{"_id":"5d11c5778ebc3e132d44e4f2","slug":"mahavir-singh-phogat-against-haryana-government-sports-policy","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा सरकार की खेल नीति के विरोधी हुए महाबीर फोगाट, बोले- अगले 5 सालों में पदकों का सूखा पड़ेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा सरकार की खेल नीति के विरोधी हुए महाबीर फोगाट, बोले- अगले 5 सालों में पदकों का सूखा पड़ेगा
Tue, 25 Jun 2019 12:30 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चरखी दादरी(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चरखी दादरी(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Jun 2019 12:30 PM IST
विज्ञापन
mahavir phogat
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
द्रोणाचार्य अवार्डी पहलवान महाबीर फोगाट हरियाणा प्रदेश सरकार की खेल नीति के विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने कहा है कि आने वाले पांच सालों में पदकों का सूखा पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के ज्यादातर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सरकार की खेल नीति के विरोध में उन्हें अपना समर्थन दे चुके हैं।
महाबीर फोगाट ने प्रदेश सरकार की खेल नीति को नकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि भले ही हरियाणा अब पदकों में नंबर वन हो, लेकिन आने वाले पांच साल के अंदर पदकों का सूखा झेलेगा। ऐसे गंभीर परिणाम देखने को न मिले, इसके लिए खेल नीति में बदलाव की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों गीता, बबीता व रितू फोगाट के पिता महाबीर फोगाट द्रोणाचार्य अवार्डी हैं। सोमवार को उन्होंने चरखी दादरी में पत्रकार वार्ता की। महाबीर ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के करीब तीन हजार खिलाड़ियों को समारोह में देने की बजाय खाते से अवार्ड राशि भेजने का फैसला लेकर खिलाड़ी विरोधी सोच का परिचय दिया है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि अवार्ड राशि समारोह के दौरान मिलती है तो खिलाड़ियों का मनोबल काफी बढ़ता है। 24 जून को होने वाले समारोह को सरकार ने रद्द कर दिया, तो इससे पूरे प्रदेश के खिलाड़ियों में आक्रोश है। भाजपा सरकार खिलाड़ियों के लिए केवल घोषणाएं करती है, उन्हें अमलीजामा पहनाने की तरफ ध्यान ही नहीं है।
विज्ञापन
महाबीर फोगाट ने प्रदेश सरकार की खेल नीति को नकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि भले ही हरियाणा अब पदकों में नंबर वन हो, लेकिन आने वाले पांच साल के अंदर पदकों का सूखा झेलेगा। ऐसे गंभीर परिणाम देखने को न मिले, इसके लिए खेल नीति में बदलाव की जरूरत है।
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों गीता, बबीता व रितू फोगाट के पिता महाबीर फोगाट द्रोणाचार्य अवार्डी हैं। सोमवार को उन्होंने चरखी दादरी में पत्रकार वार्ता की। महाबीर ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के करीब तीन हजार खिलाड़ियों को समारोह में देने की बजाय खाते से अवार्ड राशि भेजने का फैसला लेकर खिलाड़ी विरोधी सोच का परिचय दिया है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि अवार्ड राशि समारोह के दौरान मिलती है तो खिलाड़ियों का मनोबल काफी बढ़ता है। 24 जून को होने वाले समारोह को सरकार ने रद्द कर दिया, तो इससे पूरे प्रदेश के खिलाड़ियों में आक्रोश है। भाजपा सरकार खिलाड़ियों के लिए केवल घोषणाएं करती है, उन्हें अमलीजामा पहनाने की तरफ ध्यान ही नहीं है।
महाबीर ने कहा कि मेरी बड़ी बेटी गीता फोगाट कोर्ट से केस जीतकर डीएसपी बनी है। गीता को डीएसपी बनाने में प्रदेश सरकार का कोई योगदान नहीं है। छोटी बेटी बबीता फोगाट ने भी कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने वाली तीसरी बेटी रितू फोगाट अभी तक नौकरी से वंचित है।
रितू कुश्ती को अलविदा कहकर एमएमए (मिक्स मार्शल आर्ट्स) की ट्रेनिंग ले रहीं है। द्रोणाचार्य अवार्डी ने कहा कि 2018 कॉमनवेल्थ में पदक जीतने वाले को प्रदेश सरकार ने नौकरी देने की घोषणा की थी, जो अब तक पूरी नहीं हुई है। पिछले चार-पांच सालों से खिलाड़ियों की अवार्ड राशि सरकार की तरफ बकाया है। अगर सरकार का ये ही रवैया रहा तो आने वाले पांच साल में हरियाणा पदकों का सूखा झेलेगा।
बबीता और विनेश को मुर्राह नस्ल की भैंस देना भूले धनखड़
प्रेस वार्ता के दौरान महाबीर फोगाट ने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर लौटीं बबीता व विनेश फोगाट को कृषि मंत्री ने मुर्राह नस्ल की भैंस देने की घोषणा की थी, जो एक साल बाद भी पूरी नहीं की गई। महाबीर फोगाट ने कहा कि प्रदेश की खेल नीति और मंत्रियों की खिलाड़ियों के लिए की गई घोषणाओं की हालत एक जैसी ही है।
रितू कुश्ती को अलविदा कहकर एमएमए (मिक्स मार्शल आर्ट्स) की ट्रेनिंग ले रहीं है। द्रोणाचार्य अवार्डी ने कहा कि 2018 कॉमनवेल्थ में पदक जीतने वाले को प्रदेश सरकार ने नौकरी देने की घोषणा की थी, जो अब तक पूरी नहीं हुई है। पिछले चार-पांच सालों से खिलाड़ियों की अवार्ड राशि सरकार की तरफ बकाया है। अगर सरकार का ये ही रवैया रहा तो आने वाले पांच साल में हरियाणा पदकों का सूखा झेलेगा।
बबीता और विनेश को मुर्राह नस्ल की भैंस देना भूले धनखड़
प्रेस वार्ता के दौरान महाबीर फोगाट ने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर लौटीं बबीता व विनेश फोगाट को कृषि मंत्री ने मुर्राह नस्ल की भैंस देने की घोषणा की थी, जो एक साल बाद भी पूरी नहीं की गई। महाबीर फोगाट ने कहा कि प्रदेश की खेल नीति और मंत्रियों की खिलाड़ियों के लिए की गई घोषणाओं की हालत एक जैसी ही है।