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Hindi News ›   Chandigarh ›   Lyrist Irshad Kamil in Punjab University, Chandigarh

छात्र आंदोलन के लिए लिखा था ‘साड्डा हक एत्थे रख’

Tue, 13 May 2014 02:51 PM IST
शंकर सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
शंकर सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 13 May 2014 02:51 PM IST
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Lyrist Irshad Kamil in Punjab University, Chandigarh

पीयू के हिंदी विभाग में जब छात्र था तो छात्र राजनीति में हिस्सा लिया करता था। उसी दौरान आंदोलन के लिए एक स्लोगन लिखा जिसके बोल थे ‘साड्डा हक एत्थे रख’ और यही रॉकस्टार फिल्म के गाने में भी काम आए। यह कहना है गीतकार इरशाद कामिल का।

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इरशाद सोमवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के  विदाई समारोह में अपनी पत्नी और बेटे के साथ हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से कई बातें खास तौर पर साझा कीं।
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हाल ही में आए उनके गाने ‘पटाखा गुड्डी’ और ‘तूने मारी एंट्री’ काफी चर्चित रहे। इरशाद ने इस पर कहा कि दरअसल जब भी कोई निर्देशक उनके पास गाना लिखवाने के लिए आता है तो वह पूरी तरह से स्थिति को समझते हैं। इसके बाद वे किरदार के अनुसार गाना लिखते हैं।
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उन्होंने कहा कि फिल्म ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ के गाने ‘मैं तैरे अगल-बगल हूं’ को जब लिखने बैठा तो पहले यह समझा कि शाहिद कपूर किस तरह के किरदार में नजर आ रहे हैं।

इम्तियाज से दोस्ती बहुत पुरानी:

इम्तियाज की कोई भी फिल्म हो, उसके गीत हमेशा इरशाद कामिल ही लिखते हैं। इसके बारे में बताते हुए इरशाद ने कहा कि उनकी दोस्ती बहुत पुरानी है। फिल्म सोचा न था से यह जोड़ी बनी। तब मैं मुंबई में नया था और इम्तियाज ने इस फिल्म से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा था। इसी फिल्म में अभय देओल ने भी डेब्यू किया था। वह फिल्म हमारे लिए बहुत खास थी।

इरशाद की जिंदगी का डायलॉग फिल्म में:
इरशाद ने कहा कि जब वह प्लस टू के स्टूडेंट थे तो उनका रुझान लिखने की तरफ हो गया। उन्होंने कहा कि उनके लिखने के शौक को देखकर उनकी मां चिंतित रहने लगी।

कामिल ने बताया कि उनकी मां एक बार उन्हें मालेरकोटला के एक लेखक के पास ले गई और कहा कि उन्हें (कामिल को) पता नहीं क्या हो गया है, लिखने का शौक चढ़ गया है। इस पर उस शायर ने इरशाद से कहा कि शायर बनना चाहते हो। कामिल ने हां में जवाब दिया।

शायर ने कहा कि इस उम्र में क्या खाक शायर बनोगे। जब तक 10-20 बार दिल नहीं टूट जाता, तब तक शायर नहीं बन पाओगे। टूटे हुए दिल से ही बेहतरीन शायरी निकलेगी। यही डायलॉग फिल्म रॉकस्टार में रणबीर कपूर के लिए  इस्तेमाल किए गए थे।

एक जीवन में होते है पांच प्यार
इरशाद ने कहा कि एक इंसान के जीवन में पांच प्यार होते हैं। उन्हें यह फिलॉसफी बिलकुल ठीक लगती है। हालांकि उन्होंने अपने पांच प्यार के बारे में खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनका पहला प्यार हमेशा मां है और दूसरा लेखन। उनके लेखन की प्रेरणा भी मां ही है।

फिल्म की कहानी लिखेंगे कामिल
इरशाद ने कहा कि वह अपने नाटक ‘बोलतीं दीवारें’ को किताब के रूप में प्रकाशित करेंगे। आजकल वह कुछ फिल्मों की कहानी भी लिख रहे हैं।

हिंदी विभाग में दो स्कॉलरशिप की शुरू

कामिल ने पीयू के हिंदी विभाग के एमए फर्स्ट और सेकंड ईयर में सबसे ज्यादा अंक लाने वाले विद्यार्थियों के लिए स्पेशल स्कालरशिप सोमवार से शुरू की। इस स्कॉलरशिप को उन्होंने अपनी मां बेगम इकबाल बानो का नाम दिया है। इरशाद ने विभाग के पुस्तकालय में दो एयर कंडीशनर भी लगा चुके हैं।


पीयू के इंग्लिश ऑडीटोरियम में हिंदी विभाग के बैच 2013-14 के विदाई समारोह में शिरकत करते हुए इरशाद ने एमए प्रथम में सबसे अधिक अंक लाने वाली ऋतु को बारह हजार की स्कॉलरशिप और एमए द्वितीय वर्ष में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाली सुनीता कुमारी को 21 हजार की स्कॉलरशिप दी गई। 

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