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हरियाणा में भाजपा को है भीतरघात का खतरा
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Mar 2014 02:47 PM IST
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हरियाणा में हविपा के साथ गठबंधन कर रही भाजपा ने सात में से चार लोकसभा क्षेत्रों में ऐसे उम्मीदवार चुने हैं जिनका कभी भाजपा से कोई वास्ता नहीं रहा है। टिकट बांटने में पार्टी आलाकमान द्वारा लिए गए फैसलों ने प्रदेश में असली भाजपाईयों को नाराज कर दिया है और अब चुनाव में पार्टी को भीतरघात का खतरा पैदा हो गया है।
उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने के 24 घंटे के बीच बने माहौल से संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा को दो और हजकां को एक सीट पर नुकसान झेलना पड़ सकता है। पार्टी ने रोहतक में बाहरी प्रत्याशी को मैदान में उतारा है जबकि भिवानी-महेंद्रगढ़ और सोनीपत सीटों पर भीतरघात का खतरा है।
उम्मीदवारों के चयन में बीते तीन महीने से जुटी भाजपा ने आखिरकार प्रत्याशी घोषित किए तो अपने पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं को दरकिनार कर दिया। पार्टी में आए बागी कांग्रेसियों को टिकट थमा दिए गए हैं।
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सोनीपत से भाजपा ने दो बार सांसद रहे किशन सिंह सांगवान के बेटे को तो टिकट नहीं दिया, अपने वरिष्ठ नेता व प्रवक्ता कैप्टन अभिमन्यु को भी किनारे करते हुए कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री रमेश कौशिक को टिकट दे दिया।
कौशिक 2005 में राई से कांग्रेस और 1996 में कैलाना से हविपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। कौशिक को टिकट दिए जाने के बाद यह उम्मीद कम है कि यहां से टिकट के चाहवान राजीव जैन और कैप्टन अभिमन्यु इस बार कौशिक को जिताने में मदद करेंगे। प्रदीप सांगवान तो सीधे-सीधे बगावत कर दी है।
रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा मौजूदा कांग्रेस सांसद हैं। यहां से कैप्टन अभिमन्यु भी चुनाव लड़ते रहे हैं। इस बार नरेश मलिक भी मजबूत दावेदार थे लेकिन भाजपा ने भिवानी जिले में सक्रिय रोहतक निवासी ओमप्रकाश धनखड़ को रोहतक से टिकट दे दी है।
धनखड़ को दादरी विधानसभा चुनाव से 2009 में मात्र 3156 वोट मिले थे। धनखड़ को रोहतक से टिकट मिलने के बाद उन पर बाहरी उम्मीदवार का ठप्पा लगना तय है।
भिवानी-महेंद्रगढ़ से पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव और भाजपा में शामिल हुए राव नरवीर सिंह को पहले गुड़गांव से टिकट मिली और बाद में भिवानी-महेंद्रगढ़ से। दो दिन पहले भाजपा में शामिल हुए धर्मबीर सिंह को टिकट मिल गई है। इससे सुधा यादव और नरवीर सिंह और उनके समर्थक खफा हैं।
भिवानी के भाजपाई भी धर्मबीर का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर जाट समुदाय की श्रुति चौधरी को टिकट दी है। नरवीर सिंह को हजकां टिकट पर गुड़गांव से पिछले चुनाव में 1,17,260 वोट मिले थे। वे हजकां छोड़ भाजपा में इसलिए शामिल हुए थे कि गुड़गांव सीट समझौते में भाजपा के पास जानी थी।
कुरुक्षेत्र से नारायणगढ़ निवासी राज कुमार सैनी को टिकट दी गई है। सैनी भी कुछ महीने पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं। जितेंद्र काका कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि वे पुराने भाजपाई नहीं हैं और हविपा से संबंध रखते थे लेकिन वे स्थानीय हैं।
करनाल से गठबंधन को हो सकता है नुकसान
गठबंधन के तहत करनाल सीट हजकां के खाते में है। भाजपा के सात नेता करनाल से टिकट के दावेदार थे, जिनमें खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो. रामबिलास शर्मा, वीरेंद्र मराठा, शशिपाल मेहता अग्रणी थे। ऐन वक्त पर भाजपा ने यह सीट हजकां को दे दी।
