Akshay Tritiya: अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और त्रिपुष्कर योग का महासंयोग, जानें महत्व
सिद्ध मुहूर्तों में अक्षय तृतीया सर्वोपरि है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया या तो आखा तीज के नाम से जाना जाता है। अक्षय का शाब्दिक अर्थ है जिसका कभी भी नाश न हो। अक्षय तृतीया के दिन त्रेता युग का प्रारंभ हुआ इसलिए इसे युगादि तिथि कहा जाता है।
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इस वर्ष अक्षय तृतीया पर महायोग बन रहा है। अक्षय तृतीया 22 अप्रैल को है। चंद्रमा एवं सूर्य अपनी अपनी उच्च राशि में हैं। अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग एवं त्रिपुष्कर योग का महासंयोग बन रहा है। इन योगों में कोई भी शुभ कार्य करना, जमीन, जायदाद, वाहन आदि खरीदने पर धन की बढ़ोतरी होती है। अक्षय तृतीया के दिन गोदान करना एवं गाय की सेवा करना अत्यंत पुण्य कारक है, देवता भी इस पुण्य कर्म की प्रशंसा करते हैं।
सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर के पुजारी और देवालय पूजक परिषद के संरक्षक आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि भारतवर्ष संस्कृति प्रधान देश है। हिंदू संस्कृति में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है। व्रत और त्योहार नई प्रेरणा एवं स्फूर्ति का संवहन करते हैं। हमारे भारतीय ऋषियों ने व्रत और पर्वों का आयोजन कर व्यक्ति एवं समाज को पथभ्रष्ट होने से बचाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय काल गणना के अनुसार कई प्रकार के स्वयंसिद्ध मुहूर्त बताए गए हैं, जैसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, बसंत पंचमी, दशहरा, दीपावली के पूर्व की प्रदोष तिथि।
इन सिद्ध मुहूर्तों में अक्षय तृतीया सर्वोपरि है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया या तो आखा तीज के नाम से जाना जाता है। अक्षय का शाब्दिक अर्थ है जिसका कभी भी नाश न हो। अक्षय तृतीया के दिन त्रेता युग का प्रारंभ हुआ इसलिए इसे युगादि तिथि कहा जाता है। इस दिन बद्री धाम में बद्री नारायण भगवान के कपाट भी खुल जाते हैं। अक्षय तृतीया के दिन पूंजी निवेश करना, सोना, चांदी, गहने, जमीन, जायदाद, वाहन आदि खरीदना शुभ कारक माना गया है।
अक्षय तृतीया के दिन हुआ था भगवान परशुराम का जन्म
सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी और देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि भविष्य पुराण के अनुसार भगवान परशुराम जी का प्राकट्य भी अक्षय तृतीया में प्रदोष काल में हुआ था भगवान परशुराम जयंती भी अक्षय तृतीया को मनाई जाती है।
पूर्वाह्न व्यापिनी अक्षय तृतीया का पर्व इस बार 22 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन गंगा इत्यादि पवित्र नदियों में स्नान करना, तीर्थ स्नान करना अक्षय पुण्य दायक है। स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, फल, जलपूरित घट दान करना चाहिए। अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान, जप, हवन, अनुष्ठान देव-तर्पण या पितृ-तर्पण अक्षय हो जाता है। अक्षय अर्थात् कभी भी समाप्त न होने वाला।
राशियों के अनुसार दान
मेष : गुड़, लाल वस्त्र और गेहूं
वृषभ : चावल, दूध, बर्फी
मिथुन : खरबूजा, खीरा एवं नारियल
कर्क : बर्फी, पनीर, सफेद वस्त्र
सिंह : अनार, शक्कर, लाल वस्त्र
कन्या : नारियल की बर्फी, ककड़ी और हरी सब्जी
तुला : घी, दूध और चीनी
वृश्चिक : शहद, गुड़, गेहूं
धनु : आम, चने की दाल व बेसन के लड्डू
मकर : तांबा, काले चने, काले अंगूर
कुंभ : काले अंगूर, काले चने व तांबा
मीन : पीला कपड़ा, पीले फल एवं बेसन