्मी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि दुकानवालों को हटाना उनका काम नहीं है। ऐसे में वे बस कुछ जगह की सफाई करते हैं जबकि नगर निगम को इस समस्या के समाधान पर काम करना चाहिए। वहीं ग्रेन मार्केट के अध्यक्ष राजकुमार बंसल का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों को हटाना निगम की ही जिम्मेदारी है। इसके अलावा दिन के बजाय रात में सफाई अभियान चलता तो आज स्थिति कुछ और ही होती लेकिन सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। यहां पुरानी मशीनों से सफाई संभव नहीं है।
मंडी एक नजर में
मंडी में सफाई के लिए मार्केट कमेटी ने टेंडर कॉल कर दिया है। बुधवार टेंडर के लिए आवेदन की अंतिम तिथि है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नगर निगम के साथ समझौते को दो महीने के लिए बढ़ाया गया था। यह समय सीमा अक्तूबर में पूरी हो जाएगी। - संयम गर्ग, प्रशासक मंडी कमेटी
ग्रेन मार्केट के सचिव मोहित सूद का कहना है कि दुकान सजने के बाद सफाई करने वाले पहुंचते हैं। सफाई कर्मी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि दुकानवालों को हटाना उनका काम नहीं है। ऐसे में वे बस कुछ जगह की सफाई करते हैं जबकि नगर निगम को इस समस्या के समाधान पर काम करना चाहिए। वहीं ग्रेन मार्केट के अध्यक्ष राजकुमार बंसल का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों को हटाना निगम की ही जिम्मेदारी है। इसके अलावा दिन के बजाय रात में सफाई अभियान चलता तो आज स्थिति कुछ और ही होती लेकिन सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। यहां पुरानी मशीनों से सफाई संभव नहीं है।
मंडी एक नजर में
- फल, सब्जी और ग्रेन मार्केट मिलाकर कुल 180 दुकानें
- प्रतिदिन 18 से 20 टन निकलता है कूड़ा
- मंडी में 1.5 करोड़ की लागत से सड़क निर्माण कराया जा रहा है
- सीवर लाइन के लिए 90 लाख रुपये में किया गया है टेंडर
मंडी में सफाई के लिए मार्केट कमेटी ने टेंडर कॉल कर दिया है। बुधवार टेंडर के लिए आवेदन की अंतिम तिथि है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नगर निगम के साथ समझौते को दो महीने के लिए बढ़ाया गया था। यह समय सीमा अक्तूबर में पूरी हो जाएगी। - संयम गर्ग, प्रशासक मंडी कमेटी