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लोकसभा चुनाव 2019: सीएम बनने के लिए हरियाणा में कांग्रेस के दिग्गज दावेदार 'इम्तिहान' में फंसे
Fri, 26 Apr 2019 12:47 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 26 Apr 2019 12:47 PM IST
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कांग्रेस हरियाणा के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में भावी सीएम पद के लिए अपना दम भरने वाले कांग्रेसी दिग्गज लोकसभा चुनाव 2019 के ‘इम्तिहान’ में फंस गए हैं। कांग्रेस हाईकमान ने भावी सीएम के दावेदारों को चुनावी रण में उतार दिया है। अब इन दावेदारों को जीत दर्ज करके अपना ‘दम’ साबित करना होगा।
इन कांग्रेसी दिग्गजों में वे नेता शामिल है, जो अपनी गुटबाजी के साथ खुद को प्रदेश का भावी सीएम प्रोजेक्ट करने में डटे हुए थे। दरअसल, हरियाणा में लोकसभा चुनाव के करीब चार महीने बाद ही विधानसभा चुनाव हैं। इन्हीं चुनाव के मद्देनजर सूबे के ये कांग्रेसी नेता गुटबाजी में आगे बढ़ते हुए खुद को सीएम का प्रबल दावेदार बताते हैं।
कुछ दावेदार नेताओं के समर्थकों ने तो अपने नेताओं के स्टीकर व पंफलेट ‘सीएम इन वेंटिंग’ और ‘हरियाणा के भावी सीएम’ शब्दों के साथ छपवाकर उन्हें पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में लगाना भी शुरू कर दिया था।
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इन कांग्रेसी दिग्गजों में वे नेता शामिल है, जो अपनी गुटबाजी के साथ खुद को प्रदेश का भावी सीएम प्रोजेक्ट करने में डटे हुए थे। दरअसल, हरियाणा में लोकसभा चुनाव के करीब चार महीने बाद ही विधानसभा चुनाव हैं। इन्हीं चुनाव के मद्देनजर सूबे के ये कांग्रेसी नेता गुटबाजी में आगे बढ़ते हुए खुद को सीएम का प्रबल दावेदार बताते हैं।
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कुछ दावेदार नेताओं के समर्थकों ने तो अपने नेताओं के स्टीकर व पंफलेट ‘सीएम इन वेंटिंग’ और ‘हरियाणा के भावी सीएम’ शब्दों के साथ छपवाकर उन्हें पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में लगाना भी शुरू कर दिया था।
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इन नेताओं को देनी होगी परीक्षा
हरियाणा के दो बार लगातार सीएम रह चुके कांग्रेसी नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस बार भी सीएम पद के प्रबल दावेदार हैं। लेकिन हाईकमान ने उन्हे सोनीपत संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उतार दिया है। उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा रोहतक सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। विरोधियों ने भी रोहतक और सोनीपत सीट से हुड्डा पिता-पुत्र को हराने की रणनीति बना रखी है। ऐसे में यदि दोनाें सीटों को जीतकर हुड्डा हाईकमान की झोली डालते हैं, तो निसंदेह आगामी विधानसभा चुनाव में उनका ‘सिक्का’ और मजबूती से चलेगा।
इसके अलावा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर भी सीएम पद की दौड़ में हैं। लेकिन पार्टी ने उन्हें फिर से सिरसा से उतार दिया है। वर्ष 2009 में इस सीट से तंवर सांसद रह चुके हैं। लेकिन 2014 में तंवर हार गए थे। इस बार तंवर के लिए जीत जरूरी है, ताकि वे अपना दम हाईकमान को दिखा सके। पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव भी खुद को सीएम पद का प्रबल दावेदार मानते हैं। लेकिन अभी पार्टी ने उन्हें गुरुग्राम संसदीय सीट से बतौर कांग्रेसी प्रत्याशी उतारा है।
जीत के साथ यदि कैप्टन अपना दमखम साबित करते हैं, तो उनकी भावी सीएम की दावेदारी को बल मिलेगा। विधायक कुलदीप बिश्नोई और सीएलपी लीडर किरण चौधरी भी सीएम पद के लिए खुद को योग्य मानते हैं। मगर उनका प्रभाव इस दावे को कितना मजबूत करता है, इसकी परीक्षा उन्हे अपने बच्चों को जीताकर देनी होगी। पार्टी ने किरण चौधरी की बेटी श्रुति को भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से और कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य को हिसार सीट से टिकट दी है। अब किरण और कुलदीप को ये दोनाें सीट जीतकर अपना प्रभाव साबित करना होगा।
2014 का चुनाव लड़ने से परहेज करने वाली पूर्व सांसद कुमारी सैलजा राज्यसभा में चली गई थी। वे भी खुद को सीएम पद के लायक मानती हैं मगर इससे पहले उन्हे बतौर कांग्रेस प्रत्याशी अंबाला संसदीय सीट से जीतकर अपने दबदबे को बरकरार रखना होगा।
इसके अलावा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर भी सीएम पद की दौड़ में हैं। लेकिन पार्टी ने उन्हें फिर से सिरसा से उतार दिया है। वर्ष 2009 में इस सीट से तंवर सांसद रह चुके हैं। लेकिन 2014 में तंवर हार गए थे। इस बार तंवर के लिए जीत जरूरी है, ताकि वे अपना दम हाईकमान को दिखा सके। पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव भी खुद को सीएम पद का प्रबल दावेदार मानते हैं। लेकिन अभी पार्टी ने उन्हें गुरुग्राम संसदीय सीट से बतौर कांग्रेसी प्रत्याशी उतारा है।
जीत के साथ यदि कैप्टन अपना दमखम साबित करते हैं, तो उनकी भावी सीएम की दावेदारी को बल मिलेगा। विधायक कुलदीप बिश्नोई और सीएलपी लीडर किरण चौधरी भी सीएम पद के लिए खुद को योग्य मानते हैं। मगर उनका प्रभाव इस दावे को कितना मजबूत करता है, इसकी परीक्षा उन्हे अपने बच्चों को जीताकर देनी होगी। पार्टी ने किरण चौधरी की बेटी श्रुति को भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से और कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य को हिसार सीट से टिकट दी है। अब किरण और कुलदीप को ये दोनाें सीट जीतकर अपना प्रभाव साबित करना होगा।
2014 का चुनाव लड़ने से परहेज करने वाली पूर्व सांसद कुमारी सैलजा राज्यसभा में चली गई थी। वे भी खुद को सीएम पद के लायक मानती हैं मगर इससे पहले उन्हे बतौर कांग्रेस प्रत्याशी अंबाला संसदीय सीट से जीतकर अपने दबदबे को बरकरार रखना होगा।