वीरेंद्र मराठा बसपा में शामिल हो गए और टिकट हासिल कर ली। मराठा पिछले चुनाव में बसपा की टिकट पर लड़ चुके हैं और 2,28,352 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। वे रोड बिरादरी से संबंध रखते हैं और करनाल जिले में रोड बिरादरी की आबादी काफी है। इसलिए करनाल सीट पर भाजपा-हजकां गठबंधन को नुकसान हो सकता है।
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उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने के 24 घंटे के बीच बने माहौल से संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा को दो और हजकां को एक सीट पर नुकसान झेलना पड़ सकता है। पार्टी ने रोहतक में बाहरी प्रत्याशी को मैदान में उतारा है जबकि भिवानी-महेंद्रगढ़ और सोनीपत सीटों पर भीतरघात का खतरा है।
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उम्मीदवारों के चयन में बीते तीन महीने से जुटी भाजपा ने आखिरकार प्रत्याशी घोषित किए तो अपने पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं को दरकिनार कर दिया। पार्टी में आए बागी कांग्रेसियों को टिकट थमा दिए गए हैं।
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सोनीपत से भाजपा ने दो बार सांसद रहे किशन सिंह सांगवान के बेटे को तो टिकट नहीं दिया, अपने वरिष्ठ नेता व प्रवक्ता कैप्टन अभिमन्यु को भी किनारे करते हुए कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री रमेश कौशिक को टिकट दे दिया।
कौशिक 2005 में राई से कांग्रेस और 1996 में कैलाना से हविपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। कौशिक को टिकट दिए जाने के बाद यह उम्मीद कम है कि यहां से टिकट के चाहवान राजीव जैन और कैप्टन अभिमन्यु इस बार कौशिक को जिताने में मदद करेंगे। प्रदीप सांगवान तो सीधे-सीधे बगावत कर दी है।
रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा मौजूदा कांग्रेस सांसद हैं। यहां से कैप्टन अभिमन्यु भी चुनाव लड़ते रहे हैं। इस बार नरेश मलिक भी मजबूत दावेदार थे लेकिन भाजपा ने भिवानी जिले में सक्रिय रोहतक निवासी ओमप्रकाश धनखड़ को रोहतक से टिकट दे दी है।
धनखड़ को दादरी विधानसभा चुनाव से 2009 में मात्र 3156 वोट मिले थे। धनखड़ को रोहतक से टिकट मिलने के बाद उन पर बाहरी उम्मीदवार का ठप्पा लगना तय है।
भिवानी-महेंद्रगढ़ से पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव और भाजपा में शामिल हुए राव नरवीर सिंह को पहले गुड़गांव से टिकट मिली और बाद में भिवानी-महेंद्रगढ़ से। दो दिन पहले भाजपा में शामिल हुए धर्मबीर सिंह को टिकट मिल गई है। इससे सुधा यादव और नरवीर सिंह और उनके समर्थक खफा हैं।
भिवानी के भाजपाई भी धर्मबीर का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर जाट समुदाय की श्रुति चौधरी को टिकट दी है। नरवीर सिंह को हजकां टिकट पर गुड़गांव से पिछले चुनाव में 1,17,260 वोट मिले थे। वे हजकां छोड़ भाजपा में इसलिए शामिल हुए थे कि गुड़गांव सीट समझौते में भाजपा के पास जानी थी।
कुरुक्षेत्र से नारायणगढ़ निवासी राज कुमार सैनी को टिकट दी गई है। सैनी भी कुछ महीने पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं। जितेंद्र काका कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि वे पुराने भाजपाई नहीं हैं और हविपा से संबंध रखते थे लेकिन वे स्थानीय हैं।
करनाल से गठबंधन को हो सकता है नुकसान
गठबंधन के तहत करनाल सीट हजकां के खाते में है। भाजपा के सात नेता करनाल से टिकट के दावेदार थे, जिनमें खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो. रामबिलास शर्मा, वीरेंद्र मराठा, शशिपाल मेहता अग्रणी थे। ऐन वक्त पर भाजपा ने यह सीट हजकां को दे दी।
वीरेंद्र मराठा बसपा में शामिल हो गए और टिकट हासिल कर ली। मराठा पिछले चुनाव में बसपा की टिकट पर लड़ चुके हैं और 2,28,352 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। वे रोड बिरादरी से संबंध रखते हैं और करनाल जिले में रोड बिरादरी की आबादी काफी है। इसलिए करनाल सीट पर भाजपा-हजकां गठबंधन को नुकसान हो सकता है।