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लोकसभा चुनाव 2019: खडूर साहिब में अकालियों के बीच ही खींची तलवारें, मिल रही है कड़ी चुनौती

Thu, 16 May 2019 02:53 PM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 16 May 2019 02:53 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Khadoor Sahib Constituency Ground Report
रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा
माझा, मालवा और दोआबा को आपस में जोड़ने वाले लोकसभा क्षेत्र खडूर साहिब में इस बार मुख्य रूप से अकालियों के बीच ही तलवारें खिंचीं हुई हैं। परिसीमन के बाद 2008 में अस्तित्व में आए इस लोकसभा क्षेत्र में अब तक 2009 और 2014 में चुनाव हुए और दोनों बार यह सीट अकाली दल की झोली में गई। इस समय रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा सांसद हैं लेकिन वे अब अकाली दल छोड़कर अपनी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) बना चुके हैं। इस लोकसभा क्षेत्र के मतदाता अकाली और कांग्रेस दोनों को परखते रहे हैं।
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इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह लोकसभा सीट को अकालियों के पास रही लेकिन इसके अंतर्गत आते नौ विधानसभा क्षेत्रों में से तरनतारन, खडूर साहिब, पट्टी, खेमकरण, बाबा बकाला, जंडियाला गुरु, सुल्तानपुर लोधी, कपूरथला और जीरा में कांग्रेस के विधायक हैं। शिअद टकसाली ने पहले जनरल जेजे सिंह को मैदान में उतारा था लेकिन बाद में फैसला बदलते हुए उन्होंने पीडीए की प्रत्याशी परमजीत कौर खालड़ा को समर्थन दे दिया है। इस तरह ब्रह्मपुरा और पीडीए के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने अकाली दल के खिलाफ वोटों के विभाजन को रोकने की नीति अपनाई है।
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इससे यह भी साफ हो गया है कि खडूर साहिब सीट पर मुख्य चुनौती शिअद बादल को ही मिलने वाली है। शिअद बादल ने बीबी जागीर कौर को यहां से टिकट दिया है, जिन्हें स्थानीय अकाली समर्थक बाहरी प्रत्याशी के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस की ओर से जसबीर सिंह डिंपा को मैदान में उतारा गया है जबकि आम आदमी पार्टी ने सीनियर कांग्रेसी नेता शमशेर सिंह दूलो की पत्नी हरबंस कौर दूलो को टिकट दिया है।
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पिछड़ा इलाका होने के बावजूद सभी राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव प्रचार में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है। अकाली दल बादल जहां इस मामले में बचाव की मुद्रा में है और कांग्रेस को विकास के मुद्दे पर निशाने पर ले रहा है, वहीं टकसाली व पीडीए प्रत्याशी और कांग्रेस की ओर से अकाली दल को बेअदबी के मुद्दे पर ही घेरने के लिए हर कदम उठाया जा रहा है।

कांग्रेस के जसबीर डिंपा विकास के मुद्दे पर जहां केंद्र की मोदी सरकार पर हमला करते दिखाई देते हैं वहीं परमजीत खालड़ा को पंथक चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। वे चुनाव में उतरने के अपने फैसले को, वाहेगुरु से मिला आदेश बता रही हैं और मानवाधिकारों के लिए चुनाव लड़ने की बात कह रही हैं।

दरअसल खालड़ा के पति व मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा को 1995 में तरनतारन जिले के खालड़ा गांव में उनके घर से पुलिसकर्मियों ने अगवा कर लिया था। उनकी हत्या के दोषी छह पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। आम आदमी पार्टी की ओर से हरबंस कौर दूलो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर ही निशाना साध रही हैं। उन्होंने पंजाब में कांग्रेस के मौजूदा शासन के दौरान विकास और वादाखिलाफी को चुनावी मुद्दा बनाया है।

विकास के लिहाज से पिछड़ा संसदीय क्षेत्र

इस संसदीय क्षेत्र की पहचान गुरुद्वारा श्री खडूर साहिब से है। श्री गुरु नानक देव जी अपनी यात्राओं के दौरान पांच बार यहां आए। पहले इस लोकसभा हलके का नाम तरनतारन था। आतंक के काले दौर में यह क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहा। सीमा से सटे होने के कारण यह क्षेत्र भारत-पाक युद्धों का भी गवाह रहा है।

विकास के लिहाज से यह इलाका बहुत पिछड़ा हुआ है और बेरोजगारी इस इलाके की सबसे बड़ी समस्या है। गोइंदवाल साहिब में लगा थर्मल प्लांट भी बेरोजगारी दूर नहीं हो पाई है। इस क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों में, 2011 से बंद पड़ी चीनी मिल, क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों की खराब वित्तीय हालत और दरिया ब्यास द्वारा हर साल इस क्षेत्र के बड़े हिस्से में मचाई जाने वाली तबाही हैं।

2014 में अकाली दल ने जीती यह सीट
परिसीमन के बाद 2009 में अस्तित्व में आई इस लोकसभा सीट पर पहले चुनाव में अकाली दल के रतन सिंह अजनाला विजयी रहे थे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी शिरोमणि अकाली दल (बादल) के उम्मीदवार रणजीत सिंह ने कांग्रेसी उम्मीदवार हरमिंदर सिंह गिल को 1,00,569 वोटों से हराया था।

अकाली-भाजपा गठबंधन प्रत्याशी को 44.9 फीसदी वोट शेयर के साथ 4,67,332 वोट मिले थे जबकि कांग्रेसी उम्मीदवार को 35.2 फीसदी मत शेयर के साथ कुल 3,66,763 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर रहे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार बलदीप सिंह को 13.9 फीसदी वोट के साथ कुल 1,44,521 वोट हासिल हुए थे।

सांसद का दावा

मौजूदा सांसद रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने अपने कार्यकाल के दौरान लोकसभा में कुल 30 सवाल पूछे और छह बहस में हिस्सा लिया। सांसद ने अपने कार्यकाल के दौरान सांसद निधि कोष से 90 फीसदी रकम का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए किया।

खडूर साहिब हलके में बढ़े 41537 वोटर
16वीं लोकसभा के मुकाबले इस बार लोकसभा हलका खडूर साहिब में 41537 वोटर बढ़े हैं, जिनमें ज्यादा संख्या 18 से 25 वर्ष के वोटरों की है। साफ है कि 17वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनाव में युवाओं की अहिम भूमिका रहेगी।

कुल वोटर : 1638842
पुरुष वोटर:  867895
महिला वोटर 770874
थर्ड जेंडर : 73
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