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चंडीगढ़ः भाजपा ने गांवों में कांग्रेसी किले को ढहाया, किसी जमाने में पार्टी का वोट बैंक था
Sat, 25 May 2019 01:07 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 25 May 2019 01:07 PM IST
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किरण खेर
- फोटो : Amar Ujala
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इस बार मोदी फैक्टर चंडीगढ़ के ग्रामीण वोटरों पर सिर चढ़कर बोला है। किसी वक्त में गांवों का वोट बैंक कांग्रेस का पारंपरिक वोट माना जाता था। हर बार कांग्रेस यहां से लीड करती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। 99 फीसदी गांवों में भाजपा ने बाजी मारी है। कांग्रेस सहित अन्य पर्टियों ने गांवों से खत्म हुई पंचायत व विकास का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।
आप का फोकस भी गांवों पर रहा, लेकिन यहां के वोट भाजपा के खाते में गई। कांग्रेस का कहना है कि गांवों के खिसकते जनाधार पर वह मंथन करेगी। आखिर उसका वोट बैंक कैसे खिसका। हालांकि, विशेषज्ञों का इस बारे में कुछ और कहना है। उनके मुताबिक गांव में जितनी आबादी पुराने ग्रामीणों की है, उससे कहीं ज्यादा आबादी अब किराएदारों की है।
यह किराएदार हिमाचल, उत्तराखंड, यूपी और बिहार के हैं। जहां से ये आते हैं, वहां पर मोदी की योजनाओं का असर है, इसलिए इन लोगों पर बीजेपी का प्रभाव ज्यादा है और खुलकर मोदी का समर्थन किया। गांवों में सिख आबादी भी है। अकाली-भाजपा गठजोड़ की वजह से यह वोट भी बीजेपी के खाते में गया है।
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दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि शहर हो या गांव। हर जगह के लोगों के मन में विश्वास हो चुका है कि भाजपा ही विकास कर सकती है। देश भर में मोदी लहर है।
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आप का फोकस भी गांवों पर रहा, लेकिन यहां के वोट भाजपा के खाते में गई। कांग्रेस का कहना है कि गांवों के खिसकते जनाधार पर वह मंथन करेगी। आखिर उसका वोट बैंक कैसे खिसका। हालांकि, विशेषज्ञों का इस बारे में कुछ और कहना है। उनके मुताबिक गांव में जितनी आबादी पुराने ग्रामीणों की है, उससे कहीं ज्यादा आबादी अब किराएदारों की है।
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यह किराएदार हिमाचल, उत्तराखंड, यूपी और बिहार के हैं। जहां से ये आते हैं, वहां पर मोदी की योजनाओं का असर है, इसलिए इन लोगों पर बीजेपी का प्रभाव ज्यादा है और खुलकर मोदी का समर्थन किया। गांवों में सिख आबादी भी है। अकाली-भाजपा गठजोड़ की वजह से यह वोट भी बीजेपी के खाते में गया है।
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दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि शहर हो या गांव। हर जगह के लोगों के मन में विश्वास हो चुका है कि भाजपा ही विकास कर सकती है। देश भर में मोदी लहर है।
भाजपा-कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा, जीत का मार्जिन कम हुआ
लगातार दूसरी बार जीत हासिल करने के साथ भाजपा ने अपना वोट शेयर बढ़ाया है, लेकिन जीत के मार्जिन में कमी आई है। पिछली बार किरण खेर को कुल 191362 वोट मिले थे। तब बंसल को उन्होंने 69642 वोटों से हराया था। उस दौरान पार्टी का वोट शेयर 42.2 फीसदी था। इस बार किरण खेर को कुल 231188 वोट मिले और उन्होंने पवन बंसल को उन्होंने करीब 46970 वोटों से हराया। जीत के साथ पार्टी को वोट शेयर 50.64 फीसदी तक पहुंच गया। यह बीजेपी के लिए अच्छा संकेत है।
