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व्यवस्था फेल : चंडीगढ़ में गेहूं के लिए बनी रेल
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सेक्टर-56 के कम्युनिटी सेंटर में बंट रहे राशन की पर्ची लेने के लिए उमड़ी भीड़।
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चंडीगढ़। स्मार्ट सिटी में गरीबों की भूख से मजाक का सिलसिला जारी है। बुधवार को अमर उजाला टीम जब सेक्टर-56 के कम्युनिटी सेंटर पहुंची तो गेहूं लेने के लिए भारी भीड़ लगी थी। लोगों ने कहा कि पहले तो पर्ची के लिए घंटों लाइन में लगे रहे। अब गेहूं के लिए तेज धूप में खड़े हैं। यह हालात तब हैं जब कुछ दिन पहले ही पार्षदों के साथ हुई बैठक में खाद्य विभाग के अफसरों ने राशन वितरण की व्यवस्था सुधारने के तमाम दावे किए थे, लेकिन जमीन पर व्यवस्था जस की तस है।
सेक्टर-56 के कम्यूनिटी सेंटर में सरकार की ओर से दिए जाने वाले गेहूं के वितरण के लिए पहले पर्ची देने की व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पार्षद ने अपने कुछ लोगों को कम्यूनिटी सेंटर में बैठाया है, जो लाभार्थियों को पर्ची दे रहे हैं। बुधवार को कम्यूनिटी सेंटर में सैकड़ों की संख्या में लोग पर्ची लेने के लिए जोर आजमाइश कर रहे थे। यहां कोरोना के नियमों की सरेआम अनदेखी हो रही थी। बहुत से लोगों ने तो मास्क पहना ही नहीं था। सामाजिक दूरी तो थी ही नहीं। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए भी ये लापरवाही लोगों को भारी पड़ सकती है।
लोगों ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद जिन लोगों को पर्ची मिल जा रही थी, उन्हें अब गेहूं के लिए पास के ही स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में दोबारा लाइन में लगनी पड़ रही है। वह भी तेज धूप में खुले आसमान के नीचे। स्थानीय भाजपा नेता एमडी खान ने कहा कि पर्ची बांटने में धांधली हो रही है। कोई व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से लोग परेशान हो रहे हैं। पहले लोगों को घर-घर जाकर पर्ची दी गई थी, लेकिन अब लोगों को दो-दो बार लाइन में लगकर परेशान होना पड़ रहा है।
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मुफ्त का गेहूं घर लाने के लिए खर्चने पड़ रहे 150 रुपये
बता दें कि कुछ दिनों पहले ही शहर में हजारों लोगों को सड़ा हुआ गेहूं बांट दिया गया था। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। प्रशासक के सलाहकार से लेकर अब मामला केंद्र तक पहुंच गया है। एफसीआई के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस पूरे प्रकरण के बाद गेहूं की गुणवत्ता तो सुधर गई है, लेकिन लगभग सभी केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे ही गेहूं का वितरण किया जा रहा है। आदेश ये भी थे कि लोगों को गेहूं खोलकर दिखाया जाएगा, लेकिन अब भी गेहूं बांटने से पहले थैली खोलकर नहीं दिखाई जा रही। कॉलोनी नंबर-4 में हजारों लाभार्थी हैं, लेकिन उन्हें गेहूं कॉलोनी में न देकर करीब दो से ढाई किमी दूर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित मिल के पास दिया गया। जहां से कालोनी तक राशन पहुंचाने के लिए लोगों को रेहड़ी व रिक्शे वालों को 100 से 150 रुपये देने पड़े।
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सेक्टर-56 के कम्यूनिटी सेंटर में सरकार की ओर से दिए जाने वाले गेहूं के वितरण के लिए पहले पर्ची देने की व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पार्षद ने अपने कुछ लोगों को कम्यूनिटी सेंटर में बैठाया है, जो लाभार्थियों को पर्ची दे रहे हैं। बुधवार को कम्यूनिटी सेंटर में सैकड़ों की संख्या में लोग पर्ची लेने के लिए जोर आजमाइश कर रहे थे। यहां कोरोना के नियमों की सरेआम अनदेखी हो रही थी। बहुत से लोगों ने तो मास्क पहना ही नहीं था। सामाजिक दूरी तो थी ही नहीं। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए भी ये लापरवाही लोगों को भारी पड़ सकती है।
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लोगों ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद जिन लोगों को पर्ची मिल जा रही थी, उन्हें अब गेहूं के लिए पास के ही स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में दोबारा लाइन में लगनी पड़ रही है। वह भी तेज धूप में खुले आसमान के नीचे। स्थानीय भाजपा नेता एमडी खान ने कहा कि पर्ची बांटने में धांधली हो रही है। कोई व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से लोग परेशान हो रहे हैं। पहले लोगों को घर-घर जाकर पर्ची दी गई थी, लेकिन अब लोगों को दो-दो बार लाइन में लगकर परेशान होना पड़ रहा है।
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मुफ्त का गेहूं घर लाने के लिए खर्चने पड़ रहे 150 रुपये
बता दें कि कुछ दिनों पहले ही शहर में हजारों लोगों को सड़ा हुआ गेहूं बांट दिया गया था। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। प्रशासक के सलाहकार से लेकर अब मामला केंद्र तक पहुंच गया है। एफसीआई के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस पूरे प्रकरण के बाद गेहूं की गुणवत्ता तो सुधर गई है, लेकिन लगभग सभी केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे ही गेहूं का वितरण किया जा रहा है। आदेश ये भी थे कि लोगों को गेहूं खोलकर दिखाया जाएगा, लेकिन अब भी गेहूं बांटने से पहले थैली खोलकर नहीं दिखाई जा रही। कॉलोनी नंबर-4 में हजारों लाभार्थी हैं, लेकिन उन्हें गेहूं कॉलोनी में न देकर करीब दो से ढाई किमी दूर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित मिल के पास दिया गया। जहां से कालोनी तक राशन पहुंचाने के लिए लोगों को रेहड़ी व रिक्शे वालों को 100 से 150 रुपये देने पड़े।