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Chandigarh News: दिमाग की टीबी में मरीज का सोडियम जरूर जांचें

Mon, 05 Oct 2026 02:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:22 AM IST
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Make sure to check the patient's sodium levels in cases of cerebral TB.
विश्व मेनिनजाइटिस दिवस पर विशेष
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दिमाग की टीबी में मरीज का सोडियम जरूर जांचेंपीजीआई के शोध में हर दूसरे मरीज में मिली कमी, तेजी से घटने पर उलझन, ज्यादा नींद और दौरे का खतरा
चंडीगढ़। दिमाग की टीबी यानी ट्यूबरकुलस मेनिनजाइटिस में संक्रमण के साथ मरीज के शरीर में सोडियम की मात्रा पर भी नजर रखना जरूरी है। पीजीआई के शोध में 100 मरीजों में 57 यानी 57 प्रतिशत में सोडियम की कमी मिली। सोडियम तेजी से घटने पर मरीज को उलझन, ज्यादा नींद, कमजोरी और दौरे जैसी गंभीर परेशानी हो सकती है। इसलिए ऐसे मरीजों में सोडियम की नियमित जांच महत्वपूर्ण है।

सोडियम घटने के कारण अलग, इलाज भी अलग
शोध के अनुसार दिमाग की टीबी में सोडियम कम होने के दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। एक स्थिति में शरीर जरूरत से ज्यादा पानी रोक लेता है, जबकि दूसरी में शरीर से सोडियम और पानी बाहर निकलने लगता है। दोनों में सोडियम कम होता है, लेकिन इलाज अलग होता है। इसलिए परिजन खुद से मरीज को ज्यादा नमक या पानी देना शुरू न करें। डॉक्टर खून-पेशाब की जांच, शरीर में पानी की स्थिति और अन्य संकेतों के आधार पर कारण तय करते हैं।
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इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
मरीज में लगातार या अचानक उलझन बढ़े, बहुत ज्यादा नींद आए, कमजोरी हो, दौरा पड़े, तेज धड़कन हो या शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए। खासकर अस्पताल में भर्ती मरीजों में सीरम सोडियम की नियमित निगरानी जरूरी है।
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स्कैन में भी मिले बीमारी की गंभीरता के संकेत
शोध में 57 प्रतिशत मरीजों में दिमाग में पानी भरने (हाइड्रोसेफेलस), 38 प्रतिशत में बेसल एक्स्यूडेट, 24 प्रतिशत में दिमाग की रक्त नलिकाओं से जुड़े इंफार्क्ट और 17 प्रतिशत में ट्यूबरकुलोमा मिले। बेसल एक्स्यूडेट और ट्यूबरकुलोमा का खराब परिणाम से महत्वपूर्ण संबंध पाया गया। बीमारी की गंभीर अवस्था यानी स्टेज-3 में 31 प्रतिशत मरीज थे और इसका मृत्यु से भी महत्वपूर्ण संबंध मिला।
शोध में शामिल 100 मरीजों में 35 की मौत हुई, 48 में सुधार हुआ और 10 की स्थिति में खास बदलाव नहीं आया। हालांकि शोधकर्ताओं के अनुसार मृत्यु का संबंध केवल सोडियम की कमी से नहीं था। बीमारी की गंभीरता के साथ अन्य क्लिनिकल और रेडियोलॉजिकल कारकों का भी परिणाम पर असर था।


चार विभागों ने मिलकर किया शोध
पीजीआई के न्यूरोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री विभाग के चिकित्सकों ने यह शोध किया। इसमें डॉ. नीरज सिंगला, डॉ. मेहेरिशंकर एनसी, डॉ. कुसुम शर्मा, डॉ. मनीष मोदी, डॉ. साधना शर्मा, डॉ. नवनीत शर्मा और डॉ. मनोज कुमार गोयल शामिल रहे। शोध जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया के अगस्त 2026 अंक में प्रकाशित हुआ है।
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