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वेतन विसंगतियों पर माधवन आयोग ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Mar 2016 04:30 PM IST
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छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा के कर्मचारियों के छठे वेतन आयोग में वेतन विसंगतियों से जुड़े तमाम पहलुओं के तुलनात्मक अध्ययन के बाद माधवन आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट तैयार करने में आयोग को करीब 18 महीने का वक्त लगा। इस दौरान प्रदेश के 209 यूनियनों और विभागीय प्रतिनिधियों की आयोग के समक्ष सुनवाई भी हुई। वीरवार को वेतन विसंगति आयोग, हरियाणा के चेयरमैन जी माधवन ने सचिवालय में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को रिपोर्ट सौंपी।
11 सितंबर 2014 को गठित इस आयोग का कार्यकाल पूरा होने पर सरकार को पेश की गई रिपोर्ट में पंजाब के तर्ज पर वेतनमान को प्रमुखता से शामिल किया गया है। अन्य विसंगतियों को दूर करने के लिए भी आयोग ने तमाम पहलुओं पर गौर किए हैं। माधवन ने अपनी रिपोर्ट में 60 हजार कर्मचारियों की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए सरकार को कई तरह के सुझाव दिए हैं। इसमें पंजाब के समान वेतनमान को खास तवज्जो दी गई है। हरियाणा और पंजाब के कर्मचारियों के वेतनमान और भत्ते को आधार मानते हुए रिपोर्ट तैयार की गई है।
इस रिपोर्ट को अगर सरकार लागू करती है तो नए ज्वाइन करने वाले कर्मियों को इसका अधिक फायदा मिलेगा। इसके अलावा भी कई भत्तों के मामले में पहले से ही हरियाणा पंजाब से बेहतर है। ऐसे में पंजाब के तर्ज पर वेतनमान को लागू किए जाने से कुछ विभागों को इसका कोई खास फायदा नहीं मिलेगा। रिपोर्ट में छठे वेतन आयोग में लाभ से वंचित रहे कर्मचारियों को प्रस्तावित सातवें वेतन आयोग में लाभ देने के लिए खास प्रारूप भी तैयार किया गया है। इस सिलसिले में आयोग ने प्रदेश के 200 से अधिक प्रतिनिधियों और संगठनों से बातचीत की।
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दो बार आयोग की बढ़ाई गई मियाद
प्रदेश के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिहाज से पूर्व प्रदेश सरकार ने रिटायर्ड आईएएस जी माधवन की अध्यक्षता में 11 सितंबर, 2014 को वेतन विसंगति आयोग, हरियाणा का गठन किया। इसके बाद आई भाजपा सरकार ने इस आयोग के अध्यक्ष जी. माधवन को मंजूरी देते हुए छह महीने का कार्यकाल बढ़ा दिया, लेकिन नियत समय पर रिपोर्ट तैयार होने की वजह से एक बार फिर मियाद छह महीने के बढ़ाई गई, जिसका कार्यकाल 10 मार्च को खत्म हो गया।
वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए तैयार रिपोर्ट मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में मुख्यत: पंजाब के वेतनमान और भत्तों का अध्ययन किया गया है। अगर रिपोर्ट की सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया गया तो कर्मियों के वेतनमान में फायदा मिलेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ही इसे लागू करने के संबंध में अंतिम निर्णय लेगी।
-जी. माधवन, चेयरमैन, वेतन विसंगति आयोग, हरियाणा
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11 सितंबर 2014 को गठित इस आयोग का कार्यकाल पूरा होने पर सरकार को पेश की गई रिपोर्ट में पंजाब के तर्ज पर वेतनमान को प्रमुखता से शामिल किया गया है। अन्य विसंगतियों को दूर करने के लिए भी आयोग ने तमाम पहलुओं पर गौर किए हैं। माधवन ने अपनी रिपोर्ट में 60 हजार कर्मचारियों की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए सरकार को कई तरह के सुझाव दिए हैं। इसमें पंजाब के समान वेतनमान को खास तवज्जो दी गई है। हरियाणा और पंजाब के कर्मचारियों के वेतनमान और भत्ते को आधार मानते हुए रिपोर्ट तैयार की गई है।
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इस रिपोर्ट को अगर सरकार लागू करती है तो नए ज्वाइन करने वाले कर्मियों को इसका अधिक फायदा मिलेगा। इसके अलावा भी कई भत्तों के मामले में पहले से ही हरियाणा पंजाब से बेहतर है। ऐसे में पंजाब के तर्ज पर वेतनमान को लागू किए जाने से कुछ विभागों को इसका कोई खास फायदा नहीं मिलेगा। रिपोर्ट में छठे वेतन आयोग में लाभ से वंचित रहे कर्मचारियों को प्रस्तावित सातवें वेतन आयोग में लाभ देने के लिए खास प्रारूप भी तैयार किया गया है। इस सिलसिले में आयोग ने प्रदेश के 200 से अधिक प्रतिनिधियों और संगठनों से बातचीत की।
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दो बार आयोग की बढ़ाई गई मियाद
प्रदेश के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिहाज से पूर्व प्रदेश सरकार ने रिटायर्ड आईएएस जी माधवन की अध्यक्षता में 11 सितंबर, 2014 को वेतन विसंगति आयोग, हरियाणा का गठन किया। इसके बाद आई भाजपा सरकार ने इस आयोग के अध्यक्ष जी. माधवन को मंजूरी देते हुए छह महीने का कार्यकाल बढ़ा दिया, लेकिन नियत समय पर रिपोर्ट तैयार होने की वजह से एक बार फिर मियाद छह महीने के बढ़ाई गई, जिसका कार्यकाल 10 मार्च को खत्म हो गया।
वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए तैयार रिपोर्ट मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में मुख्यत: पंजाब के वेतनमान और भत्तों का अध्ययन किया गया है। अगर रिपोर्ट की सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया गया तो कर्मियों के वेतनमान में फायदा मिलेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ही इसे लागू करने के संबंध में अंतिम निर्णय लेगी।
-जी. माधवन, चेयरमैन, वेतन विसंगति आयोग, हरियाणा