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प्राॅपर्टी आईडी सर्वे घोटाला : लोकायुक्त ने तलब की निकाय विभाग से जांच रिपोर्ट

Fri, 15 Dec 2023 01:29 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 15 Dec 2023 01:29 AM IST
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Lokayukta summons investigation report from civic body department
एसीबी की रिपोर्ट मिलने के बाद लोकायुक्त की कार्यवाही, 11 जनवरी तक का समय
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। याशी कंपनी के प्रॉपर्टी आईडी सर्वे घोटाले के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद वीरवार को लोकायुक्त जस्टिस हरि पाल वर्मा ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव से 11 जनवरी तक रिपोर्ट तलब की है। लोकायुक्त इस केस की अगली सुनवाई 11 जनवरी को करेंगे।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने 19 जुलाई, 2023 को लोकायुक्त को प्रॉपर्टी आईडी सर्वे में घोटाले की लिखित शिकायत दी थी। इस मामले में आरोपियों में 12 आईएएस को शामिल किया है। शिकायत पर लोकायुक्त जस्टिस हरि पाल वर्मा का नोटिस मिलते ही हरियाणा सरकार ने सभी नगर पालिकाओं, नगर निगमों, नगर परिषदों में प्रॉपर्टी आईडी का सर्वे करने वाली जयपुर की याशी कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। कंपनी के कुल 8 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि के बकाया बिल के भुगतान पर भी रोक लगा दी थी। ठेका लेते वक्त कंपनी द्वारा जमा कराई गई लाखों रुपये की परफॉर्मेंस बैंक गारंटी राशि सरकार ने जब्त की है और टेंडर एग्रीमेंट भी रद्द कर दिया।
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कपूर की इस शिकायत का संज्ञान लेते लोकायुक्त ने 8 अगस्त को डीजीपी (एंटी करप्शन ब्यूरो) को नोटिस भेज कर सरकार से 8 नवंबर तक जांच रिपोर्ट तलब की थी। जांच अधिकारी एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (मुख्यालय) के डीएसपी शुक्रपाल ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को दी। इस पर वीरवार को सुनवाई उपरांत लोकायुक्त जस्टिस हरि पाल वर्मा ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव से भी घोटाले के आरोपों की जांच रिपोर्ट 11 जनवरी तक तलब की है ।
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बिना जांच किए ही जारी करा दी राशि

टेंडर वर्क ऑर्डर की शर्त संख्या 37.6.7 के अंतर्गत याशी कंपनी द्वारा किए प्रॉपर्टी आईडी सर्वे की सभी नगर निगमों के आयुक्तों, नगर परिषदों के ईओ व सभी नगर पालिकाओं के सचिवों ने मौका वेरिफिकेशन करनी थी। सर्वे कार्य की मौका वेरिफिकेशन सही पाए जाने पर ही इन अधिकारियों ने साइन ऑफ सर्टिफिकेट जारी करने थे, तभी कंपनी को पेमेंट होनी थी। लेकिन सभी 88 शहरों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी वेरिफिकेशन रिपोर्ट में सर्वे को शत-प्रतिशत सही बताते हुए साइन ऑफ सर्टिफिकेट जारी करके याशी कंपनी को 57.55 करोड़ रुपये की पेमेंट करवा दी। कपूर का आरोप है कि जमीनी स्तर पर कंपनी का सर्वे पूरी तरह बोगस निकला। सर्वे भारी खामियां पाई गईं। पिछले दो वर्षों से कुल 42,75,579 संपत्तियों के मालिक इन गलतियों को ठीक कराने को धक्के खा रहे हैं।
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