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Chandigarh News: पीएम मोदी ने श्री गुरु रविदास के दोहों से जोड़ा विकसित भारत का सपना
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत गुरु रविदास जी की वाणी से प्रेरित होकर तीन प्रमुख श्लोक पढ़े और उन्हें वर्तमान भारत की परिस्थितियों व विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा। प्रधानमंत्री ने गुरु रविदास जी का प्रसिद्ध दोहे बेगमपुरा शहर को नाउं… पढ़ते हुए कहा कि यह दोहा उस आदर्श समाज की कल्पना है जहां न दुख हो, न भेदभाव और न किसी प्रकार का अन्याय हो। यह विचार आज के भारत के लिए मार्गदर्शक है और समतामूलक व विकसित भारत की मूल भावना को व्यक्त करता है।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने मन चंगा तो कठौती में गंगा पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मन पवित्र और कर्म ईमानदार हों तो संसाधन या स्थान मायने नहीं रखते। यह आंतरिक शुद्धता और कर्मप्रधान जीवन का संदेश है। प्रधानमंत्री ने तीसरे दोहे ऐसा चाहूं राज मैं… का उल्लेख किया जिसमें गुरु रविदास जी ने समाज में समानता और न्यायपूर्ण शासन की परिकल्पना की थी। पीएम मोदी ने कहा कि यही विचार सरकार की सबका साथ, सबका विकास नीति का आधार है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गुरु रविदास जी की वाणी न केवल आध्यात्मिक संदेश है बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा का दर्शन भी है जो आज भी भारत के विकास मार्ग को दिशा देता है।
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जालंधर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत गुरु रविदास जी की वाणी से प्रेरित होकर तीन प्रमुख श्लोक पढ़े और उन्हें वर्तमान भारत की परिस्थितियों व विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा। प्रधानमंत्री ने गुरु रविदास जी का प्रसिद्ध दोहे बेगमपुरा शहर को नाउं… पढ़ते हुए कहा कि यह दोहा उस आदर्श समाज की कल्पना है जहां न दुख हो, न भेदभाव और न किसी प्रकार का अन्याय हो। यह विचार आज के भारत के लिए मार्गदर्शक है और समतामूलक व विकसित भारत की मूल भावना को व्यक्त करता है।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने मन चंगा तो कठौती में गंगा पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मन पवित्र और कर्म ईमानदार हों तो संसाधन या स्थान मायने नहीं रखते। यह आंतरिक शुद्धता और कर्मप्रधान जीवन का संदेश है। प्रधानमंत्री ने तीसरे दोहे ऐसा चाहूं राज मैं… का उल्लेख किया जिसमें गुरु रविदास जी ने समाज में समानता और न्यायपूर्ण शासन की परिकल्पना की थी। पीएम मोदी ने कहा कि यही विचार सरकार की सबका साथ, सबका विकास नीति का आधार है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गुरु रविदास जी की वाणी न केवल आध्यात्मिक संदेश है बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा का दर्शन भी है जो आज भी भारत के विकास मार्ग को दिशा देता है।
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