बड़ा खुलासाः एफसीआई का घाटा बन रहा है किसानों की कमान निजी सेक्टर को सौंपने का कारण

सुरिंदर पाल, जालंधर(पंजाब) Updated Wed, 23 Sep 2020 11:34 AM IST
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फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया घाटे में चल रहा है, इसलिए खरीद का काम निजी हाथों में सौंप दिया जाना चाहिए, ऐसा पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार की 2014-15 की रिपोर्ट में कहा गया था। अब यही रिपोर्ट किसानों से जुड़े कानून को लागू करने का मुख्य कारण बन रही है। किसानों का तर्क है कि केंद्र अपनी अनाज खरीद व वितरण एजेंसी एफसीआई को खत्म करने जा रहा है।
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एजेंसी का अंत भी बीएसएनएल जैसा हो सकता है। दरअसल, 2018-19 में एफसीआई ने राज्यों को 3 रुपये प्रति किलोग्राम चावल और 2 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं जारी किया। इन दोनों खाद्यान्न का मूल्य प्रति किलोग्राम 33.1 रुपये और 24.45 रुपये है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि देश भर में 5 लाख से अधिक राशन दुकानों के माध्यम से प्रति किलोग्राम चावल की बिक्री पर सरकार को 30 रुपये सब्सिडी देनी पड़ी।
इसी तरह, गेहूं पर यह सब्सिडी बढ़कर प्रति किलोग्राम 22.45 रुपये हो जाती है। एफसीआई इसी साल लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) से एक लाख 36 हजार 600 करोड़ रुपये उधार लेने जा रहा है। पिछले पांच साल में उधार ली गई यह सबसे बड़ी रकम होगी जो पिछले साल के मुकाबले करीब 24 प्रतिशत अधिक होगी। एफसीआई के कंधों पर चावल और गेहूं की खरीद है, जिसको आगे सब्सिडी देकर वितरण किया जाता है।
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एफसीआई तो सेवा करने वाली संस्था है...

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