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56 साल का चंडीगढ़: खूबसूरती में नाम कमाया, शिक्षा-स्वास्थ्य में गाड़े झंडे, हरियाली के साथ खुशहाली में आगे
Tue, 01 Nov 2022 02:18 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 02:18 AM IST
सार
चंडीगढ़ देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सपनों का शहर है। उन्होंने देश की आजादी के समय ही इस शहर की कल्पना कर ली थी इसलिए फ्रांस में जन्मे प्रसिद्ध वास्तुकार ली कार्बुजिए को शहर को डिजाइन करने का काम सौंपा।
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चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ आज 56 वर्ष का हो गया मगर ये शहर आज भी जवां हैं। इस शहर के बारे में जो सबसे खास बात है वो ये है कि जो एक बार यहां आता है, उसे फिर देश का कोई दूसरा शहर अच्छा नहीं लगता। इसके पीछे वजहें भी हैं, यह एकमात्र शहर है जहां स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीजीआई समेत कई बड़े अस्पताल, 200 से ज्यादा स्कूल, क्रिकेट के अलावा हॉकी-फुटबॉल स्टेडियम, 11 कॉलेज के साथ यूनिवर्सिटी समेत सभी सुविधाएं हैं।
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चंडीगढ़ को आज भी आधुनिक शहर कहा जाता है जबकि इसका निर्माण वर्ष 1952 में शुरू हुआ था। तो सोचिए, ये उस समय के लिए कितना आधुनिक रहा होगा। शहर के निर्माता ऐसी नीतियां बना कर गए जिससे आज तक शहर का मूल ढांचा सुरक्षित है और अपने असली स्वरूप में है। शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में बसे इस छोटे से शहर पर कई राज्य निर्भर हैं जबकि ये आत्मनिर्भर है।
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चंडीगढ़ देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सपनों का शहर है। उन्होंने देश की आजादी के समय ही इस शहर की कल्पना कर ली थी इसलिए फ्रांस में जन्मे प्रसिद्ध वास्तुकार ली कार्बुजिए को शहर को डिजाइन करने का काम सौंपा। उन्हें इस शहर से काफी प्रेम था इसलिए वह निर्माण के समय कई बार चंडीगढ़ पहुंचे। 1952 में काम शुरू हुआ और एक नवंबर 1966 को चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।
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मेडिकल टूरिज्म का बड़ा केंद्र
देश में एम्स के बाद दूसरे पायदान पर स्थान रखने वाले पीजीआई चंडीगढ़ में एक साल में अकेले करीब 28 लाख मरीजों का इलाज होता है। इसके अलावा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल (जीएमसीएच-32) और गवर्नमेंट मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल (जीएमएसएच-16) अलग हैं, जहां रोजाना हजारों मरीजों का इलाज किया जाता है। चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में हो रहे विकास को देखते हुए अब यह मेडिकल टूरिज्म का भी बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। क्लीनिकल हिमोटोलॉजी, आंकोलॉजी और बोन मैरो सेंटर, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर, हीपैटोलॉजी विभाग में हर साल लाखों मरीजों की जान बचाई जाती है। रीजनल ट्रांसप्लांट सर्जरी, रूमेटोलॉजी व एडवांस आई सेंटर भी हमारा विशेष विभाग है। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआई देश के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए तत्पर हैं। कुछ योजनाएं लंबित हैं, उन्हें तेजी से पूरा कराने का प्रयास है। आने वाले दो से तीन साल में पीजीआई सैटेलाइट सेंटरों के जरिए बाहर के मरीजों को उच्च चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने का प्रयास है।
देशभर के 35 लाख से ज्यादा मरीजों को मिल रहा इलाज
35 लाख लगभग मरीजों को मिलता है हर साल इलाज
27 से 28 लाख केवल पीजीआई में आते हैं मरीज
6 से 7 लाख मरीज जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में आते हैं
3720 बेड की व्यवस्था है चंडीगढ़ में
