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लोकसभा चुनाव 2019: फरीदाबाद की सियासी जंग जीतने को भाजपा और कांग्रेस में सिर-धड़ की बाजी
Fri, 10 May 2019 11:05 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 10 May 2019 11:05 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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औद्योगिक नगरी फरीदाबाद की सियासी जंग जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस में सिर-धड़ की बाजी लगी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटी इस सीट पर दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर है। भाजपा की ओर से सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर मैदान में हैं तो कांग्रेस ने चार बार सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना को उतारा है। भड़ाना तीन बार फरीदाबाद व एक बार मेरठ से सांसद रहे हैं। इस सीट पर गुर्जर बनाम भड़ाना की राजनीतिक लड़ाई में मोदी फैक्टर अहम रोल अदा करने वाला है।
सांसद के प्रति लोगों में नाराजगी है, उन्हें विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। कृष्ण पाल अगर ये मानकर चलें कि वह अपने बूते सियासत के इस महाभारत का चक्रव्यूह भेद लेंगे तो फिलहाल यह मुमकिन नजर नहीं आ रहा। गुर्जर अगर दूसरी बार संसद की दहलीज लांघते हैं तो उनकी जीत में सबसे बड़ा योगदान पीएम नरेंद्र मोदी का होगा। पिछली बार भी गुर्जर को मोदी लहर में ही बड़ी जीत मिली थी। कांग्रेस इस बार फिर भड़ाना के सहारे वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।
भड़ाना पिछला चुनाव हारने के बाद पहले इनेलो और फिर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2017 में उत्तर प्रदेश के मीरापुर विधानसभा से विधायक चुने गए, लेकिन कांग्रेस से उनका मोह पूरा तरह टूटा नहीं था। प्रियंका गांधी के पूर्वी उत्तरप्रदेश की प्रभारी बनते ही वह फिर से कांग्रेसी हो गए। पूर्व सांसद कांग्रेस टिकट लेने में तो सफल हो गए हैं पर अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पांचवीं बार सांसद बनने की है। कांग्रेस ने विधायक ललित नागर का टिकट काटकर भड़ाना को दिया है।
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नागर भले ही फफक-फफक कर रोते हुए उन्हें अपना समर्थन दे चुके हों, लेकिन समर्थकों के मन में अपने नेता का टिकट कटने की टीस कहीं न कहीं बरकरार है। सामने तो सब कांग्रेसी अपने प्रत्याशी के साथ हैं, मगर अंदरखाने खूब खिचड़ी पक रही है। भड़ाना को कांग्रेस से ही जोर का झटका धीरे से लग सकता है। उन्हें इस बात का आभास भी है, कुछेक कांग्रेस नेताओं से भितरघात की आशंका बनी हुई है। भितरघात हुआ तो गुर्जर को रोककर पांचवीं बार संसद पहुंचने का उनका सपना चकनाचूर हो सकता है।
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सांसद के प्रति लोगों में नाराजगी है, उन्हें विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। कृष्ण पाल अगर ये मानकर चलें कि वह अपने बूते सियासत के इस महाभारत का चक्रव्यूह भेद लेंगे तो फिलहाल यह मुमकिन नजर नहीं आ रहा। गुर्जर अगर दूसरी बार संसद की दहलीज लांघते हैं तो उनकी जीत में सबसे बड़ा योगदान पीएम नरेंद्र मोदी का होगा। पिछली बार भी गुर्जर को मोदी लहर में ही बड़ी जीत मिली थी। कांग्रेस इस बार फिर भड़ाना के सहारे वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।
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भड़ाना पिछला चुनाव हारने के बाद पहले इनेलो और फिर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2017 में उत्तर प्रदेश के मीरापुर विधानसभा से विधायक चुने गए, लेकिन कांग्रेस से उनका मोह पूरा तरह टूटा नहीं था। प्रियंका गांधी के पूर्वी उत्तरप्रदेश की प्रभारी बनते ही वह फिर से कांग्रेसी हो गए। पूर्व सांसद कांग्रेस टिकट लेने में तो सफल हो गए हैं पर अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पांचवीं बार सांसद बनने की है। कांग्रेस ने विधायक ललित नागर का टिकट काटकर भड़ाना को दिया है।
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नागर भले ही फफक-फफक कर रोते हुए उन्हें अपना समर्थन दे चुके हों, लेकिन समर्थकों के मन में अपने नेता का टिकट कटने की टीस कहीं न कहीं बरकरार है। सामने तो सब कांग्रेसी अपने प्रत्याशी के साथ हैं, मगर अंदरखाने खूब खिचड़ी पक रही है। भड़ाना को कांग्रेस से ही जोर का झटका धीरे से लग सकता है। उन्हें इस बात का आभास भी है, कुछेक कांग्रेस नेताओं से भितरघात की आशंका बनी हुई है। भितरघात हुआ तो गुर्जर को रोककर पांचवीं बार संसद पहुंचने का उनका सपना चकनाचूर हो सकता है।
