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ग्राउंड रिपोर्ट: कर्णनगरी की मनोहर परीक्षा, BJP के लिए प्रतिष्ठा का सवाल; कांग्रेस के पास खोने को कुछ न पर...

Mon, 18 Mar 2024 10:53 AM IST
शाहरुख खान देव शर्मा, अमर उजाला, करनाल
देव शर्मा, अमर उजाला, करनाल Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 18 Mar 2024 10:53 AM IST
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सार
करनाल सीट पर मनोहर के सामने खुद को और सैनी को जितवाना बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं पर भाजपा का किला भेदकर ही इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव की नींव रखना चाह रही हैं। 
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Lok Sabha Elections 2024 Ground report of Karnal A test of Karnanagari A question of prestige for BJP manohar
Lok Sabha Elections 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मनोहर लाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी बीच में छोड़ लोकसभा सीट से उतरने के एक फैसले ने करनाल की लोकसभा सीट को देश की उन चुनिंदा सीटों के बीच ला खड़ा कर दिया जहां जीत किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं। कर्णनगरी के नाम से जानी जाती यह सीट कभी कांग्रेस का गढ़ थी, लेकिन बड़े-बड़े दिग्गजों को यहां जीत के लिए तरसता देखा गया। 


पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज तक को इस सीट से लगातार तीन बार 1980, 1984 व 1989 में हार झेलनी पड़ी थी। तीनों बार अंबाला की इस बेटी को कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा ने ही शिकस्त दी। इसके बाद सुषमा ने कभी हरियाणा से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। 


उनसे पहले, राजनीति के पीएचडी माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल भी यहां से हारे और कभी लौटकर करनाल नहीं आए। पिछले दस साल से कांग्रेस भी जीत के लिए तरस रही है। वर्ष 2014 में यहां से भाजपा के अश्विनी चोपड़ा सांसद बने और 2019 में संजय भाटिया रिकॉर्ड वोट से जीते। 

आजादी के बाद से इस सीट पर 18 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 11 बार कांग्रेस, चार बार भाजपा, 2 बार जनता पार्टी और एक बार भारतीय जनसंघ का प्रत्याशी जीता। चूंकि इस सीट पर पंजाबी बिरादरी का ज्यादा प्रभाव है, इसलिए भाजपा ने मनोहर लाल पर ही भरोसा जताया है। कांग्रेस भी किसी जिताऊ चेहरे की तलाश में है। 

अभी तक कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन वह करनाल का किला भेदकर ही इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव की नींव रखना चाह रही हैं। वहीं, भाजपा खासकर मनोहर लाल के लिए कई चुनौतियां हैं। 

 

खुद के साथ-साथ सभी 10 सीटें भाजपा की झोली में डालना व करनाल के विधानसभा उपचुनाव में नायब सैनी को जितवाना उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। अगर वे अपनी या नायब सैनी की सीट जितवाने में विफल रहते हैं तो सवाल उनके दस साल के कार्यकाल पर उठेंगे और विधानसभा चुनाव में विपक्ष इसे भुनाने में पीछे नहीं हटेगी।

अभी तक के समीकरणों के अनुसार, मुकाबला भाजपा वर्सेज कांग्रेस न होकर मनोहर वर्सेज कांग्रेस माना जा रहा है। कांग्रेस की तरफ से पिछली बार उतरे पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा फिर टिकट मांग रहे हैं। इनके अलावा वीरेंद्र राठौर घरौंडा और सुरेंद्र शर्मा नौल्था ने भी दावा ठोका है।

पिछले दो चुनाव में भाजपा के पंजाबी बिरादरी के प्रत्याशियों के सामने ब्राह्मण बिरादरी के प्रत्याशियों को उतारा था और दोनों बार कड़ी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। वहीं, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी इस सीट पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में जुटे हैं। 

तीन पर कांग्रेस, तीन पर भाजपा, दो आजाद के पास
करनाल लोकसभा क्षेत्र में दो जिले (करनाल व पानीपत) के नौ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इनमें करनाल का नीलोखेड़ी (एससी), इंद्री, करनाल, असंध व घरौंडा और पानीपत का इसराना (एससी), समालखा, पानीपत शहरी व पानीपत ग्रामीण विधानसभाएं शामिल हैं। इसराना, समालखा व असंध में जहां कांग्रेस के विधायक हैं, वहीं पानीपत ग्रामीण व शहरी, घरौंडा में भाजपा के विधायक हैं। नीलाखेड़ी व इंद्री से विधायक जीते थे लेकिन दोनों का समर्थन भाजपा को है जबकि करनाल सीट से मनोहर लाल इस्तीफा दे चुके हैं।

अब तक ये बने सांसद
वर्ष 1952 में कांग्रेस के वीरेंद्र कुमार सत्यवती करनाल के पहले सांसद बने थे। उसके बाद 1957 में सुभद्रा जोशी (कांग्रेस), वर्ष 1962 में स्वामी रामेश्वरानंद (जनसंघ), 1967 में माधव राम शर्मा (कांग्रेस), 1971 में दोबारा माधव राम शर्मा (कांग्रेस), 1977 में भगवत दयाल शर्मा (जनता पार्टी), 1978 के उपचुनाव में मोहिंद्र सिंह लाठर (जनता पार्टी), वर्ष 1980, 1984, 1989 व 1991 में पंडित चिरंजी लाल शर्मा (कांग्रेस), 1996 में आईडी स्वामी (भाजपा), 1998 में भजन लाल (कांग्रेस), 1999 आईडी स्वामी (भाजपा), वर्ष 2004 व 2009 में अरविंद शर्मा (कांग्रेस), 2014 अश्विनी चोपड़ा (भाजपा) व वर्ष 2019 में संजय भाटिया (भाजपा) से सांसद चुने गए।

मुद्दों की सियासत अभी भाजपा कमजोर
पिछले दो चुनाव में इस सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर का ज्यादा प्रभाव दिखा। यही वजह थी कि संजय भाटिया ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 6 लाख 56 हजार 142 मतों के अंतर से हरा देश में दूसरे नंबर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। मोदी लहर का इस बार क्या असर रहेगा, यह बाद की बात है, लेकिन स्थानीय मुद्दों का शोर भी खूब सुनाई देगा। पानीपत-करनाल-यमुनानगर रेल कनेक्टिविटी, दिल्ली से करनाल तक रैपिड रेल परियोजना, करनाल में फार्मा क्लस्टर, पानीपत के यमुना खादर क्षेत्र में शामलात देह की जमीन की मलकियत कराना, पानीपत के उद्यमियों को कई तरह की पाबंदियों से राहत दिलवाना, पानीपत में जीटी रोड से टोल हटवाने का मामला, पानीपत को एनसीआर से बाहर कराना यहां के बड़े मुद्दे हैं जिनका पिछले पांच साल में हल नहीं हो पाया।
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