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मां-बाप का सपना रह गया अधूरा, ऐसे चली गई इकलौते बेटे की जान, हादसे से सभी स्तब्ध

Wed, 22 May 2019 12:06 AM IST
ajay kumar विकास मल्होत्रा/ अमित कुमार, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
विकास मल्होत्रा/ अमित कुमार, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 22 May 2019 12:06 AM IST
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Ludhiana's Student died in road accident on eastern peripheral expressway in Baghpat
कांत ढींगरा - फोटो : अमर उजाला

घरवालों का सपना पूरा करने के लिए पिछले तीन साल से नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में डॉक्टर की पढ़ाई कर रहे कांत ढींगरा की मौत की खबर ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।

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कांत ढींगरा का घर बंद पड़ा था और आसपास के लोगों को किसी तरह की कोई जानकारी नहीं थी कि करीब एक सप्ताह पहले दो दिन के लिए परिजनों को मिलने आया कांत ढींगरा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
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कांत ढींगरा की मंगलवार को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में मौत हो गई। उसके साथ तीन साथी भी मौत के आगोश में चले गए। कांत की मौत के बारे में पड़ोसियों को पता चला तो वह हैरान रह गए। सभी एक दूसरे से बातें करने लगे कि परिवार पर इतना बड़ा पहाड़ गिर गया।
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हैबोवाल कलां के रघुवीर पार्क में रहने वाले कांत ढींगरा के पिता कृष्ण ढींगरा सीए हैं। कांत की मां चमनज्योति ढींगरा गृहिणी है। कांत माता-पिता का इकलौता बेटा था। मां-बाप का सपना था कि वह डॉक्टर बने।

परिजनों का सपना पूरा करने के लिए वह केवीएम स्कूल में 12वीं तक की शिक्षा हासिल करने के बाद नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। पिछले तीन साल से वह डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था। 

वह महीने में एक या दो दिन के लिए माता-पिता से मिलने के लिए आता था। दो दिन के बाद वह वापस निकल जाता था। पड़ोसियों ने बताया कि कांत करीब एक सप्ताह पहले ही माता पिता से मिलने के लिए आया था। दो दिन रहने के बाद वह चला गया। घर में सिर्फ माता पिता ही रहते हैं।

इलाके में सभी से अच्छे तरीके से बात करने वाले कृष्ण ढींगरा ने अपने बेटे कांत को भी सभी के साथ अच्छे स्वभाव में बात करने की प्रेरणा दी थी। कांत जब भी महानगर आता तो अपने आसपास रहने वाले लोगों से भी अच्छी तरह मिलता था। उसी समय पता चला था कि वह हिमाचल जा रहा है लेकिन क्या करने जा रहा है इस बारे में नहीं पता। 

शाम तक पड़ोसियों को नहीं थी किसी तरह की कोई सूचना
कृष्ण ढींगरा के पड़ोसियों ने बताया कि कृष्ण के अपने काम पर जाने के बाद चमनज्योति अकेली है। उन्होंने बताया कि कांत के साथ किसी तरह के हुए हादसे की खबर उन्हें मालूम नहीं है। वह तो अभी ही जान पाए है। उनकी भी हिम्मत नहीं पड़ रही कि वह जाकर कांत की मां को कुछ बता सके। 

कांत का घर बंद था। जब कांत के पड़ोसियों को पता चला तो आस-पास रहने वाले दो तीन घरों के लोग भी बाहर आ गए। जब सब को पता चला तो वह हैरान हो गए कि एक सप्ताह पहले सब लोगों से अच्छे से मिलकर जाने वाला कांत अब इस दुनिया में नहीं रहा। 

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