आप और इनेलो पहुंचाएंगे नुकसान
आम आदमी पार्टी के नवीन जयहिंद यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। इनेलो ने महेंद्र चौहान को टिकट दिया है। दिल्ली में आप सरकार होने के कारण जयहिंद यहां से संसद पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्हें पार्टी के धरातल पर मजबूत न होने व नेताओं के दूसरे दलों में जाने का नुकसान हो रहा है। जजपा के गठन के बाद इनेलो भी अब पहले जितनी मजबूत नहीं रही। इसलिए आप और इनेलो दोनों भाजपा-कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाएंगे।
चुनाव से पहले भाजपा बिछा चुकी बिसात
फरीदाबाद लोकसभा सीट फिर जीतने को लेकर भाजपा अपनी बिसात बिछा चुकी है। सीट के तहत आने वाले नौ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने खुद को काफी मजबूत किया है। तीन सीटों पर कांग्रेस और तीन सीटों पर इनेलो-बसपा विधायक होने के चलते भाजपा ने विपक्षी विधायकों में जबरदस्त सेंधमारी की।
हथीन के इनेलो विधायक केहर सिंह रावत को भाजपा में शामिल कराया। फरीदाबाद एनआईटी के विधायक नागेंद्र भड़ाना इनेलो से पहले ही बागी होकर भाजपा समर्थक बन चुकेहैं, हालांकि उन्होंने भाजपा ज्वाइन नहीं की है। पृथला से बसपा विधायक टेकचंद शर्मा भी भाजपा का समर्थन करते हैं, इस पर पार्टी से निलंबित चल रहे हैं।
चुनाव से पहले भाजपा बिछा चुकी बिसात
फरीदाबाद लोकसभा सीट फिर जीतने को लेकर भाजपा अपनी बिसात बिछा चुकी है। सीट के तहत आने वाले नौ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने खुद को काफी मजबूत किया है। तीन सीटों पर कांग्रेस और तीन सीटों पर इनेलो-बसपा विधायक होने के चलते भाजपा ने विपक्षी विधायकों में जबरदस्त सेंधमारी की।
हथीन के इनेलो विधायक केहर सिंह रावत को भाजपा में शामिल कराया। फरीदाबाद एनआईटी के विधायक नागेंद्र भड़ाना इनेलो से पहले ही बागी होकर भाजपा समर्थक बन चुकेहैं, हालांकि उन्होंने भाजपा ज्वाइन नहीं की है। पृथला से बसपा विधायक टेकचंद शर्मा भी भाजपा का समर्थन करते हैं, इस पर पार्टी से निलंबित चल रहे हैं।
विधायकों की लीड पर टिकी निगाहें
विपुल गोयल फरीदाबाद से विधायक होने के साथ सरकार में उद्योग मंत्री भी हैं। पार्टी उनसे अच्छी-खासी लीड चाह रही है। सीमा त्रिखा बड़खल से विधायक होने के अलावा मुख्य संसदीय सचिव रह चुकी हैं। मूलचंद शर्मा भी बल्लभगढ़ से भाजपा के विधायक हैं। इन पर भी जीत का दारोमदार है। इसके अलावा पार्टी में आए इनेलो विधायक व अन्य दो समर्थक विधायकों के हलकों से भी भाजपा बड़ी लीड के लिए जोर मार रही है। पलवल से कांग्रेस विधायक करण दलाल, होडल से उदय भान व तिगांव से ललित नागर का जीत-हार में अहम रोल रहेगा।
4,66,873 वोट से जीते थे गुर्जर
2014 में कृष्ण पाल गुर्जन ने अवतार सिंह भड़ाना को 4,66,873 वोट से हराया था। कृष्ण पाल को कुल 57.7 फीसद मत के साथ 6,52,516 वोट मिले थे, जबकि अवतार सिंह भड़ाना को 1,85,643 वोट पड़े थे। तीसरे स्थान पर रहे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आरके आनंद को 1,32,472 वोट से ही संतोष करना पड़ा था।
जाट, गुर्जर, दलित, ब्राह्मण व ओबीसी की-फैक्टर
फरीदाबाद सीट पर चार प्रमुख समुदाय प्रत्याशियों का समीकरण बनाते-बिगाड़ते हैं। यहां जाट मतदाता 3.10 लाख, एससी 3.10 लाख, ब्राह्मण दो लाख, अन्य पिछड़ा वर्ग 3.00 लाख, गुर्जर 2.95 लाख, मुस्लिम 2 दो लाख, पंजाबी 1.10 लाख, वैश्य 1.10 लाख, राजपूत 1 लाख हैं। कांग्रेस फरीदाबाद सीट को छह, भाजपा चार व एक बार अन्य दल जीत चुका है।
4,66,873 वोट से जीते थे गुर्जर
2014 में कृष्ण पाल गुर्जन ने अवतार सिंह भड़ाना को 4,66,873 वोट से हराया था। कृष्ण पाल को कुल 57.7 फीसद मत के साथ 6,52,516 वोट मिले थे, जबकि अवतार सिंह भड़ाना को 1,85,643 वोट पड़े थे। तीसरे स्थान पर रहे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आरके आनंद को 1,32,472 वोट से ही संतोष करना पड़ा था।
जाट, गुर्जर, दलित, ब्राह्मण व ओबीसी की-फैक्टर
फरीदाबाद सीट पर चार प्रमुख समुदाय प्रत्याशियों का समीकरण बनाते-बिगाड़ते हैं। यहां जाट मतदाता 3.10 लाख, एससी 3.10 लाख, ब्राह्मण दो लाख, अन्य पिछड़ा वर्ग 3.00 लाख, गुर्जर 2.95 लाख, मुस्लिम 2 दो लाख, पंजाबी 1.10 लाख, वैश्य 1.10 लाख, राजपूत 1 लाख हैं। कांग्रेस फरीदाबाद सीट को छह, भाजपा चार व एक बार अन्य दल जीत चुका है।