जल्द इन सुविधाओं का लाभ
- 300 बेड का मदद एंड चाइल्ड केयर सेंटर
- फिरोजपुर सैटेलाइट सेंटर
- संगरूर सैटेलाइट सेंटर
- ऊना सैटेलाइट सेंटर
- हिमाचल और पंजाब में स्वीकृत तीन सैटेलाइट सेंटर
- पीजीआई में निर्माणाधीन 300 बेड के एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर
- जीएमसीएच- 32 में 300 बेड का ट्रामा सेंटर और 300 बेड के मदर चाइल्ड केयर सेंटर
- जीएमएसएच-16 में 300 बेड के मदर चाइल्ड केयर सेंटर
एजुकेशन हब
शिक्षा के क्षेत्र में चंडीगढ़ सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। आईआईटी के स्तर का कॉलेज पेक है। विज्ञान में शोध के मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी पूरे देश में अग्रणी है। शहर के कॉलेजों ने देश को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय स्तर के राजनेता भी तैयार हुए हैं। कई फिल्म अभिनेता, उद्योगपति, नौकरशाह भी पैदा किए हैं। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू के छात्र नीट, आईआईटी, यूपीएससी, एसएससी, डिफेंस की कोचिंग के लिए शहर का रुख कर रहे हैं। शहर में सबसे पुराना स्कूल सेक्टर-22 का सरकारी स्कूल है। इसके निर्माण की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। इसके बाद सेक्टर-25, 35, 16 इत्यादि में सरकारी स्कूल बने और वर्तमान में शहर में स्कूलों की संख्या 115 तक पहुंच गई है। शुरुआत में स्कूल दसवीं तक ही था। वर्तमान में शहर में 42 सरकारी स्कूल सीनियर सेकेंडरी है और अन्य हाई और मिडिल स्कूल है।
हर साल आबादी से ज्यादा पहुंचते हैं पर्यटक
पर्यटकों का चंडीगढ़ पसंदीदा है। जो लोग पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर घूमने के लिए निकलते हैं वो अपने ट्रिप की शुरुआत चंडीगढ़ से ही करते हैं। इस वजह से ही कोरोना से पहले शहर की जितनी जनसंख्या है, उससे ज्यादा पर्यटक हर साल चंडीगढ़ पहुंचते थे। कोविड की वजह से संख्या कम हुई है, लेकिन अब फिर तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2018 में घरेलू पर्यटक कुल 15 लाख 38 हजार 796 और विदेशी 39 हजार 681 पहुंचे थे। वर्ष 2019 में 15 लाख 63 हजार 795 और 44 हजार 132 विदेशी पर्यटक पहुंचे थे। जबकि शहर की कुल जनसंख्या ही 12 लाख के करीब है।
सबसे ज्यादा लोग रॉक गार्डन देखने पहुंचते हैं लोग
शहर में सबसे ज्यादा घरेलू पर्यटक जून-जुलाई से लेकर नवंबर-दिसंबर के बीच पहुंचते हैं। विदेशी पर्यटक मार्च-अप्रैल और अक्टूबर-नवंबर महीने में चंडीगढ़ आते हैं। सबसे ज्यादा लोग रॉक गार्डन को देखने जाते हैं। उसके बाद रोज गार्डन, सुखना लेक और कैपिटल कांप्लेक्स को देखने जाते हैं। हालांकि अब बर्ड पार्क पहुंचने वाले लोगों की संख्या भी बेहद ज्यादा है। शहर में कोरोना से पहले औसतन साढ़े तीन हजार विदेशी पर्यटक हर महीने शहर पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या 1000 से भी कम है।
खेलों में भी कम नहीं, ओलंपियन तक दिए शहर ने
शहर में इसी साल खेलों इंडिया की ओर से तीन खेलों की सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की अकादमी मिली है। इनमें हॉकी, मुक्केबाजी, रोइंग के खेल के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खुल गए हैं। इन तीन खेलों में देश के विभिन्न शहरों से खिलाड़ी ट्रायल के आधार पर चुन कर लाए गए है। इन्हें अनुभवी कोचों की देखरेख में तराश कर अंतरराष्ट्रीय लेवल का खिलाड़ी बनाने का काम शुरू हो चुका हैं। इन सेंटरों के खिलाड़ियों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था के लिए हॉस्टल भी बनाया गया है। इसके अलावा शहर को कई खेलों की मेजबानी का मौका भी मिला। इसमें खेलो इंडिया की आर्चरी और फुटबॉल की मेजबानी मिली है। पीयू में खेलों का आयोजन हुआ था। शहर ने ओलंपियन से लेकर कई क्रिकेट खिलाड़ी, तैराक, शूटर, आर्चरी, फुटबॉल, बैडमिंटन, हॉकी, रोइंग, गोल्फर आदि दिए हैं।