हालांकि, कांग्रेस का भी वोट शेयर बढ़ा है। पिछली दफा कांग्रेस का वोट शेयर 26.84 फीसदी था, जबकि इस बार बढ़कर 40.35 फीसदी पहुंच गया है। कांग्रेस के बढ़े वोट शेयर के पीछे माना जा रहा है कि उसने आप के वोट बैंक में सेंध लगा दी है। पिछली बार आप की वजह से ही कांग्रेस का खेल बिगड़ा था। पिछली बार आप को जो वोट मिला था, वह कांग्रेस का था। कुल मिलाकर कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने में काफी हद तक कामयाब रही है।
जहां बंसल ने डाला वोट, वहां से किरण 19 वोट से जीती
सेक्टर 28 के बूथ संख्या 228 से किरण खेर ने 19 वोट से जीत हासिल की है। इस बूथ पर बंसल ने वोट डाला था। यहां पर बीजेपी को 410 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 391 वोट। भाजपा ने इस बूथ से 19 वोटों की लीड हासिल की। पवन बंसल सेक्टर-28 में ही रहते हैं।
हालांकि, कांग्रेस का भी वोट शेयर बढ़ा है। पिछली दफा कांग्रेस का वोट शेयर 26.84 फीसदी था, जबकि इस बार बढ़कर 40.35 फीसदी पहुंच गया है। कांग्रेस के बढ़े वोट शेयर के पीछे माना जा रहा है कि उसने आप के वोट बैंक में सेंध लगा दी है। पिछली बार आप की वजह से ही कांग्रेस का खेल बिगड़ा था। पिछली बार आप को जो वोट मिला था, वह कांग्रेस का था। कुल मिलाकर कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने में काफी हद तक कामयाब रही है।
जहां बंसल ने डाला वोट, वहां से किरण 19 वोट से जीती
सेक्टर 28 के बूथ संख्या 228 से किरण खेर ने 19 वोट से जीत हासिल की है। इस बूथ पर बंसल ने वोट डाला था। यहां पर बीजेपी को 410 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 391 वोट। भाजपा ने इस बूथ से 19 वोटों की लीड हासिल की। पवन बंसल सेक्टर-28 में ही रहते हैं।
किस गांव में किसको कितने वोट
गांव भाजपा कांग्रेस
कैंबवाला 974 787
किशनगढ़ 2453 1110
हल्लोमाजरा 3873 1429
मौलीजांगरा 6970 4714
धनास 5722 4330
संगरूर 786 419
बुड़ैल 1576 1082
रायपुरखुर्द 2053 900
बहलाना 1893 844
दड़वा 3963 2285
खुड्डा लाहौरा 1888 1440
खुड्डा जस्सू 635 468
खुड्डा अली शेर 1145 1222
रायपुरकलां 542 232
मलोया 2701 2278
बड़हेड़ी 3441 2612
डड्डूमाजरा 1708 1519
गांवों में हमने काफी मेहनत की है। कार्यकर्ताओं ने दिन रात एक किया। हमें उम्मीद थी कि यहां से पार्टी को लीड मिलेगी। इस बारे में मंथन किया जाएगा कि आखिर यहां से पार्टी को क्यों नहीं बढ़त मिली।
- सुभाष चावला, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
कैंबवाला 974 787
किशनगढ़ 2453 1110
हल्लोमाजरा 3873 1429
मौलीजांगरा 6970 4714
धनास 5722 4330
संगरूर 786 419
बुड़ैल 1576 1082
रायपुरखुर्द 2053 900
बहलाना 1893 844
दड़वा 3963 2285
खुड्डा लाहौरा 1888 1440
खुड्डा जस्सू 635 468
खुड्डा अली शेर 1145 1222
रायपुरकलां 542 232
मलोया 2701 2278
बड़हेड़ी 3441 2612
डड्डूमाजरा 1708 1519
गांवों में हमने काफी मेहनत की है। कार्यकर्ताओं ने दिन रात एक किया। हमें उम्मीद थी कि यहां से पार्टी को लीड मिलेगी। इस बारे में मंथन किया जाएगा कि आखिर यहां से पार्टी को क्यों नहीं बढ़त मिली।
- सुभाष चावला, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता