लुधियाना से ग्राउंड रिपोर्टः बिट्टू के लिए प्रदर्शन दोहराना बड़ी चुनौती, बैंस और गरेवाल भी टक्कर में
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लुधियाना लोकसभा सीट के लिए पहली बार चुनाव 1957 में हुए थे। उस समय कांग्रेस के बहादुर सिंह यहां से पहली बार सांसद बने थे। 1961 में अकाली दल के कपूर सिंह, 1967 में कांग्रेस केडी सिंह, 1971 में कांग्रेस के दविंदर सिंह, 1985 में कांग्रेस के मेवा सिंह, 1989 में शिअद मान की रजिंदर कौर, 1992 में कांग्रेस के गुरचरण सिंह, 1996 में अकाली दल के अमरीक सिंह, 1999 में कांग्रेस के गुरचरण सिंह, 2004 में अकाली दल के शरणजीत ढिल्लों, 2009 में कांग्रेस के मनीष तिवारी और 2014 में कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू विजयी रह चुके है।
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर से सांसद रवनीत बिट्टू पर भरोसा जताते उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है। 2014 के चुनाव में सांसद रवनीत बिट्टू 19709 वोट से जीते थे। अगर शिअद की बात करें तो उन्होंने मैदान में महेश इंद्र गरेवाल को चुनाव मैदान में उतारा है जिन्हें प्रकाश सिंह बादल का करीबी माना जाता है।
पीडीए की तरफ से लोक इंसाफ पार्टी प्रमुख सिमरजीत सिंह बैंस को अपना संयुक्त प्रत्याशी बनाया है, अगर बात करें आम आदमी पार्टी की तो उन्होंने प्रोफेसर तेजपाल सिंह गिल को चुनाव मैदान में उतारा है। हालांकि साल 2014 के चुनाव में एडवोकेट एचएस फुलका यहां से प्रत्याशी थे। उन्होंने कांग्रेसी सांसद रवनीत बिट्टू को अच्छी टक्कर दी थी। इस बार मुकाबला सांसद बिट्टू, बैंस और गरेवाल के बीच बन रहा है।
रवनीत बिट्टू (कांग्रेस)
मजबूती: दो बार सांसद रह चुके है, शहीद बेअंत सिंह के पोते हैं। उन्हें कैप्टन और राहुल का नजदीकी माना जाता है। एमपी लैंड फंड से शहर और गांवों में ओपन जिम लगाने का काम किया है।
कमजोरी: पांच साल के कार्यकाल में कोई बड़ा प्रोजेक्ट लुधियाना को नहीं मिला। इस दौरान आम जनता से भी दूर रहे। सिर्फ अपने दो विधायकों पर मेहरबानी दिखाने के कारण बाकी विधायक इनसे अंदर खाते खफा चल रहे हैं। पार्टी की आपसी गुटबाजी खत्म करने के लिए कुछ नहीं कर सके हैं।
महेश इंदर गरेवाल (शिअद)
मजबूती: सीनियर वकील होने के साथ गरेवाल को शिअद प्रमुख प्रकाश सिंह बादल का करीबी माना जाता है। सीएम सलाहकार रहने के साथ टकसाली अकाली माना जाता है। 1997 में हलका वेस्ट से विधायक बनने के बाद सरकार में मंत्री बने। हर विषय पर अच्छी जानकारी रखते है।
कमजोरी: पार्टी गुटबाजी को खत्म करने में नाकाम रहे हैं। इसलिए ग्रुप अंदरखाते विरोध कर रहे हैं। अपना प्रचार करने में भी पूरी तरह से सफल नहीं हो पा रहे हैं।
सिमरजीत सिंह बैंस (पीडीए)
मजबूती : हलका आत्मनगर से दो बार विधायक रह चुके हैं। आम जनता के साथ सीधे जुड़े हुए है। उनकी समस्याओं को हल करवाने में हमेशा आगे रहते हैं। भ्रष्ट अफसरों का स्टिंग कर उन्हें पकड़ने पर आम जनता में काफी लोकप्रिय है।
कमजोरी : इनकी पार्टी में ज्यादातर पुराने साथी साथ छोड़ चुके है। उन पर यही आरोप है कि वह वन मैन आर्मी की तरह काम करते है। पूरी पार्टी परिवार के आसपास ही रहती है। खुद अपने हलके में विकास कार्य नहीं करवा सके।
तेजपाल गिल( आप)
मजबूती : प्रोफेसर होने के साथ आम जनता के समस्याओं को अच्छे से समझते हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं को एकजुट कर रहे है। साधारण तरीके से मतदाताओं को अपनी तरफ खींच रहे है।
कमजोरी : मतदातओं के लिए नया चेहरा है। पार्टी के ज्यादातर सीनियर नेता साथ छोड़ चुके हैं।
कुल वोटर : 1683325
पुरूष : 9,03,624
महिला : 7,79,630
थर्ड जेंडर : 71
पोलिंग स्टेशन : 1721
2014 का चुनाव गणित
कुल मतदाता : 1559851
मतदान : 1101857
प्रतिशत : 70.64
9 विधानसभा क्षेत्र शामिल
शहरी ईस्ट
शहरी साउथ
शहरी नार्थ
शहरी वेस्ट
शहरी आत्म नगर
शहरी सेंट्रल
गिल
दाखा
जगरांव