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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में जातीय समीकरण में उलझा, आसान नहीं होगी किसी की भी राह

Mon, 06 May 2019 02:16 PM IST
खुशबू गोयल अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 06 May 2019 02:16 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Sonipat Constituency Ground Report
भूपेंद्र सिंह हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खुद चुनाव मैदान में उतरने के कारण हर किसी की नजर सोनीपत पर टिकी है। लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ी मुश्किल जजपा के दिग्विजय चौटाला बने हैं, जिसका भूपेंद्र हुड्डा को नुकसान पहुंच सकता है। क्योंकि हुड्डा के लिए कांग्रेस में अपना दबदबा कायम रखने के लिए जीत काफी अहम है तो भाजपा के सांसद रमेश कौशिक के सामने कुर्सी बचाने की बड़ी चुनौती है। इन सभी कारणों से सोनीपत सीट पर चुनाव पूरी तरह से जातीय समीकरण में उलझता जा रहा है, जिसमें किसी के लिए जातीय समीकरण को साधना आसान नहीं दिख रहा है।
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ऐसे में इनेलो के सुरेंद्र छिक्कारा व लोसुपा की राजबाला सैनी भी इस जातीय समीकरण को बिगाड़ने में लगे हुए हैं। जहां प्रत्याशी जातीय समीकरण साधकर संसद में पहुंचना चाहते हैं, वहीं अधिकतर वोटर भी जातिवाद में फंसते दिख रहे हैं। सोनीपत लोकसभा सीट पर हर पार्टी ने पहले ही जातीय समीकरण के आधार पर प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है। हालांकि सोनीपत लोकसभा सीट इसलिए भी काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां हर पार्टी के दिग्गज प्रत्याशी मैदान में हैं।
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जहां कांग्रेस से दो बार सीएम रहे भूपेंद्र हुड्डा को उतारा गया है, वहीं भाजपा ने वर्तमान सांसद रमेश कौशिक पर दोबारा दांव खेला है। यह भी माना जा रहा है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा को चुनाव में उतारने की चर्चाएं शुरू होने के कारण भाजपा ने गैर जाट कार्ड खेलते हुए सांसद रमेश कौशिक को दोबारा प्रत्याशी बनाया है। जजपा ने भी अपने युवा नेता व इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला को प्रत्याशी बनाया। वहीं इनेलो ने सुरेंद्र छिक्कारा व लोसुपा ने राजबाला सैनी को चुनावी मैदान में उतारा हुआ है। सोनीपत सीट पर जहां सबसे ज्यादा जाट वोटर हैं।
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वहीं बड़ी पार्टियों में तीन ने जाट प्रत्याशी ही मैदान में उतारे हैं। ऐसे में यह किसी तरह जाट वोटरों को अपने पक्ष में एकजुट करने में लगे हैं तो गैर जाट वोटरों में सेंध लगाने की कोशिश भी कर रहे हैं। सांसद रमेश कौशिक भी कुर्सी बचाने के लिए गैर जाट वोटरों को एकजुट करने के साथ ही जाट वोटरों मे सेंधमारी में लगे हैं, लेकिन रमेश कौशिक के लिए लोसुपा की राजबाला सैनी उस समय परेशानी खड़ी कर सकती है अगर वह गैर जाट में पिछड़ा वर्ग वोटरों को अपनी ओर खींचती है। इस तरह यह चुनाव विकास के मुद्दों से ज्यादा जातिवाद में फंसता दिख रहा है।

हुड्डा के लिए कांग्रेस में दबदबा कायम रखने की चुनौती

यह चुनाव पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व रमेश कौशिक के लिए सबसे ज्यादा अहम है। क्योंकि सोनीपत को पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ माना जाता है और यहां छह में से कांग्रेस के पांच विधायक हैं जो उनके ही गुट के विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस ने बड़े विश्वास के साथ हुड्डा को चुनावी मैदान में उतारा है।

