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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में कांटे की टक्कर वाली सीटों पर कहीं गणित न बिगाड़ दे ‘नोटा’

Sat, 20 Apr 2019 12:48 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 20 Apr 2019 12:48 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Nota Button in EVM May Effect Election Results in Haryana
सांकेतिक तस्वीर
हरियाणा में इस बार कुछ सीटों पर कांटे की टक्कर होने की प्रबल संभावना है। सभी दलों द्वारा प्रत्याशी घोषित करने के बाद इन सीटों की तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन इन सीटों पर प्रत्याशियों के लिए चिंता का विषय यह बनेगा कि कड़े मुकाबले के बीच कहीं ‘नोटा’ उनका गणित न बिगाड़ दे। पिछले लोकसभा चुनाव में यह ऑप्शन हरियाणा में पहली बार लॉन्च हुआ था और हजारों की संख्या में मतदाताओं ने ‘नोटा’ दबाकर प्रत्याशियों का बहिष्कार किया था।
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मगर इस बार तो मतदाता कुछ ज्यादा ही जागरूक हैं और यही हाल रहा तो कांटे की टक्कर वाली सीटों पर ‘नोटा’ प्रत्याशियों का गणित भी बिगाड़ सकता है। यदि मतदाताओं को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं है तो वे ईवीएम पर नोटा का बटन दबाकर प्रत्याशियों के प्रति अपनी नापसंदगी व्यक्त कर सकते हैं। ईवीएम में सबसे आखिर में नोटा का बटन होगा।
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प्रत्याशियों से ज्यादा नाराज थे अंबाला के मतदाता

हरियाणा में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 34220 मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया था। इन मतदाताओं में सबसे ज्यादा संख्या अंबाला संसदीय क्षेत्र से थी। अंबाला क्षेत्र के 7816 मतदाताओं ने प्रत्याशियों का बहिष्कार करते हुए नोटा का इस्तेमाल किया था। जबकि कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में 2482, सिरसा क्षेत्र में 4033, हिसार क्षेत्र में 1645, करनाल क्षेत्र में 2929, सोनीपत क्षेत्र में 2403, रोहतक  क्षेत्र में 4932, भिवानी-महेंद्रगढ़ क्षेत्र में 1994, गुरुग्राम क्षेत्र में 2658 व फरीदाबाद क्षेत्र में 3328 मतदाताओं ने नोटा दबाया।

रोहतक में थे सबसे ज्यादा वोट रिजेक्ट

निर्वाचन कार्यालय इस बार मतदाताओं को विभिन्न अभियानों के जरिए जागरूक बनाने में जुटा हुआ है। हरियाणा के संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि ग्रामीण व शहरी मतदाताओं खासकर फर्स्ट टाइम वोटर्स को डम्मी ईवीएम के जरिए बताया बताया जा रहा है कि किस तरह उन्हें ईवीएम पर वोटिंग करते हुए अपने प्रत्याशी को वोट देना है।

उनके अनुसार ये ट्रेनिंग इसलिए भी जरूरी है कि कोई वोट रिजेक्ट न हो। उधर, देखा जाए तो वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जागरूकता के अभाव में ही 4169 वोट रिजेक्ट हुआ था। रिजेक्ट हुए वोटों में 259 वोट अंबाला, 281 वोट कुरुक्षेत्र, 166 वोट सिरसा, 563 वोट हिसार, 197 वोट करनाल, 478 वोट सोनीपत, 1065 वोट रोहतक, 926 वोट भिवानी-महेंद्रगढ़, 27 वोट गुरुग्राम और 207 वोट फरीदाबाद के शामिल थे।
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