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लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस को पूर्व सीएम हुड्डा से फिर बड़े करिश्मे की आस, कांटे की होगी टक्कर

Wed, 24 Apr 2019 12:58 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 24 Apr 2019 12:58 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Haryana Formar CM Bhupinder Singh hooda Congress Candidate from Sonipat
भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा - फोटो : amar ujala
हरियाणा से चार बार संसद की दहलीज पार कर चुके पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सहारे कांग्रेस एक बार फिर अपनी चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश में है। हुड्डा 2005 में सांसद रहते हुए दिल्ली के रास्ते ही हरियाणा के सीएम की कुर्सी पर काबिज हुए थे। इससे पहले 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दस में से नौ लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि सोनीपत पर भाजपा ने कब्जा जमाया था।
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सीएम बनने के बाद 2009 में न केवल हुड्डा ने प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रिपीट कराई, बल्कि 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की झोली में दस में से नौ सीटें फिर डाली। हिसार सीट पर हजकां के भजन लाल जीतने में कामयाब रहे थे। 2014 में कांग्रेस ने केंद्र के बाद प्रदेश की सत्ता भी हाथ से खोई। इसके बाद हरियाणा कांग्रेस अनेक धड़ों में बंट गई।
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2019 लोकसभा के चुनावी रण को फतह करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने जहां हुड्डा को समन्वय समिति का चेयरमैन बनाया, वहीं नामांकन प्रक्रिया संपन्न होने से ठीक पहले उन्हें जाटलैंड सोनीपत से चुनावी दंगल में भी उतार दिया। हुड्डा के चुनाव में ताल ठोंकने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार हुआ है।
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हुड्डा का गढ़ सोनीपत, पिछले चुनाव में हार गए थे जगबीर मलिक

सोनीपत को पहले ही हुड्डा का गढ़ माना जाता है। बीते चुनाव में यहां हुड्डा समर्थक जगबीर मलिक भाजपा के रमेश कौशिक से हार गए थे, लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं। भाजपा सांसद रमेश कौशिक का काफी विरोध हो रहा है। जजपा की ओर से यहां पर दिग्विजय चौटाला ने उतरकर चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया है। जाटलैंड के इस रण में बाजी कौन मारेगा, ये तो 23 मई को ही साफ होगा, मगर हुड्डा के सोनीपत से चुनाव लड़ने पर जीटी रोड बेल्ट की लोकसभा सीटों पर भी कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।

तीन बार देवीलाल को हरा चुके हुड्डा
हुड्डा रोहतक सीट पर ताऊ देवीलाल को 1991, 1996 व 1998 में तीन बार हरा चुके हैं, जबकि 1999 में इंद्र सिंह से हार झेलनी पड़ी थी। 2004 में हुड्डा ने रोहतक में कैप्टन अभिमन्यु को हराकर फिर जीत दर्ज की थी। दिग्विजय चौटाला कहते हैं कि वे अपने परदादा ताऊ देवीलाल की हार का बदला लेने के लिए हुड्डा के सामने चुनाव मैदान में उतरे हैं। जाटलैंड के साथ नॉन जाट में भी हुड्डा का सिक्का चला तो विरोधियों के लिए दिक्कत खड़ी हो सकती है।

जाट के साथ गैर-जाट को भी तवज्जो, गुटबाजी को पाटने की कोशिश
कांग्रेस ने गैर-जाट वोट को साधने के लिए सिरसा से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, अंबाला से कुमारी सैलजा, हिसार से कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई, भिवानी-महेंद्रगढ़ से किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी, करनाल से कुलदीप शर्मा और गुरुग्राम से कैप्टन अजय यादव को उतारा है। कांग्रेस हाईकमान ने दिग्गजों को खुद व उनके परिवार के सदस्यों को उतारकर गुटबाजी की खाई को भी पाटने का काम किया है। अगर कांग्रेस एकजुट होकर लड़ी तो भाजपा के सभी दस सीटें जीतने के सपने पर काफी हद तक पानी फेर सकती है।
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