हुड्डा के लिए यह चुनाव इसलिए ही अहम है कि उनको हाईकमान को यह साबित करके दिखाना होगा कि आज भी प्रदेश में उनकी अच्छी पकड़ है और यहां से जीत के साथ कांग्रेस में उनका दबदबा कायम रहेगा। वहीं रमेश कौशिक वर्तमान में सोनीपत सीट से सांसद हैं और उनका टिकट कटने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन उनपर भी यह सीट दोबारा लेने के लिए भाजपा ने विश्वास जताया है, इसलिए उनके सामने भी सीट बचाने की बड़ी चुनौती है।

हुक्के पर खूब चल रही चुनावी चर्चा
इस समय जहां गर्मी में तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है, वहीं शहर से लेकर गांवों तक चुनाव पर चल रही चर्चाएं भी माहौल को गर्म बना रही है। जब चुनाव के हालात देखने के लिए वेस्ट रामनगर में पहुंचे तो वहां देवराज समेत कई अन्य बुजुर्ग घर के बाहर बैठे हुए आराम से हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। उनके बीच दूसरी कोई बात नहीं हो रही थी और वह सभी पार्टियों के प्रत्याशियों की स्थिति की तुलना करने में लगे थे। यह बुजुर्ग भी जातीय समीकरण को हार-जीत का आधार मार रहे थे कि जाट वोटर का रुख प्रत्याशियों की हार-जीत में सबसे अहम साबित होगा।

 

सोनीपत लोकसभा सीट के मुद्दे

- दिल्ली के नजदीक होने के कारण मेट्रो ट्रेन को लाना
- ट्रेनों का ज्यादा से ज्यादा सोनीपत में ठहराव कराना
- जीटी रोड से होते हुए शहर के बाहर से रोहतक रोड के लिए बाईपास
- पेयजल समस्या को दूर करना
- किसानों की समस्याओं को दूर करने के साथ ही फसलों का बेहतर दाम दिलाना
- नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का काम जल्द से जल्द पूरा कराना

भूपेंद्र सिंह हुड्डा : कांग्रेस
मजबूत पक्ष - प्रदेश के दो बार लगातार सीएम होने के कारण लोगों में अच्छी पकड़ है। सोनीपत लोकसभा की 9 विधानसभा सीटों में पांच पर अपने गुट के विधायक होने का फायदा मिलेगा।
कमजोर पक्ष - जजपा व इनेलो से भी जाट प्रत्याशी होने के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस के स्टार प्रचारक होने के कारण ज्यादा समय नहीं दे पाने से भी असर पड़ सकता है।

रमेश कौशिक - भाजपा
मजबूत पक्ष - पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगी जा रही है। सोनीपत व जींद हल्के में भाजपा विधायक होने का फायदा मिल सकता है। गैर जाट प्रत्याशी होने का फायदा लेने में लगे हुए है।
कमजोर पक्ष - सांसद बनने के बाद लोगों के बीच नहीं रहने के कारण लगातार विरोध हो रहा है। जनता की समस्याओं का समाधान नहीं करा पाना भी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

दिग्विजय चौटाला - जजपा - आप
मजबूत पक्ष - राजनीति में युवा चेहरा होने के साथ ही जींद विधानसभा के उपचुनाव के नतीजे से फायदा मिल सकता है। दादा देवीलाल के नाम पर जनता से भावनात्मक रूप से जुड़ रहे।
कमजोर पक्ष - इनेलो व जजपा के अलग-अलग होने से बड़ा नुकसान होगा। सोनीपत के लिए बाहरी प्रत्याशी होने के साथ ही जजपा के गठन के बाद हुए जींद उपचुनाव व अब लोकसभा दोनों में खुद प्रत्याशी बनने से पार्टी में परिवारवाद की छाप नुकसानदायक हो सकती है।

सुरेंद्र छिक्कारा - इनेलो
मजबूत पक्ष - इनेलो का परंपरागत वोट के साथ ही अन्य वोट मिल सकता है। जींद के जुलाना से इनेलो विधायक होने का फायदा उठा सकते है।
कमजोर पक्ष - इनेलो के टूटकर जजपा बनने का नुकसान उठाना पड़ सकता है। तीन बड़ी पार्टियों से जाट प्रत्याशी होने से समस्या बढ़ सकती है।
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