मैं अब नहीं 'आप' की उम्मीदवार: सविता भट्टी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सविता भट्टी ने पार्टी हाईकमान को रविवार को सुबह ई-मेल भेजकर चुनाव नहीं लड़ने इरादे जाहिर कर दिए हैं। ई-मेल में उन्होंने बताया है कि पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। कार्यकर्ताओं में एकता का अभाव है। फिलहाल पार्टी की ओर से इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। सेक्टर-19 स्थित उनके घर के बाहर पूरे दिन मीडियाकर्मी डटे रहे। लेकिन रात तक उन्होंने नाम वापस लेने के मुद्दे पर मीडिया और समर्थकों से भी कोई भी बात नहीं की।
एक हफ्ते पहले हुआ था नाम घोषित
पार्टी ने सविता भट्टी का नाम ठीक एक हफ्ते पहले 1 मार्च ही घोषित किया था। टिकट घोषित होने के एक दिन बाद ही भट्टी ने आधिकारिक तौर पर अपना प्रचार शुरू कर दिया था। वे लगातार लोगों से मिल रही थीं। लोग उनसे जुड़ने भी लगे थे। सविता भट्टी का नाम घोषित होते ही यहां का मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा था, लेकिन अचानक उनके नाम वापस लेने से उनके समर्थकों में भी हड़कंप मच गया।
न तो समर्थकों से बात की और न ही मीडिया से
सविता भट्टी के चुनाव ने लड़ने की सूचना मिलते ही उनके निवास पर समर्थकों और मीडिया का जमावड़ा लग गया। देर रात तक भीड़ जमा रही, लेकिन भट्टी ने न तो समर्थकों से बात की और न ही मीडिया से। मीडिया से कहा गया कि भट्टी की राय जल्द ही मीडिया के पास भेज दी जाएगी। बाहर जमा कुछ कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे घर के अंदर हैं तो कुछ ने कहा कि वे दिल्ली चली गई हैं। पार्टी के लोगों ने इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया।
विरोधी गुट खुश तो समर्थक हुए निराश
भट्टी के इस कदम से पार्टी का एक गुट बहुत खुश है। इस गुट का कहना है कि भट्टी पार्टियों के नीतियों के मुताबिक चलने में नाकामयाब साबित हो रही थी, इसलिए उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि ये पार्टी के ही एक गुट की साजिश है। उनकी नेता सविता भट्टी ही है और वे ही यहां से चुनाव लड़ेंगी। देर रात तक समर्थक उनके पक्ष में नारेबाजी करते रहे।
अन्य दावेदार मीना शर्मा ने कहा- सविता ने धोखा दिया
पार्टी की टिकट की एक अन्य दावेदार मीना शर्मा ने कहा कि सविता भट्टी ने पार्टी व आम आदमी के साथ धोखा किया है। पार्टी में उनके टिकट का कोई विरोध नहीं था। कार्यकर्ता अब भी चाहते हैं कि वे चुनाव